सुविचार – सावधान, सावधानी, सतर्कता, चौकसी, एहतियात, सचेतता, होशियार, होशियारी – 166

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“सावधानी इसलिए आदत नहीं बनती, क्योंकि उसका लाभ तुरंत दिखाई नहीं देता,

_ जबकि लापरवाही का नुकसान अक्सर बहुत देर से दिखाई देता है.”

सुविचार 165

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संसार में प्रसिद्धि हवा के जैसी है, जो कभी इधर बहती है तो कभी उधर,

और दिशा बदलने के साथ ही नाम भी बदल देती है.

 

 

 

सुविचार – गैर – अजनबी – अंजान – अनजान – 164

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अच्छी ज़िन्दगी जीने के दो तरीके हैं. पहला, जो पसन्द है उसे हासिल कर लो और दूसरा, जो हासिल है उसे पसन्द करना सीख लो.
हम कभी-कभी ऐसे लोगों से मिलते हैं, यहां तक ​​कि पूर्ण अजनबी भी, जो हमें पहली नजर में, किसी तरह अचानक, एक बार में, एक शब्द बोले जाने से पहले ही दिलचस्पी लेने लगते हैं.
कई बार ये अनजान लोग अपने लोगों से भी ज़्यादा अपने लगने लगते हैं और हमको पता भी नहीं चलता है.!!
मिला करो अनजानों से भी, कभी-कभी अंजान अपनो से बेहतर मिल जाते है..!!
अपनों में अपने नहीं मिलते.. गैरों में अपने मिल जाते हैं.!!
कुछ अजनबी, अपनो से बेहतर मिल जाते हैं.!!
कई बार ऐसा होता है हम किसी को जानते नहीं, पर हम उनको जानने लगते हैं,

_ न जाने कैसे हम ऐसे कितने ही अनजान लोगों को अपने भीतर रखे हुए होते हैं…!

अजनबी सब अपने हुए, अपनों से ही तो बगावत है,

_अपने तो अपने होते हैं, ये तो सिर्फ कहावत है.

“अब मैं इतना बदल गया हूं कि.. जो लोग मुझे अच्छे से जानते हैं,

_ उन्हें भी मैं अजनबी लगने लगता हूँ.!!”
– कभी-कभी हमारी आंतरिक यात्रा हमें इतना बदल देती है कि पुराने रिश्ते, परिचय और पहचान भी हमें पहचान नहीं पाते..
_ यह अजनबीपन दरअसल नए स्वरूप की गवाही है.
_ जो लोग आपको सच में समझना चाहते हैं, वे आपके इस बदलाव को पहचानेंगे..
_ बाकी लोग वहीं ठहर जाएंगे, जहाँ वे पहले आपको देखते थे.
_ यह “अजनबी लगना” वास्तव में अपने नए सच में प्रवेश करना है.!!
अगर तुम सोशल मीडिया की दुनिया में कुछ करना चाहते हो तो..

_ सबसे पहले खुद को आजाद करना सीखो.
_ अपने दोस्तों से, अपने रिश्तेदारों से..- अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को ब्लॉक करो
अपनी पहचान से.
_ क्योंकि सोशल मीडिया की दुनिया में, सपोर्ट सबसे पहले अजनबी देते हैं
अपने लोग नहीं..
_ अपने लोग तुम्हें जानते हैं और यही जानना सबसे बड़ी रुकावट बन जाता है.
_ वे तुम्हें उसी नजर से देखते हैं, जैसे तुम कभी थे.
_ वे तुम्हारे बदलने को स्वीकार नहीं कर पाते, वे तुम्हारे आगे बढ़ने से डरते हैं.
_ अजनबी तुम्हें नहीं जानते, इसलिए वे तुम्हें तुम्हारे काम से पहचानते हैं.
_ वहाँ तुम्हारा अतीत नहीं चलता, वहाँ सिर्फ तुम्हारा हुनर बोलता है.
_ इसलिए अजनबियों से दोस्ती करो.. दिल लगाकर..
_ लेकिन भरोसा अपने हुनर पर रखो.. लोगों पर नहीं..
_ अपने शब्दों से, अपनी सोच से, अपने सच से, उनका दिल जीतो..
_ क्योंकि इस दुनिया में सिर्फ वही टिकता है, जो ईमानदारी से लिखता है.
_ अच्छे लोग हमेशा अच्छे रहते हैं, हालात जैसे भी हों.
_ इसलिए भीड़ से मत डरो, अकेलेपन से मत भागो.
_ अजनबी तुम्हें रास्ता देंगे और तुम्हारा हुनर तुम्हें मंजिल तक ले जाएगा.!!
– लेखक की दुनिया

सुविचार 163

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अविश्वास नकारात्मक शक्ति है, जब मस्तिष्क किसी बात पर सन्देह करता है तो वह ऎसे कारणों को खोज लेता है, जिनसे उस विश्वास को बल मिले.

 

सुविचार – एडजस्ट – Adjust – समायोजित करना – 162

एडजस्ट [Adjust] करना सीखिए..

_ सबकुछ हमारी इच्छा के अनुसार हो, ये जरुरी थोड़े है..
_ ये दुनिया केवल हमारे अकेले के लिए थोड़े बनी है, जो हम चाहेंगे वैसा ही होगा,
_ एडजस्ट [Adjust] करना सीखिए..
_ परिस्थिति के अनुसार ख़ुद को ढालना सीखिए,
_ अगर बात-बात पर खिन्नता अनुभव करोगे तो लोग हमें अपनी दुनिया से बाहर निकाल फेकेंगे ;
_ ये ज़िंदगी है, यहाँ ख़ुद को परिस्थिति अनुसार बदलना पड़ता है, एडजस्ट करना पड़ता है ;
_ इसलिए एडजस्ट [Adjust] करना सीखिए.!!

सुविचार – शब्द – शब्दों -161

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शब्दों को कोई भी स्पर्श नहीं कर सकता, पर शब्द सभी को स्पर्श कर जाते हैं.!!
“कुछ रास्ते शब्दों से शुरू होते हैं, और ख़ामोशी में चलकर रोशनी तक पहुँचते हैं”
“शब्द स्पष्ट हो जाएँ, तो कई विवाद अपने आप छोटे हो जाते हैं”
शब्दों की अपनी तपन है, ये सुकून भी देते हैं और जला भी देते हैं.!!
शब्दों की आयु भले कम हो गई हो, लेकिन यदि उन्हें सही जगह बोया जाए तो वे एक दिन अवश्य फल देंगे.!!
जब इंसान के पास तर्क और संवेदना ख़त्म हो जाती है तब वह अपशब्दों का सहारा लेता है.!!
आपके शब्दों से पता चल जाता है कि आप भटके हुए हैं या संभले हुए.!!
शब्दों के शोर से बड़ा अपनी खामोशी का कद रखें ;

_ सादगी ही आपकी शख्सियत का असली वज़न है.!!

अपने शब्दों में ताकत डालें आवाज में नहीं,

_ क्यूंकि बारिश से फूल उगते हैं, बाढ़ से नहीं….

जो समझना चाहता है, कम शब्दों में भी समझ जाता है.
_ जो नहीं चाहता, उसे पूरी कहानी भी काफी नहीं होती.!!
जब कोई कहता है ‘आप कर लोगे’, ‘आप अच्छा करोगे’

_ इन छः शब्दों में छिपा होता होता है एक भरोसा..!!

“जो महसूस कर ले, उसे शब्दों की ज़रूरत नहीं,

_ और जो न समझे, उसे हज़ार तर्क भी कम पड़ जाते हैं.”

लोगों को उनकी हरकतों से समझना सीखो,

_ आप उनके शब्दों से बेवकूफ़ बनना छोड़ दोगे !!

आपके शब्द कितने भी महत्वपूर्ण क्यों ना हों,

_ सुनने वाला अपनी क्षमता के अनुसार ही समझेगा..!!

सोच-समझकर बोलिए.. क्योंकि शब्दों के ज़ख्म चाहे नज़र नहीं आते,

पर उनका असर उम्र भर रहता है.!!

शब्दों में इतनी आग होती है कि कभी-कभी खुद को भी आहत कर देते हैं.

_शब्दों में सिर्फ आग ही नहीं ठंडक और महक भी होती है, जो राहत पहुंचाते हैं..!!

शब्दो की परख नही होती है हमे, पर कई बार किसी न किसी वजह से वे अपनी तरफ खिंच लेते हैं

_ हमें पल्ले कुछ नहीं पड़ता पर फिर भी उन गहरे शब्दों को पढ़कर सुकून पा लेते हैं …!

शब्दों का भारीपन हर कोई झेल नहीं सकता,

_ इसीलिये वो ही शब्द मुँह से निकालें, जो आपको खुद के लिए अच्छे लगते हों.!!

शब्दों के प्रयोग में लहजे का भी ओहदा रखिए…

_ क्योंकि… शब्द आपके व्यक्तित्व को उजागर करते हैं !

_ और जहां आप मौजूद नहीं हैं …..वहां भी ये पूरी निष्ठा से आपका प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं..!!

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