सुविचार 204

हर इन्सान के साथ जीवन में कुछ न कुछ होता ही है,

उस बात को पकड़ कर बैठ जाने से जीवन नहीं चलता. उसे भूल कर आगे बढ़ें.

 

 

सुविचार 203

जीवन में सबसे मुश्किल काम है सरल, संतुलित बने रहना, लेकिन यह नामुमकिन नहीं है.

यदि चंद छोटी-छोटी बातों को आप अपनी दिनचर्या और जीवन का हिस्सा बनाकर अपनी आदत में शुमार कर लेंगे,

तो ज़िंदगी न स़िर्फ बेहतर लगेगी, बल्कि हेल्दी भी बनेगी.

 

सुविचार – इंतज़ार, इन्तजार, प्रतिछा – 202

ऐ ज़िन्दगी !

कितना और इंतज़ार करवाओगी ?
पहले राशन की लाईनों में
टिकट खिड़कियों में
बसों ट्रेनों के दरवाजों पर
सिनेमा के बुकिंग आफिस पर
इंटरव्यू के लिये दफ्तरों के आगे
फिर अस्पतालों में
और अब . ….
डाक्टरों के केबिन के बाहर‌ ।
जिंदगी
एक इंतज़ार है।
एक लम्बा रहस्य से भरा।
जिसमें सामने एक भयानक नदी है
और उस पार डरावना आग का दरिया।
राह इतनी भी आसान नहीं।
दूर होना तो और
मुश्किल।
लेकिन तू है न ! ( रब्ब )
– तेज बीर सिंह सधर

सुविचार 201

कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उससे लड़ा न जा सके , इसलिए हिम्मत रखें.
जो दूसरों को पार लगाती है, वही कश्ती किनारा पाती है.
तुम बेसहारा हो तो किसी का सहारा बनो

तुमको अपने आप ही सहारा मिल जाएगा.

कश्ती कोई डूबती पहुँचा दो किनारे पे,

तुमको अपने आप ही किनारा मिल जाएगा.

सुविचार – इश्क क्या है ? – 200

14242369779_4959f8abd5

दुःख | दर्द | अफ़सोस | वेदना | व्यथा | शोक | संताप | मातम | पीड़ा | विपदा | खेद | तकलीफ़ | कसक | अवसाद | आफ़त | कुढ़न | खिन्नता | गम | ग्लानि | ज़हमत | टीस | ताप | त्रास | कष्ट | दरद | दुखड़ा | बला | बियाधि | मलाल | मुसीबत | यंत्रणा | यातना | रंज | रंजोगम | आर्ति | विषाद | शूल |

मतलब
इश्क

सुविचार – “नहीं, धन्यवाद” कहना महत्वपूर्ण है – 199

14242785918_602b9ba16d

जीवन में, – “नहीं, धन्यवाद” कहना महत्वपूर्ण है ;

_इसके बिना, हम उस चीज़ के लिए हाँ नहीं कह सकते. _जो वास्तव में मायने रखती है.!!

विनम्रतापूर्वक बड़े ही सभ्य तरीके से किसी भी काम के लिये या बात के लिये कहा गया “ना” आपका बहुत समय बचा सकता है..!!
खुद से वादा करो कि आप हर उस चीज़ के लिए “नहीं” कहेंगे.. जिससे आप सहमत नहीं हैं.

_ वादा करो कि कोई भी आपको वो काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता.. जो आपको पसंद नहीं है.
_ किसी के पास यह तय करने का अधिकार नहीं होगा कि आप अच्छे हैं या बुरे.
_ आप जैसे हैं, वैसे ही परिपूर्ण हैं, अपनी खामियों के साथ भी..
_ अपनी तुलना किसी से मत करो, बल्कि सीखो खिलने का अपना समय खुद तय करो, और अगर आप जाना चाहते हो, तो यह भी आपकी पसंद होगी..
_ वादा करो कि आप हर उस बात के लिए “ना” कहोगे जिससे आप सहमत नहीं हो.
_ इस वादे को साल भर निभाओ, और आप देखोगे कि वे अब आपको हलके में नहीं लेंगे.
_ वे आपको कुछ भी करने के लिए मजबूर करना बंद कर देंगे.
_ हर चीज़ को अपनी पसंद बनाओ.. ‘अगर “ना” है, तो “ना” है’
error: Content is protected