सुविचार 504

ऎसा व्यवहार आपके सामने आ सकता है कि किसी के द्वारा मानयुक्त शब्द सुन कर आप बहुत खुश हो जाएँ, यह भी फिसलने की स्थिति है. बहुत अपमान मिल जाए उस समय भी व्यक्ति में बहुत भारी निराशा आ जाती है, ये सारी परिस्थितियाँ आएँगी, लेकिन सतर्क रहना बहुत जरुरी है, सतर्क रहने का मतलब है कि होशपूर्वक चलते जाइए. सोचते रहना कि संसार अपने- अपने स्वार्थ पूरे करने के हिसाब से प्रशंसा भी करेंगे, किसी के स्वार्थ पर यदि चोट लगेगी तो वह निन्दा भी करेंगे.

सुविचार 503

रोज़ाना ख़ुद को बेहतर बनाने का प्रयास करें. हर किसी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. दूसरों से और अपनी ग़लतियों से भी सीखें तथा ख़ुद को और बेहतर इंसान बनाने की दिशा में प्रयास करें.

सुविचार 502

जीवन अनमोल है………… दुःख, परेशानियां, कष्ट किस के जीवन में नहीं आते. उन सब का निवारण भी हो जाता है बिलकुल वैसे ही, जैसे रात के बाद उजियारे की किरण भोर का एलान कर देती है.

सुविचार 501

नरिअलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय

उजे खवरी जनइबो आदित्य से
सुगा दिहन जुठियाय
उजे मरवो रे सुग्गा धनुस से, ओह पर सुगा मेड़राय
उजे खवरी जनइबो आदित्य से,
सुगा दिहन जुठियाय
उजे मरवो रे सुग्गा धनुस से, सुगा जइहें मुरझाय
अमरुधवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय
केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय
उजे खबरी जनयवो आदित से
मरबो रे सुगा धनुष से, सुगा जइहें मुरझाय
नरिअलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय.

सुविचार 500

जिंदगी हल्की महसूस होगी, अगर दूसरों से कम उम्मीद और खुद पर ज्यादा भरोसा हो तो..!!
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