सुविचार 397 | Nov 7, 2014 | सुविचार मन के संकल्प- विकल्प प्रतिछण एक नई सृष्टि की रचना कर रहे होते हैं, जो हमारे मन में है वही हम दूसरों में देखने लगते हैं.
सुविचार 396 | Nov 7, 2014 | सुविचार हमेशा चीजों को अपनी जगह ही खड़े होकर न देखें, सोचें कि सामने- वाला कहाँ खड़ा है और उसे वहाँ से चीजें कैसी दिख रही हैं.
सुविचार 395 | Nov 7, 2014 | सुविचार किसी की बात तुरन्त काटने की आदत न डालें, कोई कुछ बोल रहा है, उसका आधार क्या है, समझने की कोशिश करें.
सुविचार 394 | Nov 6, 2014 | सुविचार हमें अधिक शान्ति मिलती, यदि हम अपने को दूसरों के काम और वचनों में उलझाये न होते ; उन वस्तुओं में न फंसे होते, जिनसे हमारा कोई सम्बन्ध नहीं है.
सुविचार 392 | Nov 6, 2014 | सुविचार जो दूसरों के कामों की आलोचना में ही लगे रहते हैं, वे अपना समय तो व्यर्थ खोते ही हैं, दोष देखने की उनकी आदत बन जाती है और जिनको दूसरों में दोष ही दीखते हैं, उनके ह्रदय की जलन कभी मिट ही नहीं सकती.