सुविचार 541

इन्सान जब सभ्य होता है तो प्रायः अधिकांश लोगों का चहेता बन जाता है. उस के व्यवहार से मित्रता,प्रेम, सरलता, सहजता आदि गुण झलकते हैं.

सुविचार 540

आप की सक्रियता, कार्य- कुशलता सिर्फ आनन्द के लिए है. जो व्यक्ति अपने संतोष को नहीं जानता है, वह कार्य कुशलता से उत्पन्न होने वाले सुख को नहीं प्राप्त कर पाता.

सुविचार 537

जीवन में कभी किसी से अपनी तुलना मत कीजिए. आप जैसे हैं, सर्वश्रेष्ठ हैं,  रब की हर रचना अपने आप में सर्वोत्तम है.

सुविचार 536

जीवन में असफलता या कठिन समय आए तो उस से निराश होने के बजाय व्यक्ति को उस से बाहर निकलने का प्रयत्न करना चाहिए, उम्मीदें उन्हीं की पूरी होती हैं, जो निरन्तर प्रयास करते हैं.
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