सुविचार 395

किसी की बात तुरन्त काटने की आदत न डालें, कोई कुछ बोल रहा है, उसका आधार क्या है, समझने की कोशिश करें.

सुविचार 394

हमें अधिक शान्ति मिलती, यदि हम अपने को दूसरों के काम और वचनों में उलझाये न होते ; उन वस्तुओं में न फंसे होते, जिनसे हमारा कोई सम्बन्ध नहीं है.

सुविचार 392

जो दूसरों के कामों की  आलोचना में ही लगे रहते हैं, वे अपना समय तो व्यर्थ खोते ही हैं, दोष देखने की उनकी आदत बन जाती है और जिनको दूसरों में दोष ही दीखते हैं, उनके ह्रदय की जलन कभी मिट ही नहीं सकती.

सुविचार 391

मनुष्य का काम ही होता है कि जीवन में अवसरों को खोज कर अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करे – यही मनुष्य जीवन का उद्देश्य है.
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