सुविचार – अतीत, विगत, भूत, गत, बीता हुआ समय, गुज़रा हुआ कल, बीता हुआ कल, पहले का, Past – 110

13352362203_762a5854ff

भविष्य के प्रति चिंता न केवल हमें वर्तमान को वैसा देखने से रोकती है जैसा वह है, बल्कि अक्सर हमें अतीत को पुनर्व्यवस्थित करने के लिए प्रेरित करती है.

A preoccupation with the future not only prevents us from seeing the present as it is but often prompts us to rearrange the past. – Eric Hoffer

सबसे बड़ा साहसी कार्य जो हम सभी को करना चाहिए, वह है अपने इतिहास और अतीत से बाहर निकलने का साहस रखना ताकि हम अपने सपनों को जी सकें.

The great courageous act that we must all do, is to have the courage to step out of our history and past so that we can live our dreams. – Oprah Winfrey

ये जानते हुए भी के अतीत में दुःख के कुछ गहरे धब्बे भी हैं,

_ हमारे भीतर अतीत के थोड़े से निर्मल सुख को वापस जी लेने की चाहना कभी ख़त्म नहीं होती.!!  – हेमन्त

जिसके वर्तमान जीवन के खेत में अतीत की फसल लहलहा रही है ;

_ उसमें सत्य का अज्ञात पौधा उगने से रहा..!!

“कभी उस जगह वापस मत जाना,

_ जिसे छोड़ना बहुत मुश्किल था.”

जब तक हम स्वयं को वर्तमान में रहने के लिए शिक्षित नहीं करते,

_ अतीत की छवियां वर्तमान में हस्तक्षेप करेंगी, जिससे भ्रम पैदा होगा.!!

“अतीत इसलिए नहीं थकाता कि वह बीत गया है,
_अतीत इसलिए थकाता है.. क्योंकि हम उसे बार-बार वर्तमान में बुला लेते हैं”
**“हम अक्सर खोई हुई चीज़ों को इसलिए ढोते रहते हैं..

_ क्योंकि उन्हें छोड़ने का दर्द ज़्यादा होता है.
_ पर जैसे ही छोड़ना सीखते हैं, बोझ गायब हो जाता है और भीतर नई जगह बनती है – कुछ नया उगने की.!!”
हम अपने अतीत को बार-बार जीते हैं, शायद थोड़ा-बहुत बदलकर, अपनी सुविधा और आराम के अनुसार.. ;

_ और फिर कहते हैं : मेरे साथ बार-बार वही चीजें क्यों हो रही हैं ?
जीवन को एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसे मनुष्य अपनी स्मृति और रूढ़ियों के कारण अपनाने से इनकार कर देता है.
_ इसके परिणामस्वरूप उसका पूरा जीवन सड़ने लगता है, जो अतीत के मवाद से भरा होता है.
हमें वही बातें,वही चीज़ें, वही वक़्त, वही जगहें ज़्यादा अच्छी लगती हैं जो कभी अतीत में थीं..

_ अतीत हमें सुविधा देता है कि हम उसे चाहे जैसे प्रस्तुत कर सकते हैं, वर्तमान से बहुत कम लोग संतुष्ट होते हैं, बहुत कम लोगों का वर्तमान उनके मुताबिक़ होता है और भविष्य वह तो सदा अनिश्चित ही रहा है सो अपने दुख, अपने सुख को खोजने के लिए हमें अतीत की शरण में जाना ही पड़ता है..
_ जवानों को अपना बचपन ज़्यादा-ज़्यादा याद आता है तो बूढ़ों को जवानी..हालाँकि जब वह अपने उस दौर में थे तो अक्सर उससे पीछा छुड़ाने की सोचते..ऐसे ही दूर परदेस बसे लोगों को अपनी माटी की याद सताती है तो देश में रह रहे लोगों को पिछले गुज़रे बरस..
_ हमें अतीत हो चुके या होने की कगार पर पहुँचे रीति रिवाज, भोज्यपदार्थ, परम्पराएं अधिक लुभाती हैं हालांकि जब वह लोगों की सामान्य दिनचर्या में शामिल थीं तो लोगों ने प्रयास करके उन्हें बदल दिया..
बड़े शहरों में ग्रामीण थीम पर बड़े बड़े रेस्त्रां खुल रहे जहां लालटेनें होंगी, सूप होगा, चक्की होगी, कुंए होंगे, होंगी माटी की दीवारें..जब यह सहज,सुलभ थीं, आम जनजीवन का हिस्सा थीं हम इनसे उकताकर शहर भागे..शहर में अतीत की याद भुनाने के लिए ऐसे रेस्त्रां खोले..
_हम जिस शहर में रहते हैं, जिस जगह जीते हैं उस वक़्त उससे रूठे रूठे रहते हैं..बाद के बरसों में जब वह जगह छूट जाती है तब वह हमारे सपनों पर कब्ज़ा जमा लेती है..
_हम अपने उन क़रीबी रिश्तों को अधिक याद करते हैं, उनके लिए अधिक रोते हैं, उनकी अधिक बातें करते हैं जो अब नहीं हैं..और इस तरह हम बड़ी चालाकी से उनके साथ होने का लाभ उठाते हैं हालांकि जब हम उनके साथ थे उकताए से रहे..
_हमारा वर्तमान क्या इतना विपन्न होता है कि उसपर हम दस मिनट भी बात नहीं कर सकते और अतीत इतना सम्पन्न कि हमारी बातें ख़त्म ही न हों..
_जाने क्यों सारी वीरतायें, सारी सम्पन्नताएँ, सारी सुंदर सुधियां, सारी निर्मल छवियां हमने जादूगर रूपी अतीत के थैले से ही निकलते देखा, वर्तमान तो सबका रूखा-फ़ीका और उदास मजदूर सा ही दीखता है..
उम्र दराज़ लोग तो पुराने दिनों को सुनहरे दिन मानते ही हैं, पचास साठ वाले भी अक्सर एक लम्बी आह भरकर कहते मिलेंगे-“क्या ही अच्छा ज़माना था”

_ मतलब यह कि हर पीढ़ी के लोग यही मानते हैं कि ‘पुराना ज़माना अच्छा था.’
_ इन लोगों की बात यदि हम सच मान लें तो गिरते गिरते दुनिया अब तक रसातल में पहुँच गई होती.
_ पर आँख घुमा कर देखो, आपको ऐसा नहीं लगता कि हम अपने पूर्वजों से बेहतर जीवन जी रहे हैं ?
समय के साथ हमारा नज़रिया और जीवन मूल्य बदल जाते हैं.
_ अतीत कितना भी खूबसूरत रहा हो, हमने जिन भी लोगों के साथ जिया हो, वह सारा संयोजन हमें फिर से मिल जाए..
_ तो भी हम उसे उसी पुराने रूप में एन्जॉय नहीं कर सकते..
_ क्योंकि हम एक अलग तरह ग्रो कर चुके होते हैं.
_ हम भले ही अतीत की पुरानी यादों में खो जाएं..
_ पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अतीत कि यादों के गलियारों में घूमना तो अच्छा लग सकता है..
_ पर यदि कोई हमें जादू से सचमुच वहां पहुंचा ही दे.. तो हमारा उस काल में जीना सरल नहीं होगा..
— क्योंकि लोगों की फितरत ही होती है कि पुरानी चीजों को पकड़े रहते हैं.
_ सामने जो होता है, उनसे संतुष्टि ही नहीं हो पाते हैं.
_ अपने जमाने में हम ये करते थे, हम वो करते थे..
_ ऐसा कह कह कर वर्तमान से शिकायत करना ही..
_ उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है.
_ ये सबसे बड़ी सच्चाई है कि अतीत और वर्तमान की कोई तुलना ही नहीं हो सकती है.
_ जो 10साल पहले हम जीते थे, वो चीज़ हमें आज नहीं मिल सकती.
_ लेकिन कहते हैं ना कि वक़्त कभी एक सा नहीं रहता !!
सबसे बेहतरीन और सुकून से भरे उन लोगो की ज़िंदगी होती है.. जो अतीत को याद नही रखते और न ही भविष्य के प्रति इतने ज्यादा संवेदनशील होते हैं..

_ वे लोग जो जीते हैं सिर्फ वर्तमान में.!!
यदि आप अतीत में जीते हैं और अतीत को यह परिभाषित करने देते हैं कि आप कौन हैं, तो आप कभी विकसित नहीं होंगे.
वर्तमान चाहे कितना सुखदायक हो, भविष्य चाहे कितना संभावनाशील हो, फिर भी कष्टपूर्ण अतीत हमारा पीछा नहीं छोड़ता.

_ हम न तो ‘आज’ में जीते हैं, न आने वाले कल के सपनों में, हम ज़्यादातर अतीत की वेदनाओं में जीते हैं.

अतीत में हमारे साथ बहुत सी अच्छी और बुरी चीजें गुजरी होती हैँ, और हम उन खट्टे मीठे अनुभवों से सीखते भी हैँ,

_ अगर हम उन गलतियों को न दुहराते हुए आगे बढ़ रहे हैँ तो सही रास्ते पर हैँ !!

अतीत की कुछ घटना भविष्य का भी सब कुछ बर्बाद कर देती है,

_ मन अतीत की स्मृतियों में ही कहीं उलझा रह जाता है,
_ रात होते ही एक गहरी उदासी छाने लगती है और फिर विचारों की रेखा पर मिटते कल्पना के चित्र मडराते हैँ,
_ और मैं एक कोना पकड़कर इन विचारों को शब्द देने लग जाता हूँ…!
गुज़रा हुआ कल अब जीवन में कोई मायने नहीं रखता,

_ क्योंकि ज़िंदगी ने सिखा दिया है कि जो बीत गया, उसे थामे रखने से वर्तमान नहीं सँवरता.!
अतीत में की गई किसी की एक ज़िद, आज हमारे वर्तमान को हिला सकती है.

_ वो ज़िद, जो कभी एक पल का आग्रह थी, वक़्त के साथ सवाल बनकर लौट आती है.
_ कभी-कभी वही एक फैसला आज की शांति छीन लेता है, और समझ आता है कुछ ज़िदें सिर्फ उस समय की नहीं होतीं, वे हमारे आज का सुकून भी छीन सकती है.!!
आज को आज और कल को कल ही रहने दीजिए;
_ कल को खींच कर अपने दिमाग में लाना भी सब ख़राब कर देता है.!!
किसी के जाने से जीवन नहीं रुकता.. बस इतना आगे बढ़ो कि आपको पीछे देखने की ज़रूरत ही ना पड़े.!!
अपने अतीत से आप कुछ सीखते हैं.. जिसका इस्तेमाल अपने भविष्य में करते हैं.

_ इन दोनों के बीच वाले वक्त यानि वर्तमान में हौसला न छोड़ें.!!
आपने काफ़ी समय बर्बाद किया, कोई बात नहीं..

_ आपने ग़लत लोगों की परवाह की, कोई बात नहीं..
_ आपने खुद को नज़रअंदाज़ किया, कोई बात नहीं..
_ आपने अपनी क़ाबिलियत पर शक किया, कोई बात नहीं..
_ अतीत आपके जीवन की परिभाषा नहीं है, लेकिन अब आप क्या करेंगे, यही मायने रखेगा..!
_ ख़ुद को और सबको माफ़ करें और ज़िंदगी को हमेशा सकारात्मकता के साथ जीने की कोशिश करें..!!
सबसे अच्छी और सुकून भरी जिंदगी उन लोगो की होती है,

_ जो अतीत को याद नही रखते और न ही भविष्य के प्रति इतने ज्यादा संवेदनशील होते है,
_वो जो जीते हैं सिर्फ वर्तमान को, वो लोग ही दुनिया के सबसे धनी इंसान है…!
अतीत खंडहर है, कूड़ा करकट है, वहां से केवल बू आ सकती है, सुगंध नहीं,
_ वर्तमान को अतीत से भी खूबसूरत बनाइए..
हमारे लगभग हर काम में निरंतर अतीत या भविष्य मौजूद रहता है.

_ और समय के इस निरंतर प्रवाह में, वर्तमान धीरे-धीरे हमसे दूर होता चला जाता है.
कुछ अतीत की बातों के वास्तविक अर्थ हमें भविष्य में पता चलते हैं..

_ इसलिए अपने जीवन के हर पल को खूबसूरत बनाएं..
_ क्योंकि यही आने वाले कल में अतीत का रूप लेंगे.!!
छोड़ जाने का निर्णय संपूर्ण और अंतिम होना चाहिए..

_ पीछे छोड़े हुए सब स्मृति-चिह्नों को मिटा देना चाहिए..
_ और उन औपचारिक रिश्तों के पुलों को नष्ट कर देना चाहिए,
_ किसी भी तरह की वापसी को असंभव बनाने के लिए.!!
जीवनपथ पर आगे बढ़ते जब कभी पलटता हूँ तो दिखते हैं सुदूर पीछे छूटे अनगिनत दृश्य..
_ जीवन कितनी दूर ले आया ! कितना कुछ रह गया, कितना कुछ फिसल गया !
_ क्या-क्या भूलूँ और क्या-क्या याद करूँ !
_ तथापि कुछ घटनाऐं ऐसी होतीं हैं ..जो हम आजीवन नहीं भूल पाते.
_ जब-जब दृष्टि डालिये, हृदय के कोमल कोनों में गरिमा के साथ मुस्कुराती हुई पाते हैं..!!
— अतीत की स्मृतियां बड़ी ही मधुर होती हैं, चाहे वह सुख में बीती हुई स्मृति हो या दुःख में, वे अपनी मिठास बनाए रखती हैं..
_ फिर जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है व्यक्ति उतना ही अतीत के दायरे में चक्कर लगाना शुरू कर देता है..
_ और याद करता कि कैसे औरों के फेर में उसकी खुद की इच्छाएं अधूरी रह गई थी…!
कभी कभी अतीत के पुराने फैसले, घटनाएं, दुखो को सोचकर मन विचलित तो होता है,

_ पर उसे ये कहकर टाल देता हूं कि जो होता है अच्छे के लिए होता है..
_ आशावादी बने रहने में कोई परेशानी नहीं है..
_ बशर्ते रब एक सीमित दायरे तक ही चीजों को अनुभव करने की शक्ति दे ‘चाहे वो बुरी हो या अच्छी’..!
दुनिया में बेहतर लोग मिल जाते हैं, बेहतर विकल्प भी टकरा ही जाते हैं..

_ बस दिल मानता नहीं.. क्योंकि हम किसी शख्स को नहीं, उस गुज़रे हुए वक़्त को मिस करते हैं..
_ वो मासूम भरोसा, वो सहज हँसी, वो बेफ़िक्र के दिन.. जो अब लौटते नहीं.
_ रिश्ते बदले हों या लोग, असल में हम अपने ही खोए हुए एहसास की तलाश में भटकते रहते है.!!
सबसे बेहतरीन और सुकून से भरी उन लोगो की ज़िंदगी होती है, जो अतीत को याद नही रखते और न ही भविष्य के प्रति इतने ज्यादा संवेदनशील होते हैं..

_ वे लोग जो जीते है सिर्फ वर्तमान को.!
“यदि हर पिछला अतीत सच में स्मरण में रखकर काम आता जीवन के पथ पर, तो कम से कम एक आँख तो गर्दन के पीछे होती ही होती.”
जो लोग आपके अतीत से जुड़े हैं और जो जाने नहीं देते, उनके साथ निपटने का सबसे शक्तिशाली तरीका यह है कि आप वह व्यक्ति बनें, जिसे वे कभी फॉलो करने की हिम्मत न करें.

_ अपनी ज़िन्दगी को इतना ऊंचा उठा लें—आर्थिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से—कि जब भी वे आपको देखेंगे, उनका दिल पछतावे से डूब जाए.
_ वे यह उम्मीद करेंगे कि आप उसी बुरे हालात में होंगे, जैसे वे आपको छोड़कर गए थे,
_ ताकि वे अपनी विदाई को सही साबित कर सकें..
_ उन्हें वह संतोष मत दीजिए.. उनकी उम्मीदों से कहीं ऊंचे उठिए,
_ ऐसे तरीके से जो उन्होंने कभी कल्पना भी न की हो.
_ कभी-कभी, सबसे गहरी विद्रोह की क्रिया यह होती है कि आप बस इतना उत्कृष्ट बन जाएं, ताकि जो लोग यह सोचते थे कि वे आपके जीवन पर नियंत्रण रखते हैं, उन्हें यह साबित हो जाए कि वे गलत थे.
_ जब बात आपके मूल्य, गरिमा और भविष्य की रक्षा की हो—तो संकोच मत करें.
_ बेजोड़ आत्मविश्वास के साथ खड़े होइए..
_ न तो आप समझौता करें और न ही किसी ऐसे जीवन को स्वीकार करें, जिसे दूसरों ने आपके लिए तय किया हो.
_ कभी भी किसी को यह मत मानने दें कि उन्होंने आपकी कहानी लिखी है.
_ जो भी कीमत चुकानी पड़े, उस पृष्ठ को पलटें और ऐसा मोड़ लाएं, जो उन्हें चुप कर दे.
_ अपनी ज़िन्दगी को ऐसी जगहों तक ले जाइए, जो आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.
_ ऐसा अद्वितीय व्यक्ति बनिए, जिसे वे पहचान भी न सकें.
_ आखिरकार, आपको जो असाधारण जीवन आपने बनाया है, उसके लिए एकमात्र व्यक्ति जिसे श्रेय मिलना चाहिए, वह व्यक्ति आप ही हैं.
_ कभी भी किसी और को वह सम्मान न लेने दें.!!
— उन्हें पछताना होगा – शायद आज नहीं, शायद कल नहीं, लेकिन एक दिन वे पीछे मुड़कर देखेंगे और समझेंगे कि उन्होंने एक सच्चे व्यक्ति को एक अस्थायी खुशी के लिए खो दिया.!!
शायद अब मुझे अतीत के दरवाजों पे सर पटकना छोड़ देना चाहिए है.. और ताले लगा देने चाहिए अतीत के किवाड़ों पे..!

_ क्योंकि कई लोग जो बहुत दुआ मांगा करते थे मेरे लौटने की..
_ पर अब उन्हें लगता है कि एक वक़्त के बाद मुझे नहीं लौटना चाहिए…!!
‘जिंदगी में दर्द है, दर्द में जिदंगी है’

_ कौन किसको पूछ रहा है यहां, हर इंसान खुद में मगन है.
_ दिखावे में जिंदगी जीना सबसे व्यर्थ रास्ता होता है.
_ मैं कई दिनों से खुद को बदलने की कोशिश कर रहा हूं,
_ परंतु ‘अतीत’ है कि मुझसे अलग होने का नाम ही नहीं लेता है.
_ अब आंखों के आंसू सूख चुके हैं, ख़ैर… बची हुई जिदंगी जी लूंगा अब..!!!
अतीत की स्मृतियां बड़ी ही मधुर होती है चाहे वह सुख में बीती हुई स्मृति हो या दुःख में, वे अपनी मिठास बनाए रखती है..

_ फिर जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है व्यक्ति उतना ही अतीत के दायरे में चक्कर लगाना शुरू कर देता है..
_ और याद करता कि कैसे औरों के फेर में उसकी खुद की इच्छाएं अधूरी रह गई थी…!
दुःखद स्मृतियाँ भुलाए नहीं भूलतीं, और सुखद स्मृतियों को याद करना पड़ता है..

_ हम अपने सुख से शायद सुखी न हों, पर दुःख से अवश्य दुःखी हो जाते हैं..
_ सिर्फ मनुष्य को ही कल्पना की शक्ति मिली है.. पर हमने उसका उपयोग नहीं, दुरुपयोग किया है..
_ हम भविष्य नहीं गढ़ते बस बीते हुए कल की स्मृतियों में उलझे रहते हैं.!!
जब आप एक मानसिकता [Mindset] बनाने की कोशिश करते हैं, तो आपको अपनी पिछली सोच को बदलना होगा और नया नज़रिया अपनाने के लिए उसे पीछे छोड़ना होगा.
_ यह खुद को ठीक करने की एक प्रक्रिया [process to heal] है. _ मानसिकता और विचार प्रक्रिया में बदलाव के लिए बहुत ज़्यादा आंतरिक परिश्रम की ज़रूरत होती है, और उससे भी ज़्यादा, कुछ शारीरिक परिश्रम की। चाहे जो भी हो, आपको करना ही होगा.!!
याद रखें, जीवन एक निरंतर प्रवाह है.

_ कुछ भी अंतिम नहीं है, कुछ भी पूरा नहीं है.
_ जिस क्षण आपको लगता है कि आप पहुँच गए हैं, आपने बढ़ना बंद कर दिया है.
_ विकसित होते रहना.. हर पल पुराने के लिए मरना है,
_ जो आप थे उसे छोड़ देना.. ताकि आप वह बन सकें.. ‘जो आप बन रहे हैं.
हमें दुःख तब नहीं होता जब कुछ बुरा होता है,

_ बल्कि तब होता है जब हम उस बुरे को स्वीकार नहीं कर पाते..
_ जब वर्तमान की सच्चाई आँखों के सामने होती है, मगर दिल बार-बार बीते हुए कल में भटकता है
_ हम जानते हैं अतीत को बदला नहीं जा सकता,
_ वो लोग, वो पल, वो फैसले सब गुजर चुके हैं,
_ पर फिर भी भीतर से एक आवाज़ आती है काश मैंने ऐसा न किया होता, काश वो रुक जाता, काश वक़्त थोड़ी मोहलत और दे देता..
_ यही काश हमारे दुःख का असली कारण बन जाता है…!
मुझे अतीत कि यादों से डर लगता है.. क्योंकि वो “वो” यादें ताज़ा कर देती हैं.. जिन्हें मैं भूलने की कोशिश कर रहा हूँ.

_ वो उस इंसान को नहीं, बल्कि साथ बिताए वो पलों को वापस लाती हैं.. जिन्हें हम भूलना चाहते हैं.
_ यादें किसी को भूलने की हमारी सारी कोशिशों को नाकाम कर देती हैं.
_ आइए अतीत के ज़ख्मों से, उन यादों से जो हमारे काम की नहीं हैं, उस व्यक्ति से जिसे हमारे प्यार की परवाह नहीं थी, भर जाएँ और एक बेहतर भविष्य बनाएँ जहाँ हम खुश हों.!!
बीते हुए कल की राख कुरेदने से हाथ काले ही होते हैं..

_ मन की शांति इसी में है कि पुरानी बातों को वहीं छोड़कर, एक नई उम्मीद के साथ धीरे से आगे बढ़ा जाए.!!
कहीं न कहीं लोग अपने अतीत से इतने जकड़े होते हैं..
_ जिसकी वजह से वो अपने भविष्य को खूबसूरत नहीं बना पाते.!!
अतीत बस एक आंखों पर पट्टी है जो वर्तमान में सब कुछ ढक देती है..
_ और उन चीजों के लिए दर्द ढूंढती है जो हमें अभी मिली हैं.!!
मायूसी के साथ अपने अतीत के बारे में सोच कर वक्त बर्बाद मत करो..
_ बल्कि आशा के साथ अपने आज को जियो..!!
आपके गुज़रे कल को आपकी कोई जरूरत नहीं,
_ लेकिन आप के आज को आप की बहुत जरूरत है.!!
बीते लम्हों को पकड़ कर रोना बंद करो,
_शायद आज की सुबह आपको वो सब देने आई है जो कल आपसे छिन गया था.!!
अतीत यात्रा करने के लिए एक अच्छी जगह है लेकिन निश्चित रूप से रहने के लिए एक अच्छी जगह नहीं है.
यदि आप हर समय अतीत के बारे में सोचते हैं तो आपका कल बेहतर नहीं हो सकता.
वर्तमान को तभी समझा जा सकता है, जब हमने अतीत की गलतियों से कुछ सीखा हो.!!
जब रब आपको एक नई शुरुआत देता है तो अतीत की पुरानी गलतियों को मत दोहराओ..!!
अतीत की स्मृतियों से वर्तमान के चित्र उकेरेंगे तो भविष्य का रंग खराब ही होगा..!!
जो बीत गया सो बीत गया यार, अब कोई नई बात कर.!!
हर “पत्थर दिल” “इंसान” के पीछे उसका “बेरहम अतीत” होता है.!!
हमें अतीत की बातें याद रह जाती हैं, वही पल-पल चुभाती हैं.!!
किसी को उसके बीते कल से मत आंकिए..
_ इंसान सीखता है, बदलता है और धीरे-धीरे आगे बढ़ जाता है.!!
काश…हम अतीत में पीछे जा सकते.. कुछ बदलने नहीं…

_ कुछ चीज़ों को दोबारा महसूस करने..!!

उस अतीत से बाहर निकलें जो आपको रोक रहा है.

_ उस नई कहानी में कदम रखें ..जिसे आप बनाना चाहते हैं.

यदि अतीत अतीत बन गया है, तो इसके पीछे कोई कारण अवश्य है.

_ यदि अतीत वर्तमान में आ रहा है, तो उसका विनाश निश्चित है, क्योंकि यह प्रकृति के नियम के विरुद्ध है.

कई साल एक ही जगह, एक ही बात को सोचते हुए गुज़ार दिए..

_बहुत समय लग जाता है यह एहसास होने में कि चीज़ें अब वैसी नहीं हो सकतीं, जैसी कभी होनी चाहिए थीं.
_ सोचते-सोचते हम एक ऐसे मुकाम पर पहुँच जाते हैं, घिन्न होने लगती है.!!
_ “सबसे कठिन बात किसी चीज़ को खोना नहीं है,
_ सबसे कठिन बात यह स्वीकार करना है कि वह अब कभी वैसी नहीं होगी जैसी कभी हो सकती थी”
“”समय घाव नहीं भरता, समय बस इतना दिखा देता है कि कुछ दरवाज़े अब खुलने वाले नहीं हैं. _ उसके बाद जो शांति आती है, वह खुशी नहीं होती, एक तरह की स्वीकृति होती है.”
“एक ही दरवाज़े पर बार-बार दस्तक देते हुए एक दिन दरवाज़े से नहीं, अपनी प्रतीक्षा से घिन्न होने लगती है.”
पीड़ादायी अतीत की स्मृतियों के साथ चिपके रहने से हमारे आत्मविश्वास,आत्मसम्मान और मानसिक लचीलेपन पर काफी दबाव पड़ता है.

_ यह धीरे-धीरे हमें थका देता है और अवसाद की स्थिति भी तैयार कर सकता है.
_ जब हम उन्हें जाने देते हैं तो हम इस मानसिक दबाव को दूर कर सकते हैं.
_ परिणामस्वरूप, हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है, आत्मसम्मान मजबूत होता है और हम जीवन के तनावों के विरुद्ध अपने लचीलेपन का पुनर्निर्माण करना शुरु कर देते हैं.!!
किसी के आने या चले जाने से जिंदगी नही रुकती.

_ स्कूल मे जब पढ़ते थे तब कोई दोस्त टीसी लेकर दूसरी स्कूल मे चला जाता था..
_ तब ऐसे लगता था जैसे दुनिया ही खत्म हो गई हो, मगर धीरे धीरे उसके बिना रहना आ जाता था.
_ फिर कॉलेज के दोस्त छूटे तब भी ऐसा ही लगता था.
_ उसके बाद भी अजीज लोगों के छुट्ने का सिलसिला खत्म नही होता.
_ कमाने जाओ तो मोहल्ले के दोस्त छूटते है.
_ सबसे ज्यादा प्यार करने वाले दादा दादी भगवान को प्यारे हो जाते है फिर माता पिता भी साथ छोड़ जाते हैं.
_ मगर हम जीना थोड़े छोड़ देते है.
_ ये जिंदगी है जनाब इसमें अपनो का आना और जाना लगा रहता है.
_ अंत तक साथ कोई नही निभाता..
_ इसलिए जो चला गया उसे भूलना सीखो.!!
जूलिया रॉबर्ट्स ने एक बार कहा था, “जब लोग आपको छोड़कर चले जाएं, तो उन्हें जाने दीजिए.

आपकी तक़दीर कभी भी उन लोगों से जुड़ी नहीं होती जो आपको छोड़ते हैं, और इसका मतलब यह नहीं है कि वे बुरे लोग हैं.
इसका मतलब है कि उनका आपके जीवन में एक भूमिका थी जो अब समाप्त हो गई है.”
_ ये शब्द हमें एक सच्चाई याद दिलाते हैं, जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं – कि हर व्यक्ति जो हमारे जीवन में आता है, वह हमेशा के लिए नहीं रहता.
_ लोग हमारे जीवन में विभिन्न कारणों से आते हैं, हमें कुछ सिखाने, अनुभव साझा करने या किसी खास दौर में हमारा साथ देने के लिए..
_ लेकिन जब वे जाते हैं, तो यह समझना महत्वपूर्ण है कि उनकी भूमिका हमारे सफर में पूरी हो गई है, और अब हमारे रास्ते अलग हो गए हैं.
_ जिन लोगों को हमें जाने देना होता है, उनके साथ जुड़ा रहना हमारी वृद्धि में रुकावट डालता है और हमें अपनी पूरी तक़दीर में आगे बढ़ने से रोकता है.
_ यह किसी को नकारने या दोष देने का सवाल नहीं है, बल्कि यह समझने का है कि हमारी कहानी उनके बिना भी आगे बढ़ सकती है.
_ कभी-कभी उनका जाना नए अवसरों, गहरे रिश्तों और खुद के नए पहलुओं की खोज का रास्ता खोलता है.
_ छोड़ना हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन यह आपके जीवन के अगले चरण में जाने के लिए जरूरी है.
_ यह उस रिश्ते के महत्व को कम नहीं करता जो आपने कभी साझा किया, क्योंकि हर मुठभेड़ का मूल्य है, जो आपको आकार देती है और आपकी वृद्धि में मदद करती है.
_ लेकिन जब कोई चला जाता है, तो इसका मतलब है कि अब उनका और आपका रास्ता एक साथ नहीं मिल रहा.
_ उनका जाना आपको आपके जीवन की कहानी में एक खलनायक नहीं बनाता, बल्कि यह सिर्फ यह दर्शाता है कि उनकी भूमिका अब स्वाभाविक रूप से समाप्त हो गई है.
_ जब आप छोड़ने का बोझ हटाते हैं, तो आप उन लोगों के लिए जगह बनाते हैं..
_ जो आपके जीवन में बने रहेंगे और उसे सार्थक तरीके से समृद्ध करेंगे.
_ हार मानना छोड़ने का नहीं, बल्कि स्वीकृति का एक कृत्य है – जीवन के प्रवाह को अपनाना, यह समझना कि हर कोई हमारे साथ हर मंजिल तक नहीं पहुंचने के लिए नहीं होता.
_ याद रखें, आपकी तक़दीर आपकी है.
_ कोई भी इसे आपसे नहीं छीन सकता, और कोई भी उस रास्ते पर नहीं चल सकता जो आपके लिए निर्धारित किया गया है.
_ इसलिए, जब कोई व्यक्ति जाता है, तो विश्वास रखें कि यह आपके सर्वोत्तम भले के लिए है.
_ वे आपकी कहानी का हिस्सा थे, लेकिन अब बाकी का लेखन आपके लिए है, और इसमें और भी बड़ी संभावनाएँ हैं.!!
बीता हुआ कल सिर्फ यादों में होना चाहिए, आपकी आज की मुस्कान में नहीं.

_ कभी-कभी हम अतीत की गलतियों, दर्द या रिश्तों को इतना पकड़े रहते हैं कि आज की खुशियों का स्वाद ही खो देते हैं.
_ लेकिन सोचिए—क्या वो सिचुएशन या इंसान अब भी आपके जीवन पर हक रखते हैं ? असल में नहीं..
_ आपके पास आज है, यही असली गिफ्ट है.
खुद को याद दिलाइए:
_ मैं अतीत को छोड़ रहा हूँ.
_ मैं आज की खुशी जी रहा हूँ.
_ मैं अपने वर्तमान को प्यार और शांति से भर रहा हूँ.
_ बीते कल को वहीं रहने दें.. जहाँ उसका स्थान है.
_ आज को जिएं, मुस्कान को बचाएं.!!
अगर हम अपने अतीत में झांककर देखें कि हमने किस मोड़ पर अपने रास्ते बदले थे, आखिर वो कौन से मौड़ थे जहां से हमने खुद को बदला था तो हम पाएंगे कि वो सारे मोड़ अक्सर किसी न किसी दुखद वाकये से जुड़े होते है..

_ कुछ ऐसे वाकये जिन्होंने हमें अंदर तक झझकोर कर रख दिया था, हमें कोई न कोई निर्णय लेने पर मजबूर किया था..
_ कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है कि हमेशा बदलाव की शुरुवात किसी दुखद वाकये से होती है फिर चाहे किसी ने हमसे कुछ बुरा कहा हो या फिर किसी ने हमारा कुछ बुरा किया हो..
_ असलियत यह है कि जब हमारे साथ सब कुछ अच्छा हो रहा होता है तब हम किसी गहरी नींद में होते है.
_ इतनी गहरी नींद में कि हमें उसकी कोई अच्छाई दिखाई ही नही पड़ती.
_ यही वजह है कि हम किसी दूसरे की अच्छाई को कोई तवज्जो भी नही देते और न ही कभी उसकी प्रशंसा करते हैं.
_ हम अपने अतीत की अच्छी यादें अक्सर भूल जाते है.
_ हमारी यह गहरी नींद केवल और केवल तभी टूटती है जब हमारे साथ कुछ बुरा होता है और तब हम अचानक से इतने क्रियान्वित हो जाते है कि उस बुरे हादसे को ज़िन्दगी भर नही भुला पाते..
_ ऐसा नही की हमारे साथ हमेशा सब कुछ बुरा ही होता है, बल्कि सच यह है कि हमें केवल बुरा ही याद रह जाता है, बाकी की हर अच्छाई हम भूल जाते हैं..
_ हमारी यही सारी समस्यायों की जड़ है, हम बुराई का इतना ज्यादा अभ्यास करते हैं कि वो हमेशा के लिए हमसे चिपक जाती है और हम उसके प्रभाव से कभी भी मुक्त नही हो पाते..
_ क्योंकि सामने वाले कि अच्छाई के वक़्त हम गहरी नींद में होते है.. इसलिए कभी उसे तवज्जो नही देते, कभी उसकी चर्चा नही करते और न ही कभी उसका अभ्यास करते हैं..
_ शायद यही वजह है कि किसी दूसरे की मुट्ठी भर कमियां भी उसकी हज़ारों लाखों अच्छाईयों पर भारी पड़ती है.
_ उसकी कमियों के लिए हम उसे ज़िन्दगी भर दोष तो देते हैं परंतु उसकी अच्छाइयां भूल जाने की आदत हमें कभी दिखाई नही पड़ती..!
तुम नदी को नहीं पकड़ सकते, मेरे दोस्त.

_ तुम चाहे जितना प्रयास करो—लेकिन यह तुम्हारी उंगलियों से फिसल जाएगी.
_ सब कुछ बदल रहा है…यह सांस, यह शरीर, यह कहानी जो तुम खुद को सुनाते रहते हो.
_ लेकिन फिर भी, हम पकड़ कर रखते हैं.
_ पुराने नामों को, पुराने दर्द को, उन लोगों को जो पहले ही चले गए हैं, हमारे उन संस्करणों को जो अब मौजूद भी नहीं हैं.
_ हम यह सब अपने सीने में पत्थरों की तरह ढोते हैं.
_ सोचते हैं कि अगर हम कसकर पकड़ेंगे, तो यह हमें सुरक्षित रखेगा.
_ लेकिन सच्चाई यह है—यह हमें भारी बनाता है.
_ पानी को देखो.
_ यह मौसम से नहीं लड़ता.
_ सर्दी आती है—यह बर्फ बन जाता है.
_ गर्मी आती है—यह भाप बन जाता है.
_ मानसून में, यह दहाड़ता है.
_ चुपचाप, यह धुंध बन जाता है.
_ कोई नाटक नहीं.. कोई सवाल नहीं.. बस बदलाव..!
_ इसलिए यह बहता है.. इसलिए यह जीवित रहता है.
_ और हमें देखो-हम हर मोड़ पर अटक जाते हैं.
_ “ऐसा नहीं होना चाहिए था”
_ “इस व्यक्ति को नहीं जाना चाहिए था”
_ “यह दर्द यहाँ नहीं होना चाहिए था”
_ लेकिन नदी चट्टान पर रोती नहीं है.
_ यह झुक जाती है.
_ यह दूसरा रास्ता खोज लेती है.
_ स्थिर पानी.
_ अभी भी बह रही है.
_ अभी भी जीवित है.
_ छोड़ देने का मतलब हार मान लेना नहीं है.
_ इसका मतलब है-बस.
_ पुरानी कहानी को घसीटना बंद करो.
_ जो पहले से है उसका विरोध करना बंद करो.
_ कभी-कभी छोड़ देना बस साँस छोड़ना है.
_ कभी-कभी यह बस इतना कहना है, “ठीक है, मुझे नहीं पता..
_ लेकिन मैं फिर भी चलूँगा”
_ छोड़ दो जैसे बर्फ पिघल कर वसंत में आती है.
_ नरम – शांत – कोई लड़ाई नहीं.
_ आप यहाँ वैसे ही रहने के लिए नहीं हैं.
_ आप यहाँ घुलने और फिर से बनने के लिए हैं.
_ पानी की तरह..
_ जीवन की तरह..
_ मैं यहाँ कोई नया ज्ञान नहीं बता रहा हूँ, बल्कि आपको तथ्यों की याद दिला रहा हूँ.!!
— SACHIN
जिन लोगों को अतीत वर्तमान से अधिक भव्य और गौरवशाली दिखायी देने लगे और भविष्य दिखायी देना बन्द हो जाये तो समझ लेना चाहिए कि वो बूढ़े हो चुके हैं.

_ इस तरह की बीमारी.. जिसमें बुढ़ापे का जवानीलेवा हमला किसी भी उम्र मे हो जाता है, विशेष रूप से जवानी में भी हो सकता है.
_ अगर चिलम या शराब उपलब्ध न हो तो उस वक़्त इन लोगों को अतीत की यादों और फ़ैंटेसी में डूबे रहने में ही मज़ा आने लगता है,
_ क्योंकि ये थके-हारों का अंतिम आश्रय-स्थल होती है.
_ जैसे कुछ बहादुर और मेहनती लोग अपनी परिश्रम की शक्ति से अपना भविष्य अपने आप बुनते हैं,
_ इसी तरह अतीतजीवी अपने विचारों से अपना अतीत बुनते रहते हैं.
_ ये अतीत की नफरती यादें.. कटीले पेड़ों की तरह सिर्फ़ दूसरों के काँटे चुभाने या किसी दिन आग की भट्टी में जलते हुए इधर-उधर आग छिटकाने का काम कर रही होती हैं.
_ कभी-कभी पूरा समाज तक अपने ऊपर अतीत का कंबल ओढ़े नशे में धुत्त पड़ा रहता है.
_ अगर ग़ौर किया जाये तो इण्डियन सब-कांटिनेंट का असल विलेन अतीत ही है.
_ जो लोग वर्तमान में जितने बोद्धिक स्तर पर पिछडे, और मूर्ख होते हैं..
_ उन्हें अपना अतीत उतना ही अधिक उज्ज्वल और दुहराये जाने योग्य दिखायी पड़ता है.
_ हर परीक्षा और कठिनाई की घड़ी में वो अपने अतीत की ओर उन्मुख होते है और अतीत भी वो नहीं, जो वस्तुतः था,
_ बल्कि वो जो उन्होंने अपनी इच्छानुसार कल्पनाशीलता के ज़रिए गढ़ लिया होता है.!!
– Krishna Choudhary
हम जो फैसले लेते हैं, जो रास्ते चुनते हैं, और जिन बातों पर यक़ीन करते हैं, उनमें से ज़्यादातर हमारी परसेप्शन [धारणा] यानी सोचने देखने के तरीके से आते हैं.

_ परसेप्शन [perception] कोई सीधी-सादी चीज़ नहीं है.
_ ये बनती है, बिगड़ती है, बदलती है…
_ और अक्सर हमें खुद भी नहीं पता होता कि हम किसी चीज़ को वैसे ही क्यों देखते हैं.
_ एक ही माँ के जुड़वाँ बच्चे, एक ही घर, एक ही माहौल, फिर भी दोनों का ज़िंदगी को देखने का नज़रिया बिल्कुल अलग..
_ कोई दुनिया को मौक़ा समझता है, कोई बोझ..
_ इसका मतलब है, हालात एक जैसे हों, तब भी सोच एक जैसी हो, ज़रूरी नहीं.
_ हम पूरी ज़िंदगी नई नई धारणाएँ बनाते रहते हैं.
_ कभी पुरानी सोच में थोड़ा सुधार करते हैं, कभी उसे पूरी तरह नकार देते हैं.
_ और सच ये है कि जब तक उस विश्वास में बदलाव न आए, जिस पर हमारी सोच टिकी है, तब तक “परसेप्शन बदल गया” कहना अक्सर खुद से झूठ बोलना ही होता है.
_ अपने ईगो को तोड़ना, अपनी दीवारें गिराना, अपने पुराने यक़ीन छोड़ना, इसमें कोई शर्म नहीं है, अगर वो आपको थोड़ा और इंसान बना दे, पहले से थोड़ा और सच्चा.!!
– Krishna Choudhary
जीवन सुख-दुख की मिश्री है, जो साँसों के धागे में लिपटी हर दिन को मीठा-कड़वा बनाते रहती है, कभीं कुछ भारी, कभी कुछ और इस तरह से देखते हुए समय कब निकल जाता है मालूम नहीं पड़ता.

_ समय के साथ भूलना बहुत जरूरी प्रक्रिया है, यदि आपको स्मृति दोष है यानि स्मृतियाँ दंश की तरह से चुभती है, आपको हर बात याद रहती है तो आपसे ज्यादा दुखी कोई नहीं,
_ क्योंकि एक समय के बाद सारी यादें धुंध बनकर आपके आसपास के वातायन में जम जाती है बर्फ की तरह और रीसती रहती है टप-टप..
_ ऐसे में हर क्षण को, हर व्यक्ति, हर घटना, हर सांस को भूलने का अभ्यास कीजिए, और इस भूलने में यदि आप हर बात को, अतीत के बोझ को उतारकर सबको माफ करने का सार्थक प्रयास कर सकें तो यकीन मानिए सब कुछ मनोनुकूल होगा और एक सकारात्मकता से आप भर उठेंगे.
_ यदि अतीत को सिर पर बोझ बनाकर रखेंगे तो सफर करना असहज होगा,
हमें ही सबकुछ उतारकर फेंकना होगा,
जीवन में हम कई प्रकार के व्यर्थ बोझ उठाकर देह के बोझ के साथ मानसिक संत्रास भी उठा लेते है और यही अवसाद नासूर की तरह से बढ़ते जाते है,
भूलना और माफ करते हुए आगे की ओर बहाव के संग बहना यदि आज भी लक्ष्य बना लें तो बहुत कुछ संभव है अभी भी.
– Sandip Naik

सुविचार – प्रतिशोध – बदला – बदलाव – परिवर्तन – 109

13359515463_790fcc734d

ध्यान दें कि जब लोगों को वह नहीं मिलता जो वे आपसे चाहते हैं तो वे कैसे बदल जाते हैं.

Notice how people change when they don’t get what they want from you.

आप ख़ुद ही सोंचे कि आपने बातों के अतिरिक्त..

_ खुद को बदलने के लिए क्या प्रयास किए हैं.!!

आप दूसरों को नहीं बदल सकते, लेकिन खुद को बदलने के पूरे अवसर आपके हाथ में है.
लोग बदलते नहीं…बस अपनी ज़रूरत के हिसाब से दिखते हैं.!!
“परिवर्तन संसार का नियम है’ – यहाँ हमेशा एक जैसा रहे.. यह जरूरी नहीं.!!
बदलाव सबको नज़र आता है, वजह किसी को नहीं..!!
अगर आपका दिमाग पूरी तरह से पुरानी सोच से भरा हुआ है, तो आप जो बदलाव चाहते हैं,

_ उसे बनाने के लिए आपके दिमाग में नए विचारों का आना असंभव है.

समय के साथ हालात बदल जाते हैं,  इसलिए बदलाव में खुद को बदल लेना ही समझदारी है.

_ बदलाव कष्ट देता है, लेकिन जरुरी है !!

जिस दिन हमारी आँख खुल जाती है, उसी दिन सवाल जन्म लेते हैं..
_ और सवाल सिर्फ शब्द नहीं होते, वे बदलाव की शुरुआत होते हैं.!
सबकुछ कितना बदल रहा है..
_ मिलने जुलने वाले कम हो रहे हैं और बहाने बना कर रास्ता बदलने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है.!!
लोग दो ही कारणों से बदलते हैं :
_ या तो अनहोने बहुत कुछ सीख लिया होता है या फिर उन्हें बहुत बार चोट लगी होती है.!!
कभी सदियों में कुछ नहीं बदलता और कभी एक रात में सब कुछ बदल जाता है.!!
कहीं हम भी नएपन और बदलाव के चक्कर में भटकाव की स्थिति में तो नहीं गोते लगा रहे हैं..??
जिसके लिए खुद को बदलना चाहते हो, अगर वही बदल गया तो क्या करोगे..??
हम चाहे खुद को कितना भी बदल लें, कुछ लोगों के लिए हमेशा गलत ही रहेंगे.!!
बदलाव एक ऎसा माध्यम है, जो आप के भाग्य को भी नियन्त्रित करता है.

_ अगर आप अपने भाग्य को स्वयं नियन्त्रित करना नहीं सीखेंगे, तो आपके भाग्य को कोई और ही नियन्त्रित करने लगेगा.
_ इस बदलाव से आप पाएंगे कि एक पल में ही आपकी ज़िन्दगी को नया आयाम मिल गया.!!
बदलाव तो समय की चाल है.. पर दूसरों पर उंगली उठाने से पहले ये देखना ज़रूरी है कि आपकी परछाई भी वही है या नहीं.!!
बदलाव से मत डरो. आप कुछ अच्छा खो सकते हैं, लेकिन कुछ बढ़िया भी पा सकते हैं.

Don’t fear change. You may lose something good, but you may also gain something great.

स्थान परिवर्तन तरक्की के रास्ते खोलता है.
_ एक जगह पड़े-पड़े तो पानी भी सड़ जाता है.!!
ज़िन्दगी में बदलाव होंगे ही, होने भी चाहिएं ; जैसे अधिकतर लोग अपने मूल स्थान में नहीं रहते होंगे (जहाँ उनके दादा -परदादा रहते थे).

_ बदलाव जीवन का स्वभाव है ये कई वजह से होता है ; जैसे शादी के बाद लड़कियां कहीं और चली जाती हैं, कोई पढ़ने को बाहर चला जाता हैं, किसी को जॉब के लिए बाहर जाना पड़ता है.!
अपने बेहतर रूप में बदलने के सफर में कई चीज़ों और कई लोगों को अलविदा कहना पड़ता है. – “बदलाव हमेशा त्याग मांगता है”
यदि किसी के छोटे-से प्रयास से भी हमारा भला हो सकता है, तो वह प्रयास अवश्य करना चाहिए,

_ क्योंकि बदलाव हमेशा बड़े कदमों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी ईमानदार कोशिशों से शुरू होता है.!
जंजीरो में बँधे हम, खुश तो थे,

_ कौन है ये, जो बदलाव लाने जा रहा है !
_ आँखों को मीचे मजे में रहते थे,
_ कौन है जो सच दिखा रहा है !
सीखो अब ये सच गहरा, अपनी नींव को खुद मज़बूत रखना.

_ क्योंकि लोग बदलते हैं, हालात बदलते हैं, – पर अपने भीतर की रोशनी को जलाए रखना.!!
अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सब कुछ बदलना ज़रूरी नहीं है –

– यह ऐसे बदलाव लाने के बारे में है ..’जो मायने रखते हैं’.

दुनिया में लोग ज्यादातर दो ही चीज़ों की वजह से बदलते हैं,

_ या तो उन्हें सबक बहुत मिल जाते हैं या दर्द बहुत मिल जाता है.!!

सबसे अच्छा बदला, कोई बदला लेना नहीं है ;

_ आगे बढ़ें और उन लोगों की तरह न बनें, जिन्होंने आपको चोट पहुंचाई है !!

हमारे अंदर बेमिशाल बदलाव लाने की ताकत है,

_ हम अपने भीतर के जादू के बारे में नहीं जानते..

आप बाह्य दुनिया को कभी नहीं बदल सकते,

_इसलिए ख़ुद में सार्थक परिवर्तन कीजिए.!!

आप चाहे जितनी भी योजनाएं बना लें, अप्रत्याशित घटनाएं होंगी..

_ क्योंकि बदलाव जीवन का हिस्सा है, आपको हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा.!!

बदलते वक्त के साथ हमें वो चीजें भी छोड़नी पड़ती हैं, जो एक वक्त पर हमारे लिए सबसे अजीज थी,

_ वो साथ भी, जिसे हमने कभी अपने जीवन का सबसे खूबसूरत क्षण माना होता होता है.!

इंसान कि आदत होती है ..उसे हर चीज में एक समय बाद ..बदलाव की ललक होती है..!!
कोई आज तो कोई कल बदलता है, यकीन करो सब बदलते हैं.!!
बदलाव अगर हित में हो तो अवश्य बदल जाना चाहिए..!!
थोड़ा अपने आप को बदलिए.. थोड़ा अपने लिए, थोड़ा अपने आसपास वालों के लिए, थोड़ा उनके लिए जिन्हें आपसे उम्मीदें हैं , और थोड़ा उनके लिए जिन पर आप निर्भर हैं.. बहुत ज़्यादा नहीं, बस थोड़ा-सा..-  क्योंकि बदलाव बोझ नहीं, एहसास होना चाहिए.!!
ऊंचाई पर वही पहुँचते हैं, जो बदला लेने की नहीं बल्कि बदलाव लाने की सोचते हैं.

_ बदला मत लीजिए, बल्कि वृद्धि की ओर बढ़िए – सबसे अच्छा बदला यह नहीं है कि आप उन्हें वापस चोट पहुँचाएं;

_ सबसे अच्छा बदला यह है कि आप इतने सफल और खुश बन जाएं कि वे अब मायने नहीं रखते.!!

हमारी बुरी आदत है कि हम बदलाव को स्वीकार नहीं करते और पहले क्षण से ही आलोचना शुरू कर देते हैं.

_ जब हमें कोई चीज़ पसंद नहीं आती तो हम असल में उसके बुरे परिणाम की कामना करने लगते हैं ताकि हम अपनी बात साबित कर सकें.

किसी अप्रिय घटना के घटने के बाद बदला लेने के बजाय स्वयं को बदल लेना बदला लेने का ज्यादा सकारात्मक और रचनात्मक तरीका है.
किसी से बदला लेने का ख्याल छोड़ कर..

_ कुछ ऐसा करें कि आपको छोड़ने वाले को भी आपको खोने का अफ़सोस हो..!!

किसी व्यक्ति को क्षमा करना अथवा प्रतिशोध लेना,

_ इससे कहीं परे की अवस्था है उसको मन से उतार देना…!!!

बदला लेने में वक्त मत गंवाओ,
_ जो आपको चोट पहुंचाते हैं.. वो खुद अपने कर्म भुगतेंगे.!!
कुछ लोग कभी नहीं सुधरते.. वो अपने वृत्ति के गुलाम होते हैं.

_ “ऐसे लोग अपनी ही प्रवृत्ति की कैद में जीते हैं,
_ भले ही दुनिया बदल जाए — उनके भीतर का अंधकार वैसा ही रहता है.
_ हम बस इतना कर सकते हैं — उनसे दूरी रखकर अपनी रोशनी बचा लें.”
इस दुनिया में सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि _ मनुष्य जिस तरह जीना चाहता है _ वैसा लोग उसे जीने नहीं देते ;

_ इसलिए वह भी दूसरों से अपना बदला भुनाता है, वह भी दूसरों को उनकी मर्जी से जीने में पचास अड़ंगे लगाता है.
_यह खेल न जाने कब से जारी है !!
_ दुख-सुख, सफलता-असफलता, मिलन-विछोह सब क्षणिक है _लेकिन जब ये जीवन में घटते हैं तो _इनकी तीव्रता इतनी अधिक होती है कि _मनुष्य का मानसिक संतुलन डगमगा जाता है.
_ जिसने उस समय संतुलन साध लिया, जो हर परिस्थिति में सम रहा, समझ लीजिए _उसने जिन्दगी की बाज़ी जीत ली..!!
किसी एक माहौल में लंबे समय तक रहने के बाद जब इंसान दूसरे माहौल में जाता है, तो खुद को ढालने में थोड़ी परेशानी होना स्वाभाविक है,
_ आदतें सोच और दिनचर्या बदलने में समय लगता है, लेकिन यही बदलाव आगे चलकर नई समझ, बेहतर अनुभव और पहले से अच्छी चीज़ें भी साथ ले आता है बस थोड़ा धैर्य रखना होता है.!!
पता नहीं आदमी बदलाव क्यों चाहता है ? बदलाव सपनों में उलझा देता है..

_ जो बदलाव नहीं चाहता वो यथार्थ [हकीकत] में जीता है.
_ आदमी है तो दैनिक दिनचर्या के काम करेगा, रोज नींद लेगा, मकानों में रहेगा, दुकानों-ऑफिस में काम करेगा, और क्या कर लेगा ?
कोई किसी के कहने से नहीं बदलता..

_ दरअसल, किसी को बदलने की ज़रूरत ही क्यों हो ?
_ बेहतर तो यही है कि आप खुद को बदलें.
_ आप बदलेंगे — जग बदल जाएगा”
_ बात सुनने में शायद आसान न लगे, पर हक़ीक़त यही है –
_ जब हम खुद को बदलते हैं, तो संसार बदल जाता है.
_ और जब संसार बदलता है, तो ज़िंदगी आसान हो जाती है.!!
हम लोग भी अजीब हैं, हमारा ज़्यादा समय दूसरों को बदलने में जाता है.

_ पर जब वो बदल जाता है तो हम चिल्लाते हैं कि यह बदल गया.
_ क्योंकि वो हमारे मन के मुताबिक नहीं बदला होता.
_ और अगर हमारे कहने अनुसार बदल भी जाता..
_ तो कुछ दिन बाद फिर उसको बदलने की कोशिश में लग जाते हैं.!!
लोगों का बदलना अब मेरे लिए नया नहीं है, कौन इंसान किस मोड़ पर, किस छोर पर, किस तरह बदलेगा, किस तरह तोड़ेगा.. अंदाजा लग जाता है,

_ पर हम भी अब उसी मोड़ से अपनी नई राहों का इंतज़ाम पहले से तय करके चलते हैं.!!
– रिदम राही

सुविचार – Quotes about Saving Animals – जानवर – जानवरों को बचाना, “जीवों को उनका अधिकार दो” – 108

13359890325_62614c2d2f

“पक्षी जगत पर्यावरण का सूचक होता है, _

अगर वे मुसीबत में हैं तो हमें समझ लेना चाहिए कि हमारे भी वो बुरे दिन दूर नहीं.”

मानवता की सच्ची नैतिक परीक्षा, उसकी मौलिक परीक्षा… उन लोगों के प्रति उसके दृष्टिकोण में शामिल है जो उसकी दया पर निर्भर हैं: जानवर. – Milan Kundera

Humanity’s true moral test, its fundamental test…consists of its attitude towards those who are at its mercy: animals. – Milan Kundera

निहत्थे जानवरों को अंग-भंग और मृत्यु के अधीन करना पूरी तरह से अनुचित है, ताकि कोई कंपनी नेल पॉलिश के नए शेड या नए, बेहतर कपड़े धोने वाले डिटर्जेंट का विपणन करने वाली पहली कंपनी बन सके.

यह क्रूर है, यह क्रूर है, यह अमानवीय है, और अधिकांश लोग इसे नहीं चाहते हैं. — Abigail Van Buren

It is totally unconscionable to subject defenseless animals to mutilation and death, just so a company can be the first to market a new shade of nail polish or a new, improved laundry detergent.

It’s cruel, it’s brutal, it’s inhumane, and most people don’t want it — Abigail Van Buren

जानवरों से प्यार करें: भगवान ने उन्हें बिना किसी परेशानी के विचार और आनंद की मूल बातें दी हैं. _उनके आनंद को परेशान मत करो, उन्हें परेशान मत करो, उन्हें उनकी खुशी से वंचित मत करो, _भगवान की मंशा के खिलाफ काम मत करो.

_हे मनुष्य, पशुओं से श्रेष्ठ होने का घमंड मत कर; वे पाप रहित हैं, और आप, अपनी महानता के साथ, पृथ्वी पर अपनी उपस्थिति से उसे अपवित्र करते हैं, और अपने बाद अपनी बेईमानी के निशान छोड़ जाते हैं – अफसोस, यह हम में से लगभग हर एक के लिए सच है !

Love animals: God has given them the rudiments of thought and joy untroubled. Do not trouble their joy, don’t harrass them, don’t deprive them of their happiness, don’t work against God’s intent.

Man, do not pride yourself on superiority to animals; they are without sin, and you, with your greatness, defile the earth by your appearance on it, and leave the traces of your foulness after you – alas, it is true of almost every one of us ! – Fyodor Dostoevsky

मनुष्य – जो अन्य जानवरों को गुलाम बनाते हैं, बधिया करते हैं, उन पर प्रयोग करते हैं और उन्हें मार डालते हैं – उनमें जानवरों को दर्द महसूस न होने का दिखावा करने की प्रवृत्ति समझ में आती है.

यदि हमें उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार झुकाना है, उन्हें अपने लिए काम करना है, उन्हें पहनना है, उन्हें खाना है, तो इंसानों और ‘जानवरों’ के बीच एक तीव्र अंतर आवश्यक है – बिना किसी अपराधबोध या अफसोस के परेशान करने वाले भाव के.

यह हमारे लिए अनुचित है, जो अक्सर अन्य जानवरों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार करते हैं कि हम यह तर्क दें कि केवल मनुष्य ही पीड़ित हो सकते हैं. अन्य जानवरों का व्यवहार ऐसे दिखावे को विशिष्ट बनाता है. वे बिल्कुल हमारे जैसे ही हैं. – Carl Sagan

Humans — who enslave, castrate, experiment on, and fillet other animals — have had an understandable penchant for pretending animals do not feel pain.

A sharp distinction between humans and ‘animals’ is essential if we are to bend them to our will, make them work for us, wear them, eat them — without any disquieting tinges of guilt or regret.

It is unseemly of us, who often behave so unfeelingly toward other animals, to contend that only humans can suffer. The behavior of other animals renders such pretensions specious. They are just too much like us.

– Carl Sagan

जो जानवर तुम खाते हो वे वे नहीं हैं जो दूसरों को खाते हैं; तुम मांसाहारी पशुओं को नहीं खाते, तुम उन्हें अपना आदर्श मानते हो.

आप केवल मीठे और कोमल प्राणियों के लिए भूखे हैं जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, जो आपका अनुसरण करते हैं, आपकी सेवा करते हैं, और उनकी सेवा के पुरस्कार के रूप में आपके द्वारा खाए जाते हैं. – Jean-Jacques Rousseau

The animals you eat are not those who devour others; you do not eat the carnivorous beasts, you take them as your pattern. You only hunger for the sweet and gentle creatures which harm no one, which follow you, serve you, and are devoured by you as the reward of their service. –

Jean-Jacques Rousseau

आप यह कैसे कह सकते हैं कि आप आध्यात्मिक रूप से विकसित होने की कोशिश कर रहे हैं, बिना यह सोचे कि उन जानवरों का क्या होता है जिनकी जान लोलुपता के नाम पर बलि चढ़ा दी जाती है ? – Oprah Winfrey

How can you say you’re trying to spiritually evolve, without even a thought about what happens to the animals whose lives are sacrificed in the name of gluttony ? – Oprah Winfrey

मवेशियों पर विचार करें, जो आपके पास से गुजरते हुए चरते हैं.

_ वे नहीं जानते कि कल और आज का क्या मतलब है, वे उछलते-कूदते हैं, खाते हैं, आराम करते हैं, पचाते हैं, फ़िर से उछलते हैं, और इसी तरह सुबह से रात तक दिन–प्रतिदिन, उसकी ख़ुशी या नाराज़गी से बंधे रहते हैं, और इस प्रकार न तो उदास होते हैं और न ही ऊबते हैं.
~फ्रेडरिक नीत्शे
जानवरों को कहीं आने जाने की हड़बड़ी नहीं है, यह न अपने भूत से हैरान हैं न भविष्य से आशंकित, न इन्हें कुछ जोड़ना है न घटाना…!!
जानवर पेट भरकर सो जाते हैं, पेड़ ऑक्सीजन देकर खुश हो लेते हैं,

_ पर इंसान ? उसे बिना किसी चुल्ल के चिल ही नहीं पड़ती.
“पशु” कोई चीज़ नहीं हैं बल्कि जीवित जीव हैं, _

_ जो हमारी करुणा, सम्मान, दोस्ती और समर्थन के योग्य हैं.”

ध्यान से पंछियों को देते हो दाना – पानी _

_ इतने अच्छे हो तो _ पिंजरे से रिहा कर दो ना..

बेजुबान हैं फिर भी, सब समझ जाते हैं, _

_ जानवर हैं तो क्या, दोस्ती ये भी निभाते हैं..

पशुओं में भावनाएं होती हैं, वे मनुष्य के मन की बात समझ सकते हैं.

_ वे सिर्फ़ मुस्कुरा नहीं सकते, हंस नहीं सकते.!!

बेजुबानों से भी हमदर्दी करना ना भूलो, ये बगैर लफ़्जों के दुआएं देते हैं.
पेड़ तो कट गया पर बात तो ताल्लुक की थी, बैठे रहे जमीं पर वो परिंदे रात भर..!!
जहाँ जगह मिली _ वहीँ सर रख के सो गए,

_ जानवरों ने खुदा से _ कभी शिकायत नहीं की..

जानवर, हम मनुष्यों की तरह ही जीवित जीव हैं, जो कि बोल नहीं सकते लेकिन उनके अंदर प्रेम, कृतत्रता और वफादारी को समझने की शक्ति काफी बेहतर होती है।

वे एक इंसान के अच्छे दोस्त भी हो सकते हैं। एक जानवर से मनुष्य को उसकी वफादारी और प्रेम करने के गुण को सीखने की आवश्यकता है अर्थात जानवर हमारी करुणा और सम्मान के योग्य हैं।

इसलिए हम सभी को जानवरों के प्रति नरम होना चाहिए और उनकी जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए। वहीं जानवरों को भी हम इंसानों की तरह पीड़ा मुक्त जीवन जीने का का अधिकार है।

जानवरों के साथ संचार अंतरंगता चरित्र की अच्छाई से जुड़ा हुआ है ; इस तरह से कि यह पुष्टि की जा सकती है, निश्चित रूप से, जो कोई भी जानवरों के लिए क्रूर है _ वह एक अच्छा व्यक्ति नहीं हो सकता है.
जो लोग किसी भी जीव को अपनी थाली में परोसते हैं, वे न जाने कैसे उनका दर्द नहीं देख पाते..!!
अब हमें जानवरों की तरह जीने की जरूरत है.

What we need is now is to live like animals.

1. पशु धन का संचय नहीं करते हैं: उनमें से कुछ जो जमा करते हैं वह भोजन है और यह आवश्यकता है ; _ _ जबकि हम फालतू की चीजें जमा कर लेते हैं ; _ हम उपभोक्तावाद और भौतिकवाद के भ्रम में जीते हैं.

1. Animals do not accumulate wealth: What a few of them accumulate is food and that’s necessity. While we accumulate unnecessary things. We live in the fallacy of consumerism and materialism.

2. जानवर इकोलॉजिकल हैं: वे प्रकृति के साथ एक रहते हैं ; _ सभ्यता और विकास के नाम पर प्रकृति के लिए यथासंभव विनाशकारी तकनीकों का आविष्कार करने के विपरीत, उनका हर कार्य प्रकृति का परिरक्षक है.

2. Animals are ecological: They live one with nature. Every action of them is preservative of nature as opposed to us inventing as many destructible technologies as possible to the nature in the name of civilization and development.

3. जानवरों के पास दिमाग होता है: और वे इसका इस्तेमाल करना जानते हैं ; _ उन्हें पता है कि कितना खाना है, कितना सोना है, कितना प्यार करना है और कितना नफरत करना है ; _ उनका संतुलित जीवन है.

3. Animals have brains: And they know how to use it. They know exactly how much to eat, how much to sleep, how much to love and how much to hate. They have a balanced life.

4. जानवर घड़ी देखने वाले नहीं होते: ये घड़ी से नहीं अपने शरीर से प्रतिक्रिया करते हैं ; _ कोई नौकरी 9-5 नहीं है, केवल सप्ताहांत पर कोई मज़ा नहीं है ; _ वे तनावग्रस्त नहीं हैं; मधुमेह, दिल का दौरा, रक्तचाप की समस्या आदि से पीड़ित नहीं हैं ; _वे जीने के लिए जीते हैं.

4. Animals are not clock watchers: They react to their body not to the clock. No job is 9-5, no fun only on weekends. They are not stressed; do not suffer with diabetes, heart attacks, blood pressure problems etc. They live to live.

5. जानवरों को औपचारिक रूप से शिक्षित नहीं किया जाता है : हमारी शिक्षा हमें सिखाती है कि पृथ्वी को कैसे नष्ट किया जाए और फिर हम सौर मंडल में चंद्रमा और अन्य सितारों पर कैसे जा सकते हैं और ज्ञात और अज्ञात आकाशगंगाओं को नष्ट करने का प्रयास कर सकते हैं.

जीवन में सभी महत्वपूर्ण चीजें जैसे पानी, जमीन, भोजन और आश्रय सबसे महंगा हो गया है क्योंकि “नैतिक मूल्य”, शिक्षा और कौशल हम हर दिन प्राप्त कर रहे हैं.

5. Animals do not get educated formally: Our education teaches us how to destroy the earth and then how can we go to moon and other stars in the solar system and try to destroy the galaxies known and unknown. All the important things in life such as water, land, food, and shelter have become the most expensive due to the “moral values”, education and skills we are getting every day.

सुविचार 107

13357063404_d4323657b7

मनुष्य के सभी कार्य इन सातों में से किसी एक या अधिक वजहों से होते हैं…..

… मौका, प्रकृति, मज़बूरी, आदत, कारण, जूनून व इच्छा.

सुविचार 106

13363798053_ccb6c2c18f

वृछ कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता कि उसने कितने पुष्प खो दिए,

वह सदैव नए फूलों के सृजन में व्यस्त रहता है.

जीवन में कितना कुछ खो गया, इस पीड़ा को भूल कर,

क्या नया कर सकते हैं, इसी में जीवन की सार्थकता है….

 

सुविचार – जॉब [ Joining Others business ], नौकरी, Job, कार्यभार, कोई काम जिसके लिये तनख्वाह मिलती हो. – 105

13350047945_a6b4523080

घर कहीं, जॉब कहीं, अपने कहीं, सपने कहीं !!
“जॉब, पैसा, घर – सब काम के हैं,
_ पर जीवन तब व्यवस्थित होता है.. जब अंदर शांति हो, और बाहर जरुरत भर साधन हो”
इसे नसीब ही तो कहेंगे, बिना पढ़े-लिखे लोग लाखों में खेलते हैं और पढ़े-लिखे जॉब की तलाश में संघर्ष करते हैं.!!
जॉब करने वालों के घर कहीं, अपने कहीं और सपने कहीं..

_ बस इंसान इसी में उलझने सुलझने में अपनी ज़िन्दगी गुजार देता है..!!

अधिकांश लोगों को वह माहौल पसंद नहीं आता _जिसमें वे काम करते हैं,

_फिर भी वे अपने परिवार के बारे में सोचकर जॉब नहीं छोड़ पाते.!!

“ज़िंदगी बसर करने के लिए कोई जॉब या कोई काम मायने नहीं रखता,

_ जब तक कि वो मन का न हो … उसमें संतुष्टि भाव न हो या उससे खुशी न मिले !;”

जिंदगी एक ही मिली है.. हमें विस्तार क्यों नहीं करना चाहिए..?

_ मेरा एक ही फंडा है,
_ अगर जीवन जीना है तो पसंद का काम करो.. जो आपको खुशी देता है,
_ और अगर गुजारनी है तो.. अनेकों काम हैं दुनियां में..!!
_ “तो जियो ना एक ही जिंदगी है”
बहुत से काम ऐसे हैं जो हमारी रुचि के नहीं होते, फिर भी हम करते हैं.

_ करते हैं क्या, करने पड़ते हैं.
_ कई बार नौकरी अपने मन की नहीं मिलती, योग्यता किसी अलग विषय में हासिल की होती है,
_ रोज़ी-रोटी कमाने के लिए काम कुछ और करना पड़ता है.
_कई बार साथ जीने के लिए अच्छे लोग नहीं मिलते, फिर भी उन्हें निभाना पड़ता है.
_ कई बार लगता है, यह ज़िन्दगी जीने के लायक नहीं, तब भी हमें जीना पड़ता है.
_ जीवन के इस मंत्र को अपना लो कि जो अरुचिकर है, जिसे बदला न जा सके,
_ या तो उसे स्वीकार कर लो या छोड़ दो..!!
अजीब कश्मकश है ” कोई नौ से पांच की जॉब के लिए परेशान है,

_ तो कोई नौ से पांच की जॉब से परेशान है !!

*बढ़िया पैकेज की जॉब के अलावा भी जीवन में बहुत कुछ है, जिसे किया जा सकता है और करते हुए शान से जिया जा सकता है*
जब काम करना ही है तो उसमें बेचारगी का रोना क्यों ?…. क्यों ना खुशी-खुशी किया जाए..

_ खुशी से काम करने से काम के साथ-साथ खुद के साथ भी न्याय होता है.!!

error: Content is protected