सुविचार – वादा, वायदा – वादे, वादें – Promise – 116

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कुछ लोग आदतन हर बात में वादा कर लेते हैं _और पूरा करने के वक्त भूल जाते हैं

_या गायब हो जाते हैं..
_उन्हें नहीं पता होता कि _उनके वादे की डोर पकड़कर _यदि कोई कुछ करना चाहेगा तो
_उसका क्या हाल होगा..
_ऐसे लोगों की हां से ज़्यादा ज़रूरी है _उनका ना करना..
_ख़ासकर जरूरतमंद लोगों से कोई वादा सोच समझकर ही करना चाहिए..
झूठे वादे किसी का दिल तोड़ सकते हैं, उसकी उम्मीदें और हिम्मत छीन सकते हैं.
_ इसलिए किसी को वादा करने से पहले अच्छी तरह सोचें कि आप उसे निभा भी पाएंगे या नहीं.!!
A Clear Rejection Is Always Better Than A Fake Promise.

यदि न निभा सको तो झूठा वायदा करने से बेहतर है साफ़ इंकार कर दो.
_ ज़्यादातर यही देखा गया है कि लोग झूठे वादे करते हैं, इस तरह लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं.
_ क्या सच बोल कर किसी के दिल को नहीं जीता जा सकता ?
_ या अपना काम नहीं निकाला जा सकता ?
_ क्या सच के साथ इस दुनिया में नहीं जीया जा सकता ?
जितनी जल्दी हो सके समझ लें कि हर कोई आपको देर-सबेर छोड़ देगा,
_ भले ही उन्होंने हमेशा आपके साथ रहने का वादा किया हो..!!
कोई वादा तभी करें, जब आप उसे निभाने का इरादा रखते हों.!!
कोशिशें मायने रखती हैं, क्योंकि वादे तो अक्सर टूट जाते हैं.!!
छोटी छोटी बातों की, बड़ी बड़ी सी यादें हैं,,
_ निभाते हैं वो भी शिद्दत से, जो करते नहीं कोई वादें हैं !!
बड़े वादों से बेहतर है, एक छोटा सा साथ,

_ दूरियां तो उनमें भी हैं. जिनका हाथों में हाथ है.!!

सुविचार – अपेछा- आशा – उम्मीद – उम्मीदी – उम्मीदें – 115

जब आप किसी से अपेछा नहीं रखेंगे, तो फिर आपको किसी से शिकायत भी नहीं रहेगी..

_ जो लोग शिकायत शून्य हैं, वे ही तो सहनशील हैं..!!

लोग आप से अच्छा बनने की उम्मीद तो करते हैं ; ख़ुद अच्छा बनने से परहेज़ है उन्हें..!!
मसला ये नहीं कि लोग परवाह क्यों नहीं करते, मुद्दा ये है कि हमें उनसे इतनी उम्मीद क्यों है !!
जब मन थक जाए, तो उम्मीद छोड़ना भी समझदारी है.!!
तुझे जैसे चलना है वैसे चल ज़िन्दगी, मैंने तो तुझसे हर उम्मीद ही छोड़ दी है !!
ज़िन्दगी से ज्यादा उम्मीद न रखो तो ज़िन्दगी अच्छी है, बहुत अच्छी है.!!
उम्मीद की किरण के सिवा कुछ नहीं यहाँ..

_ हमारे यहाँ रोशनी का यही इंतज़ाम है.!!

जितनी उम्मीदें कम रखोगे, उतना मन शांत रहेगा..
_ क्योंकि ज़रूरत से ज़्यादा अहमियत अक्सर दर्द दे जाती है.!!
मन की शांति चाहिए तो ‘उम्मीद’ का दामन छोड़ दो ;

_ यही वो बोझ है जो इंसान को चैन से जीने नहीं देता.!!

खुद के साथ मजबूती से खड़े रहने वाले दौर में खुद से नाउम्मीदी रखना ठीक बात नहीं है.!!
आशा, चाहे कितनी ही कम क्यों न हो, निराशा से बेहतर है..!!
अगर उम्मीदें दुख की वजह हैं तो जीने की वजह भी उम्मीदें ही हैं.
जिंदगी से ज्यादा उम्मीद न रखो तो जिंदगी अच्छी है, बहुत अच्छी है.!!
आशा बनाए रखिए.. क्योंकि हर नया सवेरा कुछ अनजानी खुशियां लेकर आता है.
“जिंदगी है तो उम्मीद ही उम्मीद है.!!”
हमनें उम्मीद बहुत लगा रखी है, फिर सोचते हैं कि दुःख की वजह क्या है.!!

_ जीवन बिना किसी से खास उम्मीद लगाए जीने का नाम है.!!

उम्मीदों की बैसाखी छोड़ो और अकेले चलो..

_ जो खुद से जुड़ता है, उसे दुनिया के मतलब से फर्क नहीं पड़ता.!!

ना उम्मीदी नकारात्मकता है…

_ज़िंदगी तो कहीं से भी फ़िर से शुरू हो सकती है.!!
कभी-कभी हम गलत लोगों से, सही उम्मीदें लगा बैठते हैं.!!
जब आप औरों से उम्मीद लगाना छोड़ देते हो तो फिर वो आपकी भावनाओं को ठेस कभी नहीं पहुँचा सकते.!!
जितना आप लोगों के लिए करते हो, अगर उतने की ही आप उनसे उम्मीद भी रखते हो तो.. आप हमेशा निराश ही होने वाले हो.!!
दूसरों से उम्मीद न रखें, क्योंकि जब कभी उम्मीद टूटती है तो बहुत ठेस पहुँचती है. _ किसी से लेने की इच्छा रखने के बजाय कुछ देने की सोचें, अधिक खुशी मिलेगी.
लोग ऐसे हैं कि एक गिलास पानी पिलाने का एहसान के बदले..

_ पूरा कुआं लेने की उम्मीद रखते हैं..!!

सबसे बड़ा दर्द तब होता है, जब नीयत में मदद हो और जेब में मजबूरी.

_ इंसान पैसा न दे पाने से नहीं टूटता, किसी की उम्मीद न बचा पाने से टूटता है.!!
कभी-कभी भरोसा करना भी ज़रूरी होता है, पर पूरी उम्मीद किसी और से बाँध लेना.. _ यही हमारी सबसे बड़ी भूल बन जाती है.
जब सब कुछ ठीक नहीं हो तब भी न घबराएं,

_ बस आप को पता होना चाहिए कि.. टूटी उम्मीदों से चीजों को कैसे सुलझाना है.

कुछ जगह जिंदगी में कभी नहीं भरती, खाली रहती हैं, क्योंकि आपने उन्हें स्वयं बनाया है,

_ आप उन चीजों की उम्मीद कैसे कर सकते हैँ, जिन्हें आपने दूर धकेल दिया है ?

बिना किसी उम्मीद के.. साफ़ दिल के साथ हर चीज़ करते चले जाओ..

_ यकीन मानो आपको इस बात का ज़िंदगी में कभी अफ़सोस नहीं होगा.!!

सच कहकर किसी का दिल दुखाना बेहतर है..

_ बजाय उस झूठ के जो किसी को उम्मीद देकर अंत में तोड़ दे.!!

दुनिया अजीब है – लोग दुख में जीते हैं, फिर भी उम्मीद से भरे रहते हैं.
_ शायद इसी उम्मीद के सहारे ही यह खेल चलता रहता है.
दूसरों से उम्मीदें कम और खुद पर यकीन ज़्यादा रखें ; यही वो छोटा सा मंत्र है जो आपकी ज़िंदगी को सुकून भरा और बेहद हल्का बना देगा.!!
जब उम्मीदें अपनों से जुड़ी होती हैं, तब उनका टूटना सबसे ज़्यादा तोड़ता है,

_ और जब वो अपना अचानक पराया लगने लगे, तब अंदर से जो खालीपन पैदा होता है, उसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल होता है…!

अपनी असहाय अवस्था में, जब हमें कोई रास्ता नज़र नहीं आता, हम दूसरों के पास अपनी समस्या लेकर जाते हैं, इस उम्मीद में नहीं कि वह उसका समाधान कर देगा..

_ बल्कि इस उम्मीद में कि दिल की बात कह देने से हमारा मन हल्का हो जाएगा.!
_ समस्याओं के समाधान केवल बुद्धि से निकाले जाते हैं.. और कुछ समस्याओं के समाधान तो होते ही नहीं, समस्याओं को वहीँ छोड़ कर आगे बढ़ जाना ही एकमात्र निदान होता है.!!
उम्मीद से कम मिलने का दर्द मन में इस कदर समा जाता है कि हम कभी देख ही नहीं पाते कि हमें जरूरत से कितना ज्यादा मिला है,

_ ना जाने बदऩसीबी के इस लेवल में ये कैसी कशिश है कि हम खुशनसीब होते हुए भी खुद को बदनसीब मानने की जिद ठान लेते हैं…!!
उन सब चीजों को ना कहना ठीक है, जिनके साथ आप सहज नहीं हैं.

_ उन लोगों के शोर को ब्लॉक करना ठीक है, जो आपका भला नहीं करते हैं.
_ कभी कभी नकारात्मकता से खुद को अलग करना ठीक है.
_ अन्य लोगों की उम्मीदों के साथ बहुत अधिक फंस न जाएं..
_ आप स्वयं निर्णय करने के लिए स्वतंत्र हैं..!!
लोग आपको तभी पसंद करते हैं.. जब आप उनकी उम्मीदों के मुताबिक रहते हैं.!!

_ जब संसार से हमे कुछ चाहिए होता है.. हम ढूँढने निकलते है ;
_ इस चक्कर में जिन्हें हमसे कुछ चाहिए होता है.. वह हमे ढूँढ लेते है.!!
हमारे बुरे वक्त में जो हमें उम्मीदें देते हैं, लेकिन जब बाद में वो गैर होने का अहसास कराने लगते हैं,

_ तब उन उम्मीदों का टूटना भी स्वाभाविक है,
_ तभी हमारा दिल दुखता है, लेकिन इससे उस इंसान कोई फर्क नहीं पड़ता,
_ क्योंकि अब वो आपके साथ वैसे नहीं, जैसे कभी हुआ करता था…!
वो लोग जो हमें उम्मीदें देकर करीब लाते हैं, वही जब अचानक परायेपन का एहसास कराने लगते हैं, तो उन उम्मीदों का टूटना स्वाभाविक है..

_ दिल भी वहीं आहत होता है, जहाँ उसने सबसे ज्यादा भरोसा किया हो,
_ पर सच्चाई ये है कि इससे उस इंसान को कोई फर्क नहीं पड़ता,
_ क्योंकि अब वो पहले जैसा.. आपके साथ होता ही नहीं…!
पहले उम्मीद खत्म होती है, फिर शिकायतें खत्म हो जाती है.

_ उसके बाद खोने और पाने का मोह भी खत्म हो जाता है..
_ फिर कुछ नही बचता न रिश्ता, न किसी प्रकार का संबंध.. सबकुछ खत्म हो जाता है.!!
अक्सर हम जैसा सोचते हैं वैसा होता नही, लेकिन कई बार सच्चाई ये भी होती है कि जिस चीज़ की उम्मीद हम करते हैं, उसके लिए हम खुद कोई कोशिश नहीं करते..

_ हम सिर्फ कल्पनाओं में परिणाम ढूँढते रहते हैं, जबकि कुछ चीज़ें सिर्फ चाहने से नहीं, लगातार प्रयास करने से हासिल होती हैं.!!
इंसानों से उम्मीद लगाना, रेगिस्तान में मछली पकड़ने जैसा है ;
_ आपको न मछली मिलेगी, न पानी, बस धूप मिलेगी.!!
मैंने जीना सीखा है.. उस सच्चाई के साथ.. जिसे लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं..

_ कि हर मुस्कुराहट के पीछे एक थकान होती है, हर मजबूती के पीछे कोई टूटा हुआ पल..
_ लोग कहते हैं उम्मीद ज़िंदा रखती है, पर मुझे तो लगता है उम्मीदें ही सबसे ज़्यादा तोड़ती हैं और मौत…?
_ वो तो बस एक विराम है इस लंबे असहनीय वाक्य का, जो जीवन कहलाता है अब ना डर बचा है, ना इनकार..
_ बस एक शांति है उस अनजाने अंधेरे के प्रति जिसे मैंने अपना कह दिया है…!
भरोसा ओर उम्मीद जीवन सही तरीक़े से बिताने के साधन हैं, पर कुछ लोग इसका दुरूपयोग अपने स्वार्थ के लिए करते हैं ना तो वो किसी के मन की व्यथा को समझते हैं, और ना ही उन्हें उनकी वजह से हुए परिणाम की फ़िक्र होती है..!
कई बार मीलों का सफर तय करने के बाद यह लगता है कि हमें इस सफर में होना ही नहीं चाहिए था…!

_ कभी-कभी लगता है हमारा जन्म हुआ ही इसलिए है ताकि हम औरों की उम्मीदों पर खरे उतर सकें..
_ औरों के सपने साकार कर सकें और औरों की इज़्ज़त बढ़ा सकें.!!
उम्मीद खुद से रखो, इंसान कब बदल जाए पता नहीं..!
_ जीवन में किसी के सहारे मत रहो, लोग ऐसी जगह साथ छोड़ेंगे कि आप यकीन भी नहीं कर पाओगे.!!
ज़िंदगी ऐसी ही है —
थोड़ी सी हँसी, थोड़ा सा संघर्ष, और बहुत सारी उम्मीद..
_ जो चलना नहीं छोड़ता, वही सबसे अलग नज़र आता है.!!
जब इंसान उम्मीद खो देता है, तब वो लड़ना छोड़ देता है शिकायत करना बंद कर देता है, कि चीज़ें ठीक हो सकती हैं, कोई सुन लेगा, कुछ बदल जाएगा..
_ पर जब वो विश्वास ही नहीं बचता कि कुछ बदलेगा, तब शिकायत भी चुप हो जाती है और यही चुप्पी पता नहीं कैसी होती है…!
“अब कोई उम्मीद नहीं है इस जमाने से..

सब छोड़ जाते हैं किसी ना किसी बहाने से..”
हमारा एक बड़ा जीवन परेशानियों और निराशा मे बीत जाता है..
– इसका एक बड़ा कारण उम्मीदें होती हैं..
– कुछ उम्मीदें हम खुद से पाले होते हैं और कुछ उम्मीदें हम दूसरों से रखते हैं..
– ज़्यादातर आपको यही समझाया जाएगा कि दूसरों से उम्मीदें न पालो, ये दुखदाई होता है,
– लेकिन मनुष्य होकर ऐसा लगभग असंभव है कि आप दूसरों से उम्मीदें न पालें.
– हर पल आपके आस पास आपके रिश्तेदार, मित्र, जीवनसाथी इत्यादि होते हैं और उनमे से कोई न कोई आपसे उम्मीदें या आप उनसे उम्मीदें रखते ही हैं.
– उम्मीदें रक्खे बिना जीवन संभव ही नहीं है.!!
_ तो उम्मीदें रखना दुखदाई होगा और उम्मीदें रक्खे बिना जी भी नहीं सकते..
_ तो ऐसे मे कोशिश ये कर सकते हैं कि अधिकतर उम्मीदें स्वयं से रक्खें न कि अन्य आस पास के लोगों से..
_ दुख समाप्त तो नहीं होंगे लेकिन कुछ कम अवश्य हो जाएंगे..
_ ऐसा कोई भी काम.. जो आप दूसरों से expect करते हैं.. उसको सोच कर देखें कि यदि वो आप स्वयं कर लेंगे तो क्या ज्यादा बेहतर नहीं होगा..
_ और यदि आपसे नहीं हो सकता तो क्या आप उस कार्य के न होने पर भी एडजस्ट कर सकते हैं.
_ उम्मीदें थोड़ी थोड़ी करके कम करते जाने से थोड़ा अकेलापन लग सकता है लेकिन जीवन एकदम सही हो जाएगा.!!
_ यदि जीवन में इंसान की आवश्यकता सीमित हो और किसी अन्य से कोई उम्मीद और अपेछा न करे तो बेहद _ खुश जीवन आराम से जीया जा सकता है..!!
–उसे कोई कैसे दुखी कर सकता है, जिसकी किसी से कोई उम्मीद ही ना हो !!
सालों से जिस कल्पना को सच होते देखने का इंतज़ार हो, जब आखिरकार उसे एक तारीख मिल जाए और फिर उस तारीख से ठीक एक दिन पहले तारीख आगे बढ़ा दी जाए, तो इंसान पर क्या गुजरती है, इसका अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है,

_ कभी-कभी तारीख सिर्फ आगे नहीं बढ़ती, उसके साथ किसी की वर्षों पुरानी उम्मीद भी कुछ और दिनों के लिए टल जाती है.!!
– Nirarthak Nirarthak
कुछ लोग मुझसे इसलिए उम्मीद रखते हैं..

_ क्योंकि उन्हें लगता है कि जब तक मैं उनके साथ खड़ा हूँ, जो भी निर्णय लूँगा, उनकी भलाई को ध्यान में रखकर ही लूँगा.
_ यह भरोसा मेरे लिए सिर्फ उम्मीद नहीं, एक जिम्मेदारी है.
_ हर जगह कुछ अपवाद जरूर होते हैं, लेकिन विश्वास करने वालों का भरोसा टूटे नहीं, यही कोशिश रहती है.!
– Nirarthak Nirarthak
किसी भी चीज़ की योजना बनाने में महीनों हफ्तों लग जाते हैं.

_ उसके पीछे बहुत सोच, उम्मीद और मेहनत होती है.
_ लेकिन कई बार पूरी योजना सिर्फ किसी के एक ना कह देने से पलभर में खारिज हो जाती है.
_ तब समझ आता है कि योजना बनाना जितना आसान लगता है, उसे हकीकत में बदलना उतना ही मुश्किल है.!!
– Nirarthak Nirarthak
अच्छा लगता है जब टूटी-फूटी ज़िंदगी में, कोई छोटा सा सुकून का टुकड़ा मिल जाए..

_ जब हालात खस्ता हों, और सबकुछ संभालने की ताक़त न बची हो, तब भी कोई उम्मीद की किरण मन को धीरे से थाम ले..
_ कभी-कभी ये छोटे-छोटे पल बिखरे हुए इंसान को फिर से जीने का हौसला दे जाते हैं.!!
– Nirarthak Nirarthak
“उम्मीद का दिया”

_ एक घर मे पांच दिए जल रहे थे, एक दिन पहले दिए ने कहा – ‘इतना जलकर भी मेरी रोशनी की लोगो को कोई कदर नही है तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं ‘ और वह दीया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया.
_ जानते है वह दिया कौन था ? वह दीया था उत्साह का प्रतीक.
_ यह देख दूसरा दीया जो शांति का प्रतीक था, कहने लगा, मुझे भी बुझ जाना चाहिए… निरंतर शांति की रोशनी देने के बावजूद भी लोग हिंसा कर रहे है और शांति का दीया बुझ गया.
_ उत्साह और शांति के दीये बुझने के बाद, जो तीसरा दीया हिम्मत का था, वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया.
_ उत्साह, शांति और अब हिम्मत के न रहने पर चौथे दीए ने बुझना ही उचित समझा.
_चौथा दीया समृद्धि का प्रतीक था,, सभी दीए बुझने के बाद केवल पांचवां दीया अकेला ही जल रहा था.
_ हालांकि पांचवां दीया सबसे छोटा था.. मगर फिर भी वह निरंतर जल रहा था.
_ तब उस घर मे एक लड़के ने प्रवेश किया, उसने देखा कि उस घर मे सिर्फ एक ही दीया जल रहा है, वह खुशी से झूम उठा … चार दीए बुझने की वजह से वह दुखी नही हुआ बल्कि खुश हुआ, यह सोचकर कि कम से कम एक दीया तो जल रहा है.
_ उसने तुरंत पांचवां दीया उठाया और बाकी के चार दीए फिर से जला दिए.
_ जानते है वह पांचवां अनोखा दीया कौन सा था ? वह था उम्मीद का दीया ..
_ इसलिए अपने घर मे अपने मन मे हमेशा उम्मीद का दीया जलाए रखिये.
_ चाहे सब दीए बुझ जाए, लेकिन उम्मीद का दीया नही बुझना चाहिए.
_ ये एक ही दीया काफी है बाकी सब दीयों को जलाने के लिए ….
_ क्योंकि हमारे आज में जो उम्मीद जगती है.. वही उम्मीद हमारे भविष्य का निर्माण करती है.!!
– Neha Chandra

सुविचार – शिक्षा – 114

शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है, एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है.
जब आप सबकुछ गवा बैठे तो _ उससे प्राप्त शिक्षा को न गंवाएं.
” हमारे जीवन में जितनी आवश्यकता धन की है,उतनी ही शिक्षा का होना भी आवश्यक है ताकि हम अपने जीवन को बेहतर तरीके से जी सकें, सकारात्मक व लोकहित के कार्य कर सकें ….

_ सार, यह है कि जीवन के लिए दोनों महत्वपूर्ण है.!!

सुविचार – जोखिम – रिस्क – Risk – 113

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सीख कहीं से भी हासिल की जा सकती है, बशर्ते कि हम अपने मस्तिष्क के दरवाजों को खुला रखें.
सोचना आसान होता है, कर्म करना कठिन होता है, लेकिन सबसे कठिन कार्य अपनी सोच के अनुसार काम करना होता है.
अगर आप रिस्क उठाना नहीं जानते हो तो आप हमेशा किसी ऐसे व्यक्ति के लिए नौकरी करते रहोगे, जो रिस्क उठाना जानता है.!!
जो लोग जल्दी शुरुआत करते हैं, शायद वे बस किसी बनी बनाई राह पर चल रहे होते हैं.

_ जो आप अपना रास्ता खुद बना रहे हैं, उन्हें जोखिम और साहस रखना होगा.
_ देर से शुरुआत करने वाला व्यक्ति जीवन में पीछे नहीं रह जाता.
_ आप बस देर से जागे हैं – और स्वेच्छा से जागना जबरदस्ती शुरू करने से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है.!!
जिन्दगी के हर कदम में, हर छन में कोई न कोई खतरा होगा, कोई न कोई जोखिम होगा, जो जोखिम का सामना कर सकता है.. उसी को विजय मिला करती है.
अपने जीवन में जोखिम उठाएं ; यदि आप जीतते हैं, तो आप नेतृत्व कर सकते हैं ; _यदि आप हार जाते हैं तो आप मार्गदर्शन कर सकते हैं.

Take a risk in your life. If you win, you can lead. If you lose you can guide.

यदि आप सामान्य जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं, तो आपको सामान्य से समझौता करना होगा.

If you are not willing to risk the usual, you will have to settle for the ordinary.

बड़ी सफलता के लिए, आपको कभी-कभी बड़े जोखिम उठाने पड़ते हैं,

_ रिस्क लो या फिर अवसर गंवाओ..!

To achieve great success, you sometimes have to take big risks,_ Take the risk or lose the opportunity..!

सुविचार – सोशल मीडिया – Social Media – मोबाइल – Mobile – 112

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“OTP – आजकल भरोसा भी number से verify होता है.”
पर्सनल समस्याओं के लिए व्यक्तिगत समाधान की आवश्यकता है..

_न कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने लिए,,!!

“टेक्नोलॉजी के इस जमाने में आज ज्ञान उंगली के टिप पर है.
_ फिर भी जो पीछे है, – कहीं न कहीं उनका ध्यान ही बिखरा हुआ है”
मोबाइल ने सब कुछ जेब में दे दिया, और जेब से ही सब कुछ छीन लिया.
_ इसने दूरी तो खत्म कर दी, पर नजदीकी भी खत्म कर दी.!!
सोशल मीडिया के दौर में अपनी बात कहना आसान हो गया है.

_ बात को कहने और और बात करने में अंतर है.
_ बोलने से ज्यादा मायने रखता है सुनना.
__ सुनना, समझना और बोलना बात करने के जरूरी हिस्से हैं.
_ कई बार बिना शब्द बोले भी बात होती है.
__ भावनाओं को समझना, अनकही बातों को सुनना, बिना बोले भी साथ होने और समझने का अहसास करा पाना भी बात करने का एक खूबसूरत तरीका होता है.
_शायद सबसे खुबसूरत तरीका..
_ अच्छे से बात करना तमाम अवसादों का उपचार है.
_ बात करना सकारात्मकता का संचार है.
_ बात करिए, अपने लिए, किसी अपने के लिए, बेहतर समाज के लिए, इंसानियत के लिए.
जाओ, नकारात्मक लोगों को हटा दो, जो उन्होंने आपके साथ बुरा किया उसके बाद उन्हें भूल जाओ, अपनी मन की शांति और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए उन्हें अनदेखा करें,

_ अगर आपको जरूरत हो तो उन्हें अपने सोशल मीडिया (ओं) में ब्लॉक करें, और उन्हें इतनी बुरी तरह खुश न करें; कभी भीख मत मांग यह भी याद रखें: सब कुछ फिक्सिंग के लायक नहीं है.
_ इसके बजाय, इसे एक ताकत के रूप में करें- अपने आप को एक अंधेरे स्थान / स्थिति से बाहर निकालो जब दूसरे को आपके लिए वहां होना चाहिए था.
_ आत्म देखभाल या आत्म सम्मान के रूप में संबंधों को काटना सबसे अच्छी भावनाओं / निर्णयों में से एक है.
अपनी हर बात सोशल मीडिया [Social Media] पर साझा नहीं करना चाहिए.

_ हर पल को दुनिया के सामने रखना जीवन नहीं है.
_ कुछ यादें जितनी निजी रहती हैं उतनी ही सुंदर और सच्ची होती हैं
_ जो लोग अपनी खुशी को केवल लाइक और तारीफ से नहीं जोड़ते, वही वास्तव में संतुलित जीवन जीते हैं.!!
वो बुद्धिमान हैं जिन्होंने सोशल मीडिया का उपयोग अच्छा लिखने-पढ़ने में किया है,

_ वरना जाने कितने ही रील्स देखने में ही रह गए.!!

हम अपनी ज़िंदगी सिर्फ़ सामाजिक पहचान [सोशल रिकॉग्निशन] की वजह से जी रहे हैं..

_ बस आभासी फ्रेंड्स सोशल मीडिया पर, जिनके होने का कोई औचित्य भी नहीं शायद.!!
लोग फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर हलचल मचाते हैं और वाहवाही चाहते हैं,
_ लेकिन खुद धन्यवाद लिखना तक नहीं सीखते.!!
वे लोग जो हमें पसंद नहीं करते, वे किसी भी हालत में हमारी किसी भी पोस्ट को लाइक नहीं करेंगे, चाहे पोस्ट उन्हें कितनी भी पसंद आई हो.
जरूरी नहीं जो लोग दुनिया के सामने खुश दिखाई दे रहे हैं, वह खुश ही हैं.

_ अपने आसपास के लोगों का ख्याल रखिए,
_ खासकर उन लोगों का जो सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा खुश दिखाई दे रहे हों..
_ ऐसे शो कर रहे हो जैसे कि उनके जीवन में कोई प्राब्लम ही नहीं..!!
_ प्राब्लम होना प्राब्लम नहीं है, जीवन है तो दुःख तो होगा ही.. यह बहुत ही सामान्य है,
_ लेकिन उस दुःख को जाहिर नहीं कर पाना असामान्य है..!!
डिजिटल क्रांति के इस दौर में मोबाइल फोन हमारे जीने के तरीके को क्रांतिकारी ढंग से बदल रहा है.

_ कुछ लोग इसका फायदा उठा नॉलेज से संचालित और आनंद से भरा जीवन जीने की दिशा में बढ़ रहे हैं,
_ जबकि अधिकांश का अपने दिमाग पर नियंत्रण खत्म हो रहा है.
_ वे डोपामीन की ऐसी लत का शिकार बनते जा रहे हैं, जिसके बारे में उन्हें खुद कोई अहसास नहीं..
_ क्योंकि उन्हें लगता है कि वे तो जिंदगी का मजा लेते हुए जी रहे हैं.
_ मोबाइल उन्हीं के लिए शक्तिशाली है, जो उससे नॉलेज लेते हैं.
_ मनोरंजन करने वालों के लिए वह असल में और भी घातक हो गया है.
स्मार्टनेस के इस महान युग में मानवीय श्रम लगातार कम हो रहा है..

_ परिणामतः व्यस्तता कम हो रही है, खालीपन बढ़ रहा है.
_ जिसकी वजह से सभी में धीरे धीरे ही सही मानसिक और शारीरिक परिवर्तन हो रहे हैं.
_ चौबीस घंटे का बड़ा भाग आजकल इंटरनेट के विभिन्न माध्यमों पे गुजर रहा है.
_ अब ये इंटरनेट हमारी आदत बन चुका है.
_ समय व्यतीत करना एक बड़ी समस्या है,
_ वर्तमान में किसी को इसका हल नहीं सूझ रहा है,
_ आपस में मिलना-जुलना, आना-जाना, चर्चा-परिचर्चा, आपसी संवाद और मेहमाननवाजी सब खत्म हो गया है.
_ परस्परता सामाजिकता भाईचारे में बहुत तेजी से कमी आई है,
_ भुगतान हमे हमारे बच्चों को अकेले रहकर करना पड़ रहा है.
_ अकेलेपन को खत्म करने के लिए लोगों को सिर्फ इंटरनेट ही दिखता है.
रिश्तें को जमाने से जितना आप छुपाकर रखोगे उतना ही अच्छा है,

_ वरना आजकल पता नहीं चलता कब, कौन, किस तरीके से आपका घर उजाड़ दे,
_ यहां सुंदर रिश्तें को तोड़ने में दो मिनट नहीं लगता,
_ लोग अपनी ख़ुद की जिंदगी संभाल नहीं पा रहे हैं,
_ ईर्ष्या भाव के कारण वो दूसरो की जिंदगी बर्बाद करने में तुले हुए हैं, इसलिए बचकर रहिए.
_ रिश्तों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में ज्यादा शो ऑफ ना करें..!!
मैंने इस आभासी दुनिया [Social Media] में कई तरह के लोगों को देखा है, यहाँ अधिकतर चेहरों पर बुराई, स्वार्थ, ढोंग और स्वार्थी मुस्कान छाई रहती है.

_ लेकिन इन भीड़-भाड़ वाली अंधेरी दुनियाओं में कुछ ऐसे लोग भी हैं.. जो बिना शोर मचाए अच्छे हैं, और सिर्फ अच्छे ही नहीं, वे बहुत अच्छे हैं.!!
फैशन के चक्कर में लोग क्या क्या करते हैं.

_ खुद की जान से खिलवाड़ करने लगे हैं लोग..
_ एक फोटो और रील के चक्कर में अपनी पूरी लाइफ की रील बर्बाद कर रहे हैं.!!
इस आभासी दुनिया में किसी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ना आसान है,

लेकिन उन रिश्तों को निभाना शायद अब मुश्किल हो गया है..
_ पहले लोग दिल से जुड़ते थे, अब स्क्रीन से जुड़ते हैं..
_ और जब बोर हो जाते हैं तो दूरी बना लेते हैं..
_ और फिर उसी इंसान को बदनाम करने में भी नहीं हिचकिचाते..
_ समझ नहीं आता लोग इतने निचले स्तर पर कैसे पहुँच जाते हैं.!!
खुद से दोबारा जुड़ें !

_ अपने फ़ोन को एयरप्लेन मोड पर रखें ! किसी दिन इसे आज़माएँ: उन सभी चीज़ों को बंद कर दें.. जिनमें आप डिजिटल रूप से व्यस्त रहते हैं.
_ असल दुनिया में चलकर देखिए —
_ लोगों से मिलिए, हवा में साँस लीजिए, धूप में बैठिए, किसी नई आदत को जगह दीजिए.
_ आप पाएँगे कि खुद से जुड़ाव स्क्रीन पर नहीं, हकीकत के ज़रिए महसूस किए जाते हैं, और खुद से जुड़ाव उनमें से एक है.
खुद से दोबारा जुड़ें..!
कभी सोशल मीडिया मन की हर बात कह देने की जगह लगता था..

_ अब वही जगह खाली-सी महसूस होती है.. ना वे लोग दिखते हैं, ना ये दुनिया पहले जैसी लगती है..
_ मन इससे ऊब चुका है, अक्सर सोचता हूँ, यहाँ वक्त क्यों गँवाते हैं..
_ फिर भी किसी एक-दो शख़्स की ख़ातिर इसे पूरी तरह छोड़ नहीं पाते.!!
अपने व्यक्तिगत जीवन [Personal Life] को निजी रखें.

1. सोशल मीडिया पर अपनी खुश शादी का विज्ञापन न करें.
2. सोशल मीडिया पर अपने बच्चों की उपलब्धियों का विज्ञापन न करें.
3. सोशल मीडिया पर अपनी महंगी खरीददारी का विज्ञापन न करें.
वास्तविकता यह है.. हर कोई आपके लिए खुश नहीं होने वाला है.
4. आपके द्वारा प्राप्त अधिकांश “अच्छी” टिप्पणियां सिर्फ नकली हैं.
बुरी नजर ही लगेगी आप को और आपके परिवार को.. आप अपने जीवन में ईर्ष्यालु लोगों को आकर्षित कर रहे हैं.
5. आप नहीं जानते कि कौन आपकी तस्वीरों को सेव कर रहा है और आपके अपडेट की जाँच कर रहा है.
6. आपको वास्तव में इसे रोकने की जरूरत है, क्योंकि यह आपके जीवन, परिवार, शादी और कैरियर को बर्बाद कर सकता है.
सोशल मीडिया [Social Media] शैतान की आँखें, कान और मुंह है, शैतान के जाल में मत आना.
अपने निजी जीवन को निजी रहने दो.!!
कोई भी उतना सफल नहीं है _जितना इंस्टाग्राम उन्हें दिखाता है _और कोई भी उतना सुंदर नहीं है _जितना फोटो उन्हें दिखाते हैं.!!!

_और, किसी को भी हर दिन या हर हफ्ते अपनी तस्वीरें पोस्ट नहीं करनी चाहिए ; _जीवन में करने के लिए और भी महत्वपूर्ण काम हैं !
_यह हमेशा मायने नहीं रखता कि _”आप कैसे दिखते हैं”
_आप कैसे कार्य करते हैं _यह कहीं अधिक महत्वपूर्ण है !
_दूसरों का ध्यान _अपनी और आकर्षित किए बिना _अपना जीवन जिएं.”
मोबाइल की सबसे बड़ी देन क्या है ?

_ कभी इस बात पर विचार किया है ?
_ मोबाइल की सबसे बड़ी देन है टेंशन.
_ कोई हजार किलोमीटर दूर रह कर कमा रहा है.
_ घर से फ़ोन आता है बच्चे की अंगुली को चोट लग गई.
_ आज गाय ने दूध नही दिया.
_ आज आपकी माँ ने मुझे खरी खोटी सुनाई.
_ एक स्टेट्स लगा कर सौ जनो का एक साथ दिमाग खराब कर दो.
_ एक सोसल मीडिया पोस्ट डाल कर हजारों लोगों का एक साथ दिमाग खराब कर दो. _ रिश्तों मे धोख़ा ज्यादा होना भी मोबाइल की देन है.
_ रिश्ते टूटने का एक प्रमुख कारण भी मोबाइल है.
_ दो मिनिट मे सारी खबर रिश्तेदारों तक पहुँच जाती है.
_ जब मोबाइल नही था.. सचमुच मे टेंशन बहुत कम थी.!!
हमेशा अपने मोबाइल पर ही न बिज़ी रहें. जब परिवार के साथ हों या वॉक वगैरह पर जाएं, तो बेहतर होगा कि मोबाइल स्विच ऑफ कर दें.
अगर आप पड़े-पड़े बोर हो रहे या आपको लगता है कि मनोरंजन का साधन बस मोबाइल है तो आप गलत जीवन जी रहे,

_ इस आभासी दुनिया से निकलिए.. अपने मित्र यार रिश्तेदार परिवार के साथ थोड़ा वक्त बिताइए,
_ नए जगह पर जाइए प्रकृति से जुड़िए नदी तालाब के पास बैठिये, जानवरों पंछी के साथ खेलिए, फूलो को निहारिये,
_ आप देखेंगे कि आपको अच्छा महसूस होगा.!!
– Text Finger
📱 मोबाइल से दूर होने का अर्थ “मोबाइल छोड़ना” नहीं है,

_ बल्की उसका असंग रहकर उपयोग करना है.
🔍 Mobile: एक साधन है, साथी नहीं..
Mobile: अगर आपको जीवन से जोड़ने के लिए हो – जैसे सत्संग, विचार, अंतर-यात्रा — तो वो एक साधना का माध्यम बन जाता है.
_ लेकिन अगर मोबाइल आपका हंगामा, तुलना और तनाव में ले जाये —
तो वो ही साधन विघ्न बन जाता है.
✨:> मोबाइल एक दीपक बन जाता है – जब आप उसका उपयोग ज्ञान और शांति के लिए करते हैं.
_ आप उस दीपक के रोशनी में खुद को देख रहे हैं – इससे सुंदर क्या हो सकता है ?
📿 “साधन से आसक्ति नहीं, समर्पण चाहिए – चाहे वो मोबाइल हो या मंत्र”
आप मोबाइल से जीवन से जुड़ रहे हैं —
यह समझना और विवेक के साथ जीना ही डिजिटल स्लो लाइफ [digital slow life] है.!!
‘समाधान करिए’

“सुविधाजनक मोबाइल का सुरक्षात्मक उपयोग हो”
Have protective use of convenient mobile.
_ देखा जाय तो तकनीक [technology] अलादीन के चिराग की तरह है.
_ जिसके कारण महीनों का काम दिनों में होता है और घंटों का काम सेकंडों में..
_ वरना इसके बिना, जिन कामों को मात्र एक चुटकी में हो जाना था, उनमें इंसान पूरे-पूरे दिन लगा रहता था.
_ जिस कारण उसे कहीं घूमने, लोगों से मिलने या फुरसत के पल बिताने का समय ही नहीं मिलता था.
_ जब तक हमें तकनीक [technology] की सुविधा नहीं मिली थी, हम सोचते थे कि यदि हमें कोई ऐसा यंत्र मिल जाये जिससे हम इस एक काम को जल्दी-से-जल्दी कर लें तो कितना अच्छा हो,
_ तब हम बचे हुए समय में अपने अन्य बचे हुए कार्य कर सकेंगे.
_ और आज, हमें (जिन्हें) तकनीक [technology] की इतनी सुविधा मिल गई है कि अब हमारे पास, हमारे दादा-परदादा के मुक़ाबले काफी वक्त होता है.
_ अब हमारी सारी ज़रूरते तकनीक [technology] पूरी कर रहा है, और हम ?
_ हम इस बचे हुए समय का सदुपयोग कैसे करें ?
_ तो जहाँ हम कुछ अन्य ज़रूरी काम कर सकते थे, लेकिन नहीं करते.
_ अब उस समय को हम सिर्फ़ मनोरंजन में खर्च करते हैं.
_ कहते हैं न !! कि हासिल की गई वस्तुओं की फिर कद्र नहीं रहती.
_ और उन्हीं बेकद्र चीजों में एक नाम है मोबाइल/कम्प्यूटर का.
— मोबाइल जब हाथ में आया, लगा दुनिया मुट्ठी में आ गई है.
_ उफ ! कितना ज्ञान है इसमें, कितना हुनर भी, हाँ मनोरंजन भी.
_ कितना सगा सा, दोस्त सा, माता-पिता सा, गुरू सा, प्रेमी सा.
_ लेकिन नहीं, ये हमारे लिए ऐसा नहीं है.
_ ये हमारे लिए बंदर के हाथ लगे उस्तरे सा है.
_ जिससे हम स्वयम् को ही घायल कर ले रहे हैं,
_ क्योंकि हमारे पास इसके सही उपयोग की जानकारी नहीं है या फिर है भी तो,
_ हमें इसके दुरूपयोग के भयावह परिणाम का अंदाज़ा नहीं है.
_ ये किसी दीमक सा हमें अंदर से खोखला कर रहा है.
— मोबाइल
_ जिससे हम ज्ञान पा सकते हैं, नई भाषा सीख सकते हैं, कला सीख सकते हैं, _ आधुनिक उपकरणों को उपयोग में कैसे लायें ?
_ घरेलू कामों को कम समय में कैसे करें ? इसकी जानकारी पा सकते हैं.
_ जिससे कुछ रचनात्मकता सीख सकते हैं.
_ खेल सीख सकते हैं.
_ कठिन प्रश्नों के उत्तर पा सकते हैं.
_ योग, संगीत, पाककला, हस्तकला, चित्रकला आदि सीखकर अपने व्यक्तित्व में निखार ला सकते हैं.
_ वैसा नहीं करके, हम क्या करते हैं ?
हम सीखते हैं –
_ दूसरों की ज़िन्दगी में झांकना, किसी को बदनाम करना, और सबसे ज्यादा ऑनलाइन वीडियोगेम खेलना.
_ और फिर इतने आदी हो गये कि इस लत के कारण समय पर अपनी दैनिक दिनचर्या तक भूल गये.
_ परिवार, समाज से कट गये, शिक्षा या घर के कामों से मन हट गया.
_ शारीरिक रूप से पंगु बन गये.
_ साथ ही -मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन, बेचैनी मुफ्त में.
_ इसके अलावा अनिद्रा, मानसिक तनाव, कमजोर याददाश्त, कॉग्निटिव क्षमताओं का घटना, मायोपिया (दूर की नज़र कमजोर), इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरणों से हड्डियों में मौजूद मिनरल लिक्विड का समाप्त होना.
_ आर एफ विकिरण से ब्रेन ट्यूमर, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, ह्रदयरोग, कोशिकाओं में तनाव, आँखों में सूखापन, कंधे, गर्दन, सिर में दर्द आदि.
— वर्तमान समय में कम्प्यूटर व मोबाइल न सिर्फ़ जीवन का अंग बन गये हैं, बल्कि कई लोगों की जीविका भी इस पर निर्भर है.
_ इसलिए पूरी तरह से तो इस तकनीक का त्याग नहीं किया जा सकता है.
_ हाँ लेकिन संयम और समझदारी से इसका सीमित और सकारात्मक उपयोग ज़रूर किया जा सकता है.
— सबसे पहले तो – मोबाइल में समय निर्धारित करना चाहिए.
_ इसके साथ ही – कुछ अतिरिक्त गतिविधियों को अपने व्यवहार में शामिल कर उनकी आदत बनानी चाहिए.
_ जैसे – सुबह जल्दी उठकर प्रकृति के सानिध्य में रहना.
_ स्कूल या ऑफिस के बाद बचे हुए समय में कोई नई गतिविधि सीखना.
_ खेलना, लोगों से मिलना, अच्छे मित्र बनाना, डायरी लिखना आदि.
_ समाज, देश, दुनिया को जानने-समझने के लिए कुछ नया पढ़ना या देखना-सुनना.
_ ताकि मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्परिणाम से बचा जा सके.
_ याद रखिये, हमारी सुरक्षा सबसे पहले हमारे हाथ है, सरकार, प्रशासन बाद में.
_ इसलिए उपर्युक्त समस्याओं से बचने के लिए कोई निबंध काम नहीं आएगा,
_ तो समाधान यही है.
सिर्फ़ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना इंसानों के लिए अच्छी बात नहीं है.

_ मनुष्य सामाजिक प्राणी हैं, जानवरों से अलग, क्योंकि खाने-पीने और सोने के अलावा, वे अपने आस-पास के लोगों के व्यवहार से भी प्रभावित होते हैं.
_ इसके पास एक ऐसा मस्तिष्क है जो इसे सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से सोचने, अपने जीवन को बेहतर बनाने और उसे बर्बाद करने की क्षमता देता है.
_ लोगों से मिलना, यात्रा करना और लंबे समय तक एक ही जगह पर अकेले रहने से बचना अवसाद को कम करता है.
_ अगर आपको अजीब सा महसूस होने लगे तो उस जगह से थोड़ी देर के लिए हट जाएं, आपकी ऊर्जा बदल जाएगी और आपके विचार भी बदल जाएंगे,
_ इसलिए जब भी आपके मन में अजीब से विचार आएं तो अपनी जगह बदलने की कोशिश करें.!!
कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए … आपके दिमाग को मन्त्रमुग्ध करने के लिए हजारो अलग- अलग तरीके अपनाती है.

_ अपने आप को भीतर तक हम ना देख और झाँक सके _ उसके लिए दुनिया भर में सिस्टम बना हुआ है.
_ पूरी प्रणाली आपको आपके अंतर्ज्ञान से अलग करने के लिए डिज़ाइन की गई है. क्यों ?
_ डिस्कनेक्ट किए गए लोगों में हेरफेर करना आसान है.
_ टीवी, मूवी, मिडिया, पैसा, गाडी, मनोरंजन, इंटरनेट और अब वायरल होते रील, पोस्ट.
_ हम कब उस ” रील ” के दबोचे में रियल लाइफ के अपने खुद के वजूद से दूर हो गए और अब खुद के लिए ना वक्त रहा /ना वक्त रहेगा.
_ वक्त किसी और के सुपुर्द कर दिया है हमने ; Like, Share और subcribe के उफान ने उस प्रतिबिम्ब को मिटा दिया है जिसे “जीवन” कहा करते थे..
_ तकनीक अपने शबाब पर है और हम अपने चकनाचूर होने के कगार पर.
_ कई चीजे है दुनिया में जो महत्वपूर्ण हैं अब भी !
_ वायरल होना सबसे आसान है—‘सरल होना’ सबसे कठीन.
_ रियल लाइफ की जो चीज बिकी नही है उसे बस थामे रहिए.
_ बिक चुकी है तो वापस लीजिये… इत्ता दूर क्यो जाना ? !!
_ अपने जीवन का खुद ही मांझी बनिए ; तो जीवन ठीकठाक जगह में होगा.
_ मुझे लगता है..
जीवन की सच्चाइयों को ज़्यादातर इंसानों ने कब का छोड़ दिया है ; इसीलिए, सबकुछ आभासी प्रतीत होता है,
_ लेकिन जैसे-जैसे हम उस वास्तविकता की दुनिया में प्रवेश करते जाते हैं, धुंध छटने लगती है, जीवन में स्पष्टता आती जाती है.
_ यह पता चलता है कि हमें रुकना और ठहरना कहां है ;
_ हम इंसान सिर्फ़ भागने के लिए नहीं पैदा हुए हैं.!
मोबाइल फोन एक ऐसी घातक ताक़त है, जिसके असर को कम करके नहीं आँका जा सकता :

इसका प्रभाव इतना शक्तिशाली है कि इसने:
_ लैंडलाइन फोन को ख़त्म कर दिया…
_ टेलीविज़न को ख़त्म कर दिया…
_ कंप्यूटर को ख़त्म कर दिया…
_ घड़ी को ख़त्म कर दिया…
_ कैमरे को ख़त्म कर दिया…
_ रेडियो को ख़त्म कर दिया…
_ टॉर्च को ख़त्म कर दिया…
_ आईने को ख़त्म कर दिया…
_ अख़बारों, पत्रिकाओं और किताबों को ख़त्म कर दिया…
_ वीडियो गेम को ख़त्म कर दिया…
_ बटुए को ख़त्म कर दिया…
_ डेस्क कैलेंडर और नोटपैड को ख़त्म कर दिया…
और सबसे बुरी बात यह है कि इसने :
_ जज़्बे और ख़ुशी को ख़त्म कर दिया…
_ उत्साह और उमंग को ख़त्म कर दिया…
_ तड़प और मिलने की चाहत को ख़त्म कर दिया…
_ कई शादियाँ ख़त्म कर दीं…
_ कई परिवारों और उनमें मौजूद आपसी गर्मजोशी व मोहब्बत को ख़त्म कर दिया…
_ सड़कों पर गाड़ी चलाने वाले और उनमें सफ़र करने वाले लाखों नहीं तो सैकड़ों हज़ार लोगों को मौत, अपंगता और गंभीर चोटों का शिकार बना दिया…
_ कई छात्रों को बर्बाद कर दिया और उन्हें कामयाबी की राह से दूर कर दिया, उन्हें हवा के झोंके में उड़ते पत्ते की तरह बना दिया…
और धीरे-धीरे यह :
_ हमारी आँखों को नुकसान पहुँचा रहा है,
_ हमारी रीढ़ और गर्दन को प्रभावित कर रहा है,
_ हमारे दिमाग़ को बदल रहा है और हमारी संस्कृति को बदल रहा है.
_ और अब यह अगली पीढ़ी को मिटाने की राह पर है.
_ अगर हमने ख़ुद को न संभाला, तो यह हमारी रूहों को भी मार देगा, हमारे दिलों को सख़्त कर देगा, और आने वाली नस्लों को ऐसी जगह पहुँचा देगा जहाँ उन्हें पछतावा तो होगा, लेकिन उस समय पछतावा किसी काम नहीं आएगा.
_ इसलिए जहाँ तक मुमकिन हो, मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम किया जाए.
_ सोशल मीडिया के लिए मोबाइल के बजाय कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल बेहतर है.
_ इससे बेवजह बार-बार फोन देखने की आदत और हर वक़्त ऑनलाइन रहने का सिलसिला कुछ हद तक कम किया जा सकता है.!!
यह मेरा अनुभव है जितना मैंने इस आभासी दुनिया [virtual world] को देखा और समझा है,

_ उससे यही सीखा कि यह दुनिया भावनात्मक रूप से कमजोर लोगों के लिए नहीं बनी,
_ अगर यहाँ रहना है, तो किसी पर आँख मूँदकर विश्वास करना सबसे बड़ी भूल हो सकती है.
_ यहाँ लोग खुलेआम झूठ परोसते हैं, और उससे भी ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि लोग उसी झूठ को बड़े स्वाद से सच मानकर स्वीकार कर लेते हैं.!
AI के नाम पर सोशल मीडिया पर जो कुछ परोसा जा रहा है, वह वाकई बेहद वाहियात है,
_ तकनीक का सही उपयोग कम और बेतुके ट्रेंड ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं.!
– निरर्थक निरर्थक
हम इंसानों को अपने कहे गए अल्फाजों पर ध्यान रखना चाहिए

_ क्या पता कब कौन से शब्द हमारे जी का जंजाल न बन जाये
_ खासकर सोशल मीडिया के दौर में, जहां हमारी हर गतिविधि
कहीं न कहीं जाकर कैद होती है
_ हमारे लिखे शब्दों या कही गयी बातों का आधार बनाकर
कोई भी हमें अपने षडयंत्र का शिकार बना सकता है
_ यहां झूठे रिश्ते बनना आम बात है
_ इन झूठे रिश्तों के चक्कर में हम कब घनचक्कर बन जाये
_ ये किसी को भी पता नहीं चल सकता
_ कभी-कभी हम उन रिश्तों पर भी इतना अधिकार समझते हैं
_ जो असल में एक खोखला रिश्ता है
_ जो सिर्फ जरूरत के किये या जरूरत पूरा करने के लिए बनते हैं
_ फिर भावनाओं में बहकर बहुत कुछ कह भी जाते हैं
_ फिर जब उनको हथियार बनाकर कोई धमकी देने लगता है तो
कोई ब्लैकमेल करने लगता है
_ क्योंकि इज़्ज़त तो हर किसी को प्यारी है
_ खासकर उन इंसानों के लिए जिनके पास इज़्ज़त के सिवा कुछ भी नहीं
_ नए लोगों से भावनात्मक रिश्तें बनाने से बेहतर है कि
जो पुराने रिश्ते हैं उन्हीं को सहेजा व सम्भाला जाए
_ क्योंकि नए रिश्ते बनना हर किसी को पसंद है लेकिन
स्थिरता तो पुराने रिश्ते ही बनाएंगे,
_ जब किसी के संग धीरे धीरे रिश्ते पुराने होते हैं तो
वो स्थिरता व जटिलता खुद ब खुद आ जाती है
_ इसलिए भूल भुलैया में ना फँसकर सहज ज़िन्दगी गुज़ारे
_ अन्यथा इस चक्कर में काफी समझदार लोगों को फंसते देखा है……।।।
– हेसाम
ये कुछ लोग नहीं, कैमरे हैं..

_ जो गुप्त जगहों पर लगे हैं और हम पर नज़र रख रहे हैं.
_ आभासी दुनिया में बैठे ये कुछ लोग.. जो ज्यादातर तथाकथित अपने हैं..
सीसीटीवी कैमरों की तरह हैं,
_ कड़ी नज़र रखते हुए, हमारी कमियों को ढूँढ़ते हुए..
_ ये लोग नहीं, कैमरे हैं.!!
– तेज बीर सिंह सधर
कभी नोटिस किया है ? लोग अब खुद की सोच नहीं रखते, बस जो trend कर रहा होता है, उसे दोहराते हैं, बिना सवाल, बिना समझे। वो बोलते हैं जो सुना है, न कि जो खुद महसूस किया हो.

​_ अब content नहीं देखा जाता, बस creator कौन है, वो देखा जाता है.
_ अगर तुम A को फॉलो करते हो, तो B चाहे कुछ भी सही बोले, तुम उसे hate करोगे. _ Not because he’s wrong, but because तुमने सोचने की आदत छोड़ी है.
_ लोग अब खुद नहीं decide करते कि क्या अच्छा है और क्या नहीं.
_ वो देखना चाहते हैं कि “कितनों ने like किया है?” “comment section क्या कह रहा है ?”
_ सोशल मीडिया अब दिमाग़ चलाने की जगह नहीं रहा, ये बस echo chamber बन गया है.
_ जहां हर कोई वही बोल रहा है जो दूसरे बोल चुके हैं.
​_ किसी की मेहनत, किसी की सच्चाई, अब memes और sarcasm में दब जाती है. _ लोग अब सच जानने से ज़्यादा कुछ चुटीले lines सुनना चाहते हैं.
​_ किसी को देख कर अच्छा महसूस करने की जगह, हम comparison mode में चले जाते हैं.
_ “ये तो acting कर रहा है”, “इसका तो सब दिखावा है”
_ तुम्हें content पसंद न आए, ये ठीक है, तुम्हारा हक़ है.
_ लेकिन बिना देखे, बिना पढ़े, बिना समझे, सिर्फ trend के पीछे चलना, ये सिर्फ follower बनना है, सोचने वाला नहीं.
_ कमेंट सेक्शन अब opinion नहीं देता, वो बस emotion manipulate करता है.
_ ताकि तुम खुद की सोच बंद कर दो, और वही सोचो जो बाकी सोच रहे हैं.
_ कुछ लोग बस इस लिए बोलते हैं कि उन्हें crowd में दिखना है.
_ “देखो मैं भी वही सोचता हूँ जो तुम सोचते हो!” लेकिन ये सोच तो तुम्हारी है ही नहीं…
– Neha Chandra
सोशल मीडिया [Social Media] कभी लोगों की भावनाओं से जुड़ने का एक माध्यम हुआ करता था.

_ लोग यहाँ अपने सुख-दुख,विचार और एहसास साझा करते थे रिश्ते बनते थे, दिल की बातें कही जाती थीं और अनजान लोग भी एक-दूसरे की भावनाओं से जुड़ जाते थे.
_ लेकिन धीरे-धीरे भावनाओं से शुरू हुआ यह सफर व्यापार का रूप ले चुका है.
_ अब हर भावना के पीछे एक बाजार है, हर लोकप्रियता के पीछे एक कमाई और हर वायरल चीज के पीछे एक कारोबार खड़ा है.!!
– निरर्थक निरर्थक

सुविचार – संघर्ष – स्ट्रगल – Struggle – चुनौती – 111

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जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो, चुनौती ना हो तो आदमी खोखला ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता ! ये चुनोतियाँ ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं,

अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनोतियाँ तो स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे.

“जीवन स्ट्रगल (Struggle) नहीं, जीने के लिए था..

_ स्ट्रगल तब आता है, जब हम उसे गलत जगह से जीना शुरू कर देते हैं”

ज़िन्दगी struggle होने के लिए नहीं होती पर clarity के बिना वो स्ट्रगल बन जाती है.
कुछ लोग संघर्ष चुनते हैं, इसलिए नहीं कि उन के पास रास्ता नहीं है,

_ बल्कि इसलिए क्योंकि वो नए रास्ते तलाशना चाहते हैं ;
_ कुछ लोगों का यह साहस लाखों लोगों कि यात्रा के लिए प्रेरणास्त्रोत बनता है ;
_आपने अगर संघर्ष चुना है तो आप ख़ास हैं, बहुत ख़ास !!
संघर्ष के बिन व्यक्ति अपंग जैसा हो जाता है,

_ जीवन में कठिनाई का सामना न किया गया तो ..क्षमता से कम में ही गुजारा करना पड़ता है.
_संघर्ष के आने पर हम दुर्भाग्य मानने लगते हैं..
_ जबकि यह हमें तराशता है, परेशान नहीं..
_ कांटों भरे जीवन में सौगात के सुमन खिलाने का हुनर यूंही नही आता..!!
न हों पतझड़ तो बहारें किस काम कीं.

_ संघर्ष बिना ज़िन्दगी ये बस नाम की.
_ मुकाम पर पहुँचा तू अपने वजूद को.
_ हार जाएगा, परवाह की जो अंजाम की.!!
लोग आसान ज़िंदगी ढूँढते हैं, पर भूल जाते हैं कि संघर्ष तो सिर्फ उन खास लोगों को मिलता है जो चुनौतियों के लायक हैं.!!
परिवर्त्तन से डरना और संघर्ष से कतराना, मनुष्य की सबसे बड़ी कायरता है.
संघर्ष जब काफी लंबा हो जाता है तो बोझ बन जाता है.
लोग नकरात्मक चीज़ों की ओर जल्दी बढ़ जाते हैं.. क्योंकि तब उन्हें संघर्षपूर्ण दौर से निकलने के लिए वही आसान लगता है..
_ और सरल और सही रास्तों में से सरल रास्तों को चुनते हैं, किन्तु ये रास्ते कालान्तर में जीवन को मुश्किल बना देते हैं.. जिसका एहसास तब होता है.. जब बहुत देर हो चुकी होती है…!
“संघर्ष ही जीवन है” असली जीवन वही जिया _जिसने संघर्ष किया है ;

_जिन्दगी जीना भी एक कला है. _हर किसी को नही आती है यह कला..!!

_”सब आदतों का खेल है, कुछ आलस तो कुछ संघर्ष चुनते हैँ.”

उन सभी संघर्षों के लिए आभारी रहें जो आपने गुज़ारे हैं ; _ वे आप को मजबूत, बुद्धिमान और विनम्र बनाते हैं.

_ इसे आपको तोड़ने मत दो और इसे आप बनाने दो..!!

अभी तुम्हारे संघर्ष का समय है, अभी तुम्हे खामोश रहना है,

_ तुम्हारे लिये सब कुछ संभव है, यह तुम्हे सफलता के बाद कहना है..!!

जो कुछ भी संघर्ष के बिना आता है, वह मूल्यवान नहीं है..!!

संघर्ष इसे बताने लायक कहानी बनाता है.

ना संघर्ष खत्म होता है और ना ही शिकायतें,

_ धीरे धीरे जो खत्म हो रहा वो है उम्र.!!

समस्या यही है कि लोगों को हमारी सक्सेस या स्टेटस तो दिखता है, लेकिन उसके पीछे का संघर्ष नहीं.!!
कभी कभी संघर्ष करता हुआ व्यक्ति भी सबकी आंखों में चुभता है.!!
संघर्ष एक कालखंड [period of time] है और हर कालखंड का एक अंत है.
संघर्ष को सम्मान दीजिए, यकीन मानिए संघर्ष आपको सम्मानजनक जीवन देगा..!!
स्वयं से उलझना संघर्ष है, दूसरों में उलझना व्यर्थ है..!!
“ज़िम्मेदार बनें और परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने के लिए संघर्ष करें..!!”
“जीवन एक संघर्ष है”

_ अगर संघर्ष में खुशी ढूंढनी है तो इतनी मेहनत करो कि बदले में “तुम्हें नींद, चैन और भरपेट खाना मिल सके”
जब तक किसी के संघर्ष के दिन होते हैं कोई सहयोग नहीं करता और सफ़ल हो जाने के बाद क्रेडिट लेने सब आ जाते हैं.!!
संघर्ष में साथ देनेवाले बहुत कम लोग होते हैं..

_ लेकिन संघर्षों के बाद मिलने वाले सुख के दावेदार हर कोई बनना चाहते हैं.!!

अगर आपको लगता है कि आराम हराम है – तो समझ लीजिए कि आपको संघर्ष में ही सुकून मिलेगा.!!
दुर्भाग्य शाली हैं वे जिन्हें जन्म से सौभाग्य शाली समझा जाता है..

_ संघर्ष और पीड़ाएं ही परिमार्जित कर व्यक्ति का व्यक्तित्व बनाती है..

_ वरना जिन्हें खानदानी रूप से सब मिल जाता है ..वे खोखले ही रह जाते हैं..!!

“कुछ संघर्ष जीतने के लिए नहीं होते, वे हमें बदलने के लिए होते हैं”

_ खुद से लड़ना अत्यंत मानसिक पीड़ादायक होता है, खैर !. अंत में परिणाम चाहे जो भी हो,
_ एक बात निश्चित है इसके बाद हम कभी वैसे नहीं रहते, जैसे उससे पहले थे.!
अच्छाई की लड़ाई में परेशानियाँ आना तय है,

_ क्योंकि जब आप सच के साथ खड़े होते हैं, तो सबसे पहले झूठ और स्वार्थ ही आपके सामने खड़े होते हैं.
_ संघर्ष इस बात का प्रमाण नहीं कि आप गलत हैं, बल्कि कई बार यह इस बात का संकेत होता है कि आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं.!
जो आपके संघर्ष के अंधेरों में आपके साथ खड़ा नहीं था,

_ उसे आपकी जीत की चमक का हिस्सा बनने का कोई हक नहीं है.
_ उन्हें खामोशी से विदा करें और अपना रास्ता अलग कर लें,
_ क्योंकि नफरत का बोझ उठाकर आप अपनी अगली मंज़िल तय नहीं कर सकते.
_ अपनी सफलता का जश्न सिर्फ उनके साथ मनाएं, जो आपके बुरे वक्त में ढाल बनकर खड़े थे.!!
“जीवन में रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता, लेकिन हर मोड़ पर सीखने का एक नया अवसर छिपा होता है.

_ “सफलता केवल लक्ष्य नहीं है, बल्कि जीवन का असली अर्थ हर कदम पर छिपे संघर्ष में निहित है”
_ अपने आप पर विश्वास रखें, कठिन समय आपको मजबूत बनाएगा.
_ आगे बढ़ते रहें, क्योंकि हर नया दिन नई संभावनाएं लेकर आता है.
“जिद्दी बनिये,” हार मत मानिये.

_ अगर टूट गए तो वहाँ पहुँच जाओगे.. जहाँ से लौटना मुश्किल होता है.
_ जिंदगी जीना तालाब मे तैरना जैसा है.
_ अगर जीवित रहना है तो हाथ पैर हिलाते रहना होगा.
_ जिसने भी मुस्करा कर संघर्ष किया वो भवसागर तर गया.
_ जिसने संघर्षो से मुँह मोड़ा, उसने दुनिया छोड़ा.!!
हम सब अपनी-अपनी लड़ाइयाँ लड़ रहे हैं.

_ कोई मोहब्बत के दर्द से उबर रहा है, तो कोई बेरोज़गारी की मार झेल रहा है.
_ कोई अपनी कमाई से खुश नहीं है, तो कोई अपने परिवार को खुश नहीं रख पा रहा है,, कोई अपनी बिगड़ती सेहत से दुखी है.
_ संकट तो है पर.. यही तो जीवन का संघर्ष है..
_ लड़ते रहिए – क्योंकि लड़ना ही जीवन है.. रुकना ही मृत्यु…!
जीवन में चुनौतियों से भागने के बजाय उनका सामना करना सीखें, उनसे भागकर आप उनसे मुक्त नहीं हो सकते.

_ इससे तो आपके जीवन में चुनौती और ज्यादा आएंगी इससे अच्छा है कि चुनौती का सामना करो.!!

जीवन की सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि हर व्यक्ति अपनी जगह सही है, और असली संघर्ष सही और गलत के बीच नहीं बल्कि सही और सही के बीच ही होता है…!
हर उस बंदे से दूर रहें जो आपको ऐसा महसूस कराता हो कि ..आप उनके पैमानों पे ठीक नही बैठते, आपके विचार या बातें सही नही है,

_ क्योकि सिर्फ आप अपने हालात अपनी क्षमता, अपने संघर्ष और अपनी जीत या हार को जानते हैं,

_ आपकी सोच पे केवल आप का अधिकार होना चाहिये….

जो आपके संघर्ष में आपके साथ नहीं थे, जो आपको नज़रअंदाज़ करते थे और आपको ताने देते थे, आप अब कामयाब होने के बाद उन्हें अपनी खुशियों में भी बिल्कुल शामिल मत करना.!!
जब आप जो हो रहा है उसे नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, तो जो हो रहा है उसका जवाब देने के तरीके को नियंत्रित करने के लिए स्वयं को चुनौती दें ; वहीं आपकी शक्ति है.

When you can’t control what’s happening, challenge yourself to control the way you respond to what’s happening. That’s where your power is.

जो ठानना है, उसे हर हाल में पूरा करना बहुत ज़रूरी है..

_ रास्ते में कितनी भी मुश्किलें आएँ, लोग कितना भी रोकें या परिस्थितियाँ कितनी भी खिलाफ हों, अपने फैसले पर कायम रहना चाहिए..
_ क्योंकि दूसरों की सोच के हिसाब से जीते-जीते इंसान अपना वजूद खो देता है,
_ अपने वजूद को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है कि जो दिल और दिमाग ने ठान लिया है, उसे करके दिखाया जाए.!!
– Nirarthak Nirarthak
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