सुविचार – “नहीं, धन्यवाद” कहना महत्वपूर्ण है – 199

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जीवन में, – “नहीं, धन्यवाद” कहना महत्वपूर्ण है ;

_इसके बिना, हम उस चीज़ के लिए हाँ नहीं कह सकते. _जो वास्तव में मायने रखती है.!!

विनम्रतापूर्वक बड़े ही सभ्य तरीके से किसी भी काम के लिये या बात के लिये कहा गया “ना” आपका बहुत समय बचा सकता है..!!
खुद से वादा करो कि आप हर उस चीज़ के लिए “नहीं” कहेंगे.. जिससे आप सहमत नहीं हैं.

_ वादा करो कि कोई भी आपको वो काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता.. जो आपको पसंद नहीं है.
_ किसी के पास यह तय करने का अधिकार नहीं होगा कि आप अच्छे हैं या बुरे.
_ आप जैसे हैं, वैसे ही परिपूर्ण हैं, अपनी खामियों के साथ भी..
_ अपनी तुलना किसी से मत करो, बल्कि सीखो खिलने का अपना समय खुद तय करो, और अगर आप जाना चाहते हो, तो यह भी आपकी पसंद होगी..
_ वादा करो कि आप हर उस बात के लिए “ना” कहोगे जिससे आप सहमत नहीं हो.
_ इस वादे को साल भर निभाओ, और आप देखोगे कि वे अब आपको हलके में नहीं लेंगे.
_ वे आपको कुछ भी करने के लिए मजबूर करना बंद कर देंगे.
_ हर चीज़ को अपनी पसंद बनाओ.. ‘अगर “ना” है, तो “ना” है’

सुविचार 198

जब हमारा समय सही चलता है तब हमारी ग़लतियों को भी मजाक समझा जाता है, लेकिन जब हमारा समय खराब चलता है तब हमारे मजाक को भी गलती माना जाता है. इसलिए कोशिश करें कि खराब समय आने ही ना पाए और हम अपनी ग़लतियों का भी मजा ले पाएँ.

 

 

सुविचार 197

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बदकिस्मती में खुशनुमा बदलाव के अवसर छिपे होते हैं. अगर आपके हिस्से में अत्यधिक परेशानियाँ आयी हैं, तो शायद यह इस का घोतक है कि आपको किसी महान कार्य के लिए तैयार किया जा रहा है.

सुविचार “ज़िंदगी के 4 कड़वे सच” -196

“ज़िंदगी के 4 कड़वे सच”

(1). आप कभी किसी को, संतुष्ट नहीं कर पाओगे.
(2). आपकी जिम्मेदारी, कभी खत्म नहीं होगी.
(3). दूसरों के लिए कितना भी जी लो, कोई आपकी कद्र नहीं करेगा.
(4). आप चाह के भी किसी की ज़िंदगी नहीं बदल सकते.. क्योंकि उसे उसके कर्मों का फल मिल रहा है.
_ इसलिए चिंता छोड़ो ..अपने लिए थोड़ा जी लो.!!

सुविचार – इन प्रश्नों पर बराबर विचार करते रहना चाहिए – 195

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इन प्रश्नों पर बराबर विचार करते रहना चाहिए ——- >

*  समय कैसा चल रह है ?

*  कौन मेरा हितैषी है ?

*  मेरी आमदनी क्या है और खर्च क्या है ?

* ऋतु कौन- सी है और इसमें कैसा आहार- विहार होना चाहिए ?

* मेरा सामर्थ्य क्या है और मैं कर क्या रहा हूँ, मेरे कार्यों का परिणाम क्या होगा ?

* आज मैंने कितना समय नष्ट किया और कितने समय का सही उपयोग किया ?

* आज मैंने कितनी गलतियाँ की ?

* कितने काम बुरे व अच्छे किए ?

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