सुविचार 4305

हम मकान तो बना सकते हैं, लेकिन अगर इसमें ईंट ही उल्टी- सीधी लगी हों तो फिर वह किस काम का ?

सुविचार 4304

जीवन में यदि हम दृढ़ संकल्प एवं पूर्णता के साथ काम करेंगे तो एक दिन हम कामयाब जरूर होंगें.
किसी भी चीज कि पूर्णता प्राप्त करने के लिए, इंसान को सबसे पहले कई चीजों को न समझकर सिर्फ शुरुआत करनी चाहिए !

_ और अगर हम बहुत जल्दी समझ जाते हैं, तो हो सकता है हम ठीक से समझ न पाएं.!!

सुविचार 4303

*सही मौके पर खड़े होकर सही बात बोलना “एक साहस है”..*

*उसी प्रकार खामोशी से बैठकर दूसरों की सही बात सुनना भी “एक साहस है”*

*संयम और समझ बहुत महत्व रखते हैं।*

मुसीबत में संयम रखना और सुख में जमीन से जुड़े रहना ;

_ ये सादगी ही इंसान को भीड़ में सबसे अलग और महान बनाती है.!!

सुविचार 4302

” विकृत मनोदशा,” दुखों का सबसे बड़ा कारण है
सुख दुख की अनुभूति केवल और केवल, आपकी ही ” मनोदशा ” की देन होती है.
हमारी विडंबना यह है कि हम दूसरों की मनोदशा का आकलन तो कर लेते हैं,
लेकिन स्वयं की मनोदशा पर चूक जाते हैं.!!
वाकई दुनिया में बहुत दुख है !

_ हमारे आस-पास बहुत कुछ ऐसा घटित हो रहा है.. जिसे हम कभी जान ही नहीं पाते !
सच पूछिए तो उन्हें भी बेहद दुख-कष्ट हैं,

_ जो सबसे कह रहे हैं कि हम ठीक हैं..!!

सुविचार 4301

निर्बल मन ….

निर्बल व खाली मन कभी भी समर्थ संकल्प उत्पन्न नहीं कर सकता !! संकल्पवान बनें, विचारो में स्थिरता और दृढ़ता पैदा करें, मन को अभ्यास द्वारा नियंत्रित करें, अच्छे विचार रखें, इससे आपकी आत्मिक शक्ति का विकास होगा ! याद रखें मन के हारे हार है मन के जीते जीत !!!

संकल्प लेना अपने आप में एक सशक्त कार्य है; इसमें किसी अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता नहीं है.

_ किसी संकल्प पर टिके रहने के लिए प्रयास करना पड़ता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि आपने उस संकल्प के लिए खुद को कितना तैयार किया है.

सुविचार 4300

खुद को कभी कमजोर मत होने दीजिए, क्योंकि डूबते सूरज को देख कर लोग घरों के दरवाजे बंद करने लगते हैं..
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