सुविचार – धन – पैसा – दौलत – Money – 005

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सबसे फालतू चीज क्या है जिस पर लोग पैसे खर्च करते हैं ?

What is the most useless thing people spend money on ????
पैसे कमाने के बारे में तो आपको हर कोई बताता होगा, लेकिन शायद ही कोई आपको खर्च करने के तरीके बताता होगा.
सही फाइनेंशियल मैनेजमेंट में यह जरूरी है कि आप अपने खर्चों को भी मैनेज करें, हमें शांत चित से महीने की कमाई और खर्च का गणित अवश्य मिलाना चाहिए. खर्चे का सही मैनेजमेंट नही होने के कारण ही कमाई से अधिक खर्च कर जाते हैं. इसीलिए हम जो चीजें सस्ती हैं, उसका पीछा करने के लिए हमेशा महंगा भुगतान करते हैं.
_ शॉपिंग को अपनी हॉबी बनाने से बचें, लोन के द्वारा कुछ ना खरीदें, _ ये समझें कि कहां पर पैसे खर्च करने चाहिए और कहां नहीं..!!
सामाजिककरण महंगा नहीं होना चाहिए, जैसे शादी-विवाह, गृह प्रवेश आदि..!!
आगे की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए आज पैसे बचाना जरूरी है.
पैसे खर्च करना सीखने से आपको अपने पैसों का अधिक से अधिक इस्तेमाल आ जाता है ; _ इतना ही नहीं, इससे आपको भी खुशी मिलती है.
अनेक लोग वह धन व्यय करते हैं, जो उनके द्वारा कमाया हुआ नहीं होता. वे चीजें खरीदतें हैं, जिनकी उन्हें जरुरत नहीं होती.
ऐसे लोग _ उनको प्रभावित व दिखावा करना चाहते हैं, जिन्हें वे पसन्द भी नहीं करते.
हमारी ‘चाहत’ चुपके से ‘ज़रूरतों’ में बदल जाती है और ऐसी चीजें जो कभी विलासिता की चीज़ें हुआ करती थीं, ज़रूरतों में बदल जाती है.
यह मानसिकता एक समस्या खड़ी करती है, एक बड़ी समस्या..
इसलिए अपनी आय के आधार पर अपनी चाहत की सीमा निर्धारित करें..
आप अपने चुने हुए तरीके से अपने जीवन का भरपूर ‘आनंद ’लेते रह सकते हैं.
पैसा तो एक साधन मात्र है. आप जहां चाहें यह आपको ले जाएगा, लेकिन यह ड्राइवर के रूप में आपकी जगह नहीं लेगा. – AynRand
बिना किसी को दुख दिए या किसी का हक़ मारे पैसा कमाना सुख की बात है.!!
सही पैसा वो है जिसे कमाने के पश्चात् नींद चैन की आये.!!
“पैसा सिर्फ जमा करने की चीज़ नहीं है, जीवन को सहज बनाने का साधन है”
रुपया-पैसा कमाना बहुत मुश्किल और श्रम का काम है.!!
पैसे से यदि आप सुविधा, साधन और समय खरीद सकें तो पैसे का इससे बङा सदुपयोग कोई दूसरा नही हो सकता.!!
पैसा महत्वपूर्ण है लेकिन यह सब कुछ नहीं है… उन सभी चीजों के बारे में सोचें _जो आपके पास पहले से ही हैं _जिन्हें पैसे से नहीं खरीदा जा सकता.
पैसे से सम्पति का खरीदी जाती है पर कुछ अमूल्य चीजो को पैसा भी नही बचा सकता.. जैसे कि समय, सौंदर्य…!
यदि आपके पास पैसा नहीं है तो आप कुछ और नहीं सोचते हैं, _और यदि आपके पास है तो अन्य चीजों के बारे में सोचते हैं.!!
धन कमाना बहुत कठिन है, और यदि मिल जाए तो ..
“उसकी रक्षा करना और मुश्किल है.”
कुछ लोग निर्धनता प्रकट करके और खुद को निर्धन दिखा के खुश होते हैं.!!

_धनी होना चाहते हैं पर मेहनत किए बिना.!!
भौतिक जगत में जीना है और सुकून से जीना है तो अच्छे पैसे कमाने ही होंगे..

_ क्योंकि बग़ैर पैसे के समाज तो नहीं जीने देगा.!!
पैसा इतना होना चाहिए कि हम जो काम करना चाहे कर सकें..

_ इसके लिए दिन, रात, महीनों, वर्षों तक न सोचना पड़े..
_ और न अपने आप को उस काम को करने के लिए अनैतिक मार्ग और अनुचित साधन का प्रयोग करने के लिए मजबूर होना पड़े.!!
खरीदारी से पहले सोचें कि वह चीज आपके समय और मेहनत से कमाए गए पैसे की असल कीमत के लायक है या नहीं.!!
धन की महिमा उतनी ही ठीक है, जितने से जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे ; _ उससे अधिक की इच्छा करना और उसके लिए कीमती जीवन को नष्ट करना व्यर्थ है !!

” जीवन यापन के लिए धन अर्जित करना उचित है, पर धन के लिए जीवन अर्पित कर देना पागलपन है “

” पर्याप्त पैसा होने की सबसे बड़ी बात यह है कि आप इसके बारे में सोचना बंद कर सकते हैं.” – Tara Westover

धन हमारी क्षमता को बढ़ाकर हमारे जीवन में एक भूमिका निभाता है ; _ लेकिन बहुत अधिक धन वास्तव में इससे वंचित करता है.
किसी व्यक्ति की महानता इस बात में नहीं है कि वह कितना धन अर्जित करता है, बल्कि उसकी ईमानदारी और अपने आसपास के लोगों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने की उसकी क्षमता में है.”

The greatness of a man is not in how much wealth he acquires, but in his integrity and his ability to affect those around him positively.”

धन हमें अपने पास होने से उतना प्रसन्न नहीं करता जितना अपने नुकसान से हमें पीड़ा देता है.

Riches do not exhilarate us so much with their possession as they torment us with their loss.

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास बहुत कुछ है या थोड़ा, धन प्रबंधन के पांच सरल नियम याद रखें:

1. नकद राजा है.

2. आपके पास जितना है उससे अधिक खर्च न करें.

3. जब आप अधिक कमाते हैं तो अपने खर्च में वृद्धि न करें.

4. आप पैसे बचाने में कभी गलत नहीं हो सकते.

5. अपना पैसा काम पर लगाएं.

It doesn’t matter If you’ve a lot or a little, remember five simple rules of money management: Cash is king. Don’t spend more than you have. Don’t increase your spending when you make more. You can never go wrong saving money. Put your money to work.

अपने जीवन और कार्य को प्रबंधित करें ताकि पैसा आपका वफादार सेवक बन जाए, न कि आपका अथक स्वामी..!!

Manage your life and work so that money becomes your faithful servant, not your relentless master.

अधिकतर झगडे पैसों को लेकर होते हैं. बेहतर होगा कि अपने खर्च, बचत, निवेश की योजना पहले से ही बना लें और फिजूल के खर्चों से बचें.
यदि आप किसी से पैसा उधार लेते हैं तो उसे समय पर अवश्य लौटाएं.

_ जो भी तारीख दो उस तारीख को चाहे किसी से भी पैसे लेकर देने पड़े लेकिन उस तारीख को कभी मत चूकना..!!
पैसे को सफलता से जोड़ना गलत हो सकता है, पर अफ़सोस यह है कि सफलता को आँकने के लिए पैसा ही सब से अच्छा थर्मामीटर है.
धनी और कंगाल के मध्य का अन्तर कितना नगण्य है. एक ही दिन की भूख या एक ही घण्टे की प्यास दोनों को समान बना देती है.
जिनके पास सही में दौलत होती है उन्हें बताने की आवश्यकता नहीं होती..

_ क्योंकि जिनके पास कुछ नहीं होता वही सबसे ज़्यादा हवा में बातें करते हैं.!!
#धन आवश्यक है, _ आजीविका और अच्छा जीवन को जीने के लिए,

_ पर इस से अधिक धन को महत्व देना वाले व्यक्ति के जीवन से प्रेम विदा हो जाता है,
_ क्योंकि धन के लिए जितना कठोर होना होता है , प्रेम इतना कठोर नही हो पाता..!!
इतना पैसा तो होना ही चाहिए कि दुख दूर हो जाए,
_ पर इतना नहीं कि पैसे से ही दुख पास आ जाए.!!
यदि आप कम धन में सुख का अनुभव करना नहीं जानते, _

_ तो अनंत धन राशि भी आप को सुखी नहीं बना सकती.

पैसा सिर्फ जमा करने की चीज नहीं है, यह जीवन को सहज बनाने का साधन है.

_ धन का असली मूल्य तब है, जब वह सुरछित भी हो और शांत भी रखे.
_ कितना रखना है, से ज्यादा जरुरी है “कितना पर्याप्त है”
_ जरुरत से ज्यादा रखा हुआ धन, सुरछा नहीं,,, अक्सर एक नया बोझ बन जाता है
_ बहुत से लोग ये गलती करते हैं : – पहले पैसा कमाते हैं, फिर उसे बचाने की चिंता में जीवन जीना ही भूल जाते हैं.
“पैसे से खुशी नहीं खरीदी जा सकती- ऐसा वही लोग कहते हैं, जिनके पास पैसे नहीं होते.

_ पैसे वालों को बुरा कहते हो, पहले पैसे कमा के तो दिखाओ, तब पता चलेगा कि पैसा कमाना कितना कठिन है.
_ एक बार पैसा कमा लो, फिर देखते हैं, पैसे वालों की कितनी बुराई करते हो.”
पैसा सिर्फ एक हद तक ख़ुशियाँ खरीद सकता है, स्टडीज बताती है कि _

_ करीब ४९ लाख प्रति वर्ष इनकम की बाद भी ख़ुशियों में बहुत कम ही इज़ाफ़ा होता है.

ईमानदारी से धन कमाना सर्वश्रेष्ठ नीति है तथा मेहनत से कमाए धन से जो संतोष और ख़ुशी मिलती है _ वह अनैतिक तरीको से कमाई में नहीं मिलती हैं.
“पैसा कमाना महत्वपूर्ण है” लेकिन पैसे को सुरछित रखना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है.
धनार्जन के लिए प्रयतनशील रहना उत्तम है, _

_ किन्तु धन की धुन में ही धधकते हुए धराशायी हो जाना उचित नहीं है.

धन का मोह छोड़ने पर ही मालूम होता है कि उस से भी बड़ी चीज कुछ होती है.

अक्सर, जीवन में सबसे कीमती चीजें वे चीजें होती हैं _ जिन्हें पैसे से नहीं खरीदा जा सकता.
“सही जगह रखा पैसा ही कमाई करता है,

_ सिर्फ जमा किया पैसा नहीं”
पैसा डेटॉल [Dettol] की तरह है..

_क्योंकि यह 99.9% समस्याओं [Problem] को ख़त्म कर देता है.!!

कम पूंजी के बढ़ने की गति बहुत धीमी होती है..

_ इसलिए उसे बचाए रखने के लिए अपने खर्च पर निर्मम नियंत्रण रखना जरूरी है.

जैसे धुन बदलने पर लोगों का नृत्य बदल जाता है,

_ वैसे ही धन के आगमन पर लोगों का पूरा दृश्य बदल जाता है ..

पैसा वो माध्यम है जो समस्या को खत्म तो नहीं करता..

_लेकिन इतनी सुविधा देता है कि समस्या ‘महसूस’ नहीं होती.!!

जिन्दगी में जीवन से बड़ा पैसे को मत समझ लेना _

_ वरना जिंदगी बड़ी ही बेकार सी लगने लगेगी.

“पैसा इतना होना चाहिए कि वह जीवन को संभाले ;
_ इतना महत्वपूर्ण नहीं कि पूरा जीवन उसी को संभालने में निकल जाए”
खुश रहना एवं खुशहाल रहना दोनों ही आप पर निर्भर करता है. पैसा एक साधन मात्र है.

_ जीवन को योजनाबद्ध तरीके से जीया जाए तो आप कम में भी खुश रह सकते हैं.!!

आप ने पैसे कितने कमाए, इस बात की कोई अहमियत नहीं होगी,

_ “कैसे कमाए, इस बात की हमेशा अहमियत रहेगी.”

अमीरी के बाद, जो मान- सम्मान मिलता है, वह अमीर का सम्मान नहीं, _

_ अमीरी का सम्मान है.

एक प्रश्न आदमी को खुद से जरूर पूछ लेना चाहिए “जो सिर्फ पैसों की वजह से आपको इज्जत दें, मान सम्मान दें, अपना मानें, आपकी बात सुनें, क्या वो सच में आपके अपने हैं ?”
अपने आसपास आपको जितने भी उपद्रव होते दिखेंगे,

_ उसकी जड़ में कहीं ना कहीं पैसें या सम्मान पाने का लालच ही नजर आएगा,

_ व्यक्ति को पैसा और सम्मान जितना मिले उतना कम लगता है, इसलिए आखिरी सांस तक व्यक्ति के जीवन में उपद्रव चलते रहते हैं.

अगर आप जितना पाते हो, उस से कम खर्च करना जानते हो, तो आपके पास पारस पत्थर है.
यदि आप अपनी मेहनत से कमाए गए पैसे की कद्र नहीं करेंगे तो..

..कोई भी आपके पैसे की कद्र नहीं करेगा..!!

पैसा आपको ख़ुशी के अतिरिक्त, सब कुछ दे सकता है. _

_ उस में आपको सुखों में भी दुःखी बनाने की शक्ति है.

किसी के धन- ऐश्वर्य से उसके सुखी होने की परिकल्पना न कीजिये, वह अपने हिस्से के जाल में घिरा है.

_ उसका ऐश्वर्य एक सुसज्जित प्रयोगशाला (lab) की तरह है, जहाँ उसे अपने हिस्से के सबक़ सीखने के लिए भेजा गया है.

“ ऐसा मत सोचो कि पैसा सब कुछ करता है _

_ वरना आप पैसे के लिए सब कुछ करने लग जाओगे ”

अपनी आर्थिक स्थिति को गंभीरता से लो,

_ पैसा कई चुनौतियों का बचाव है और इससे कई समस्याएं हल हो सकती हैँ.

पैसे के बिना आपकी बातें अनसुनी हो जाती हैं और पैसे के साथ आपकी खामोशी भी काबिलियत बन जाती है.!!
पैसे की कीमत को मैंने इतना ही जाना है, _ अमीर चाहे जितना हो जाओ, दाल – रोटी ही खाना है..
पैसा एक कीमती वस्तु है; आपके पास है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसे बर्बाद कर दें.
पैसा खुशी नहीं देता पर आपके दुःखों को कम जरूर कर देता है.
धन, जीवन, स्त्री और भोजन के विषय में, सब प्राणी अतृप्त हो कर गए, जाते हैं और जाएंगे.
हराम की दौलत आराम दे सकती है, लेकिन सुकून नहीं !
पैसा हमारे व्यक्तित्व में तभी सही चमक पैदा कर सकता है, जब हमारे मानवीय गुण बने रहें. 
हमें प्रतिस्पर्धा में तो नहीं जीना, पर साथ ही आवश्यक धन का अभाव भी हमारे पास नहीं रहना चाहिए.
धन का सही इस्तेमाल समझदार ही करता है, और लोग उससे ईर्ष्या करते हैं कि वो संतुष्ट कैसे है.
पैसे के लिए काम करना और पैसों को काम पर लगाना ; इन दोनों में फर्क है.
ईमानदारी से कमाया हुआ पैसा बरकत भी देता है और सुकून भी.!!
ये दबदबा, ये दौलतें सब किरायेदार हैं, घर बदलते रहते हैं.!
छोटी धनराशि ऋणी बनाती है और बड़ी धनराशि शत्रु.
पैसा आपका सेवक है, यदि आप उसका उपयोग जानते हैं, तो आप उसके स्वामी हैं.
पैसा हमारा सेवक ही बना रहे, न कि यह हमारा स्वामी बन बैठे. 
ऐसा मत सोचो कि पैसा सब कुछ करता है वरना आप पैसे के लिए सब कुछ करने लग जाओगे.
पैसा जरूरी हो सकता है, लेकिन इतना भी जरूरी नहीं कि वो हमें इंसान से कुछ और बना दे.
जीवन में धन कमाना जरुरी है.. ताकि ये दुनियावी सिस्टम अपने स्वरूप में चलता रहे.!!
धन के मद में मतवाला मनुष्य, गिरे बिना होश में नहीं आता !!
कई बार लोगों के पास पैसा तो आ जाता है पर गंभीरता नहीं आती व्यवहार में..

_ कहते हैं न, जिस पेड़ पर जितने ज्यादा फल, वो उतना ही ज्यादा झुका रहता है.!!
जीवन में खुश रहने में पैसे का बहुत बड़ा योगदान है, इसलिए पैसे का सम्मान करें, पर इस तरह से कि यह आप की चिन्ताएं दूर करे न कि चिन्ता का कारण बने.
धन हमारी आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूरा करे, हमारी प्रतिभा को निखारे, हमारी छमता को बढ़ाए, तो इसके लिए बेहद जरुरी है कि हम पैसे का सम्मान करें. 
हमारी शिछा में कमी ये नहीं है कि पैसा खर्च करना नहीं सिखाया गया.

_ बल्कि कमी यह है कि पैसा बनाने के बाद उसका किस तरह इस्तेमाल किया जाए और उसे किस तरह संभाला जाए, इसे पैसे की समझ कहते हैं.

मेहनत से कमाए धन की फसलें जब बढ़ती हुई नजर आती है तो.. संतोष होता है.

_ मेहनत की कमाई, थोड़ी कम ही क्यों ना हो, वो जीवन में खुशी और शांति देती है,
_ लेकिन गलत तरीके से आई धन की फसलें लहराती तो हैं.. लेकिन कम समय तक..
_ और फिर उसमें उग आए खरपतवार के कांटे आपको चुभने लगते है..
_ और समय के साथ इसका दर्द और भी बदतर हो जाता है..!!
गलत काम से पैसे तो कमाए जा सकते हैं, लेकिन वो पैसे इच्छा पूरी नहीं कर पाते, क्योंकि इच्छा लगातार बढ़ती चली जाती है की इसके बाद ये ये शौक पूरे करना है.

और ईमानदारी की कमाई, थोड़ी कम ही क्यों ना हो, वो जीवन में खुशी और शांति देती है,

अपना लछ्य अमीर बनना जरूर रखो, लेकिन जल्दी अमीर बनने के चक्कर में गलत रास्ते पर मत जाओ, वरना आप मानसिक रोगी बन जाओगे.

निश्चल हृदय का कोई मोल नहीं, प्रेम तो ठीक है कर लेंगे __ पर जीवन भर साथ निभाने वाला कोई नहीं,

धन हो तो प्रेम, साथ, यार दोस्त, रिश्तेदार इस संसार का हर संबंध खरीद सकते हो _ हर बेगाना भी आपका अपना हो जाता है…!!!

पैसे का प्रभाव अपने चरम पर पहुंच गया है और हर जगह इसका बोलबाला है.

_ जिसके पास पैसा है.. वह बुद्धिमान और शक्तिशाली है, बाकी दुनिया उनकी नजर में मूर्ख है.
_ ये भी सच है कि पैसा कमाने का ये आसान सा दिखने वाला काम ..हर कोई क्यों नहीं कर पाता ?
_ दरअसल, ‘आसान’ दिखने वाला ये काम ..इतना आसान नहीं है.
पैसा इंसान के चरित्र की असली परीक्षा लेता है,

_ कई बार जो लोग सच्चे और अच्छे लगते हैं, वो पैसे के सामने खुद को बदल लेते हैं,
_ और वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं.. जो पैसा आने के बाद भी अपनी असलियत और इंसानियत नहीं छोड़ते, खैर..!
…पैसा इंसान को नहीं बदलता, वो तो सिर्फ उसकी असली पहचान सामने लाता है…!
पैसों की अन्धी लालसा में जब हम बेईमानी, चोरी और भ्रष्टाचार से पैसा कमाने लगते हैं, तो हम पैसे का घोर निरादर कर रहे होते हैं. 
जब हम पैसा धोखा, बेईमानी, शोषण, भ्रष्टाचार या अपराध के द्वारा हासिल करते हैं, तो इसका सीधा- सा अर्थ है कि हम पैसे की अस्मिता और उसकी गरिमा को अपमानित कर रहे हैं — ऎसा पैसा कभी भी सच्ची ख़ुशी नहीं देता. 
पैसा कमाने की होड़ ने हमें पागल कर दिया है, अमानवीय बना दिया है.

_ धन कमाना और उसे बढ़ाना- प्रशंसनीय है..
_ लेकिन इसके लिए छल-बल, प्रपंच, बेईमानी, घूसख़ोरी कतई ज़रूरी नहीं है.
_ ये कमाई के वे ‘शार्टकट’ हैं, जिसे केवल आलसी और लालची लोग अपनाते हैं।
_ मेहनत करने वाला अपनी बुद्धि-चातुर्य और परिश्रम से, ईमानदारी से धनोपार्जन करता है और सीना तान कर अपने व्यक्तित्व का विकास करता है.
_ रात को मीठी नींद सोता है, शारीरिक व्याधियों से दूर रहता है और अपनी आगामी पीढ़ियों को प्रकाशपुंज बनकर प्रकाशित करता है.
– द्वारिका प्रसाद अग्रवाल
आपके पास जितना भी धन हो, अगर आपका मन शांत और खुश नहीं है, तो आप जीवन का सच्चा आनंद नहीं ले सकते.

_ पैसा कमाना जरूरी है, लेकिन अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
_ काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखें और एक सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाएं.!!
“जिस तरह गंदगी में बना भोजन खाने में स्वादिष्ट होता है, लेकिन शरीर को नुकसान पहुंचाता है,

_ वैसे ही गलत तरीके से कमाया पैसा आपको क्षणिक सुख ज़रूर देता है, लेकिन वो इसी तरह बाहर भी निकलता है.
_ इसलिए पैसे कमाने में ईमान का ध्यान रखें, नहीं तो वो संताप के रूप में सामने आएगा.
“- “पैसा कितना कमाया, इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि पैसा कैसे कमाया”
लोग धन जमा करने में समय गंवा देते हैं.

_ जिस समय को वो जी सकते थे, उसे जीने की तैयारी में खर्च कर देते हैं.
_ सोचते हैं कि एक दिन जी लेंगे.
_ जब कागज के ढेरों नोट वो जमा कर लेते हैं और सोचते हैं कि अब जी लेंगे तो समय नहीं बचता, जीने के लिए..
_ सबसे बड़ी करेंसी खत्म हो चुकी होती है.
_ बचता है, बस कागज का टुकड़ा..!!
दुनिया की सारी सुविधाएं पाने और पैसा कमाने की होड़ में हम इंसान मशीन बन गये हैं.
_ मिलना जुलना आपसी सुख दुख सब दूर हो चले हैं..!!
बेईमानों, धोखेबाजों और भ्रष्टाचारियों से धन अपने अपमान का बदला जरूर लेता है, जब ऎसे लोग मुसीबत में घिरते हैं, तो पैसा भी अपना मुँह मोड़ लेता है. 
कमाना एक बुद्धिमता हो सकती है, लेकिन उस से बड़ी बुद्धिमता इसमें है कि अपनी कमाई का सदुपयोग करना सीख जाए.
पैसा कमाने की होड़ ने हमें पागल कर दिया है, अमानवीय बना दिया है.

_ धन कमाना और उसे बढ़ाना- प्रशंसनीय है लेकिन इसके लिए छल-बल, प्रपंच, बेईमानी कतई ज़रूरी नहीं है.

_ ये कमाई के वे ‘शार्टकट’ हैं जिसे केवल आलसी और लालची लोग अपनाते हैं.

छोटे-छोटे लोभ, बङे लाभों से वंचित करते हैं, लेकिन लोग फिर भी समझते नहीं हैं, और शोर्ट कट रास्ता चुनते हैँ !!

मेहनत करने वाला अपनी बुद्धि-चातुर्य और परिश्रम से, ईमानदारी से धनोपार्जन करता है और सीना तान कर अपने व्यक्तित्व का विकास करता है.

_रात को मीठी नींद सोता है, शारीरिक व्याधियों से दूर रहता है और अपनी आगामी पीढ़ियों को प्रकाशपुंज बनकर प्रकाशित करता है.

मनुष्य धन के अभाव से उतना कष्ट नहीं पाता, जितना वह अपनी फ़ुजूलखर्ची के कारण पाता है.
मजाक और पैसा सोच समझकर उड़ाओ..

_क्योंकि असली बुद्धिमान वो है.. जो जरूरत पड़ने पर खुद को भी थोड़ा नासमझ दिखा सके.!!

जिस पैसे में अपने पसीने की महक न हो, वह पैसा सुख के सारे साधन तो दे सकता है, परन्तु मन की शान्ति नहीं.
यदि धन को आप पहचानते हैं तो वह आप का दास है, यदि नहीं पहचानते तो आप उस के दास हैं.
जिस व्यक्ति की यह राय हो की पैसा सब कुछ कर सकता है,

उस पर ये संदेह किया जा सकता है की वो पैसे के लिए कुछ भी कर सकता है.

पैसा इनसान के लिए जरुरी है लेकिन पैसा सब कुछ नहीं है, जिस के लिए आदमी सारे रिश्तों को आग लगाने के लिए तैयार हो जाए.

पैसों के लिए इतना अंधा भी नहीं होना चाहिए कि वह अपनों को ही नुकसान पहुंचा कर अपने स्वार्थ की पूर्ति करे.

जो इंसान अपनी आमदनी के अनुसार खर्च करता और बचत करता है, अपने आने वाले कल के लिए सोच कर चलता है, वह कभी परेशान नहीं होता.
पैसा हर सवाल का हल नहीं है.. लेकिन आज की दुनिया में यह हर दरवाज़े की चाबी ज़रूर बन चुका है.!!
पैसों को सही ढंग से बचत करना कंजूसी नहीं, _ बल्कि समझदारी कहलाता है…
कमाने में बहुत श्रम लगता है _उसे यूँ जाया जाते देख पीड़ा होती है.

_ पर समझदारी से खर्च करने और कंजूस होने में फर्क होता है..!!

पैसा कमाने के लिए इतना वक़्त खर्च ना करो कि _ पैसा खर्च करने के लिए ज़िन्दगी में वक़्त ही ना मिले !
जो खर्च कर सके, वही धन का वास्तविक मालिक है, _ बाकि तो सभी सम्पति के चौकीदार हैं.
खुद के लिए पैसा कमाना अच्छी बात है, और उससे किसी और का भी भला हो तो बहुत अच्छी बात है.
किसी भी तरह से पैसा प्राप्त करना न पैसे से प्यार है, न यह पैसे का सम्मान है. 
पैसा सब कुछ नहीं होता,_ बाकी पैसे से सब कुछ होता है..!!
पैसे होना सुखी होने की नहीं संपन्नता की निशानी है.
धनसंपदा आप को बिना उच्चतर मूल्यों के स्थायी सुख संतोष नहीं दे सकती.
पैसा, शोहरत या स्टेटस सिर्फ हमारी जरुरत है, ख़ुशी का मूलमन्त्र नहीं.
-पैसा कितना कमाओगे इसकी अहमियत नहीं है _बल्कि पैसे कैसे कमाए _यह महत्वपूर्ण होता है.
धन के भी पर होते हैं. कभी- कभी वे स्वयं उड़ते हैं और कभी- कभी अधिक धन लाने के लिए उन्हें उड़ाना पड़ता है.
“उन चीज़ों पर अत्यधिक पैसा खर्च करें जिन्हें आप पसंद करते हैं,

_ और उन चीज़ों पर निर्दयतापूर्वक कटौती करें जिन्हें आप पसंद नहीं करते हैं”

बेशक पैसे से हम कुछ भी ख़रीद सकते है पर पैसे से कई चीज़ें नही ख़रीद सकते

जैसे – माँ-बाप, मन की शांति, बुद्धि, समझ, प्रतिभा.

धन से हम जीवन की सारी सुख सुविधा तो हासिल कर सकते हैं,

पर जीवन में सुकून केवल अच्छे कर्मों से ही आता है.

सत्य से कमाया धन हर प्रकार से सुख देता है और

छल कपट से कमाया हुआ धन दुःख ही दुःख देता है.

आप कितना कमाते हैँ और आप के पास कितना धन है,

_ यह बातें किसी को भी सीधे – सीधे ना बताएं..

शराब से ज्यादा नशा धन का होता है, शराब का नशा तो दो- चार घंटे बाद ही उतर जाता है, लेकिन धन का नशा तो जिंदगी बरबाद करने के बाद ही उतरता है.
क्या चीज बनायी है “धन”,

लगभग सभी अपने “निधन” तक इकठ्ठा करने में लगे रहते हैं.

हर किसी को लगता है सफ़ल होने के बाद ज़िंदगी आसान होगी…पैसे होंगे और मन पसन्द सब कुछ होगा, _

_ देखो यार, _ ऐसा है यदि तुम्हारा मन शांत नहीं है और तुम परेशान हो…तब जीवन की कोई भी अवस्था रास नहीं आनी…!!!

लोग कहते हैं कि पैसा सिर्फ़ बेईमानी से, धोखाधड़ी से, गरीबों का शोषण करके ही कमाया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है !!

_यह कामचोर और आलसी लोगों की फैलाई हुई भ्रांति है.
_यदि आपमें श्रम करने की ताकत है, दिन-रात काम में जुटे रहने का जज़्बा है, सोच-विधार करने की शक्ति है तो ..आपके पास पैसे को आने से कोई नहीं रोक सकता.
_पैसे के साथ आपके चेहरे पर मेहनत की चमक भी आएगी, सफ़लता का आत्मविश्वास भी झलकेगा.
_मेहनत और लगन के रास्ते पर चलना तो शुरू कीजिए.
धन….

अपनी जरूरतों के लिए धन कमाना, भौतिक साधन एकत्र करना बहुत अच्छी बात है किन्तु धन दौलत जमा करने की भूख होना, लालसा होना, लालच होना उसके लिए अनैतिक कार्य करना, दुसरो का हक़ मारना उचित नहीं है !!! याद रखिये धन की तीन गतियाँ प्रसिद्ध है, पहला उपभोग, दूसरा दान तीसरा स्वतः नष्ट हो जाना !!!

पैसा अकेला एक साधन है; यह एक आदमी को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति देता है. अमीर आदमी जहां चाहे जा सकता है, लेकिन शायद खुद को कहीं खुश नहीं करता ; _ वह एक पुस्तकालय खरीद सकता है या पूरी दुनिया की यात्रा कर सकता है, लेकिन शायद न तो पढ़ने का धैर्य है और न ही देखने की बुद्धि…. बटुआ भरा हो सकता है और दिल खाली.

_हो सकता है उसने संसार को पा लिया हो और स्वयं को खो दिया हो; और उसके चारों ओर उसकी सारी दौलत के साथ .. वह किसी भी जीर्ण-शीर्ण खाई की तरह खाली जीवन जी सकता है.

हमारे पैसे का असली मूल्य इसमें नहीं है कि हम अपने लिए क्या खरीद सकते हैं, बल्कि इस बात में निहित है कि हम दूसरों के जीवन में क्या बदलाव ला सकते हैं.

_ भौतिक संपत्ति की तुलना में हमारे पैसे खर्च करने के लिए हमेशा बेहतर चीजें होती हैं.

_ हमारा पैसा केवल उतना ही मूल्यवान है जितना हम इसे खर्च करने के लिए चुनते हैं ; _ जब हम भौतिक सामान चुनते हैं, जैसे बड़ी स्क्रीन वाला टीवी या नया वार्डरोब, तो यही वह मूल्य है जो हमने प्राप्त किया है—क्षणभंगुर मनोरंजन या हमेशा बदलते रहने वाला फैशन.

लेकिन आइए एक अलग दृष्टिकोण पर विचार करें ; __ क्या होगा अगर हम उस पैसे को परिवार की छुट्टी – जैसे साझा अनुभवों पर खर्च करना चुनते हैं ? हमारे धन का मूल्य तब भौतिक से परे होता है.

उसी तर्ज पर, क्या होगा अगर हम उन्हीं संसाधनों को समस्याओं को हल करने और दुनिया में परिवर्तन को प्रभावित करने के लिए निर्देशित करें ?

एक अनाथ बच्चे के लिए एक परिवार या एक गांव को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए ? अचानक, हमारे पैसे का मूल्य कई गुना अधिक हो जाता है !

अगर आप को पैसे बचाने हैं तो बैंक में एक आरडी अकाउंट जरूर खुलवाएं. ऐसा करने से आप हर महीने कुछ पैसे जरूर बचा सकेंगे और साथ ही, आप को बैंक से ब्याज भी मिलेगा.
यदि रूपया उधार लेने की नौबत आ जाय, तो वायदे के अनुसार उसका ब्याज देते रहिये और उसे उतार कर ही दम लीजिये.
धन उत्तम कर्मों से उत्पन्न होता है, प्रगल्भता [ साहस, योग्यता व दृढ़  निश्चय ] से बढ़ता है, चतुराई से फलताफूलता है और संयम से सुरछित होता है.
सिर्फ इसलिए कि आपके पास पैसा है, बहुत सी नई चीजें ख़रीदना बंद करें, जिनकी आपको जरुरत नहीं है.
पैसे की असल कीमत हमें तभी समझ आती है,

_ जब हमें किसी चीज़ की जरूरत होती है और अगर वही पैसा हमारे पास होते हुए भी हम उसे अपनी ज़रूरत के लिए इस्तेमाल ना कर पाएं, तो वो सिर्फ कागज़ के टुकड़ों जैसा रह जाता है.. शायद रद्दी से भी ज़्यादा बेकार.!!
क्या जीवन में भोजन ही प्रधान है ?

सामाजिक खर्च, दैनिक जीवन हेतु उपयोगी वस्तुएँ, सामाजिक लेन-देन,

आपके रोजाना आने-जाने का खर्च, रोज का ड्रेस-अप,

आगे चलकर कुछ आकस्मिकताओं का वित्तीय प्रबंधन….

इस विषय में क्या सोचा आपने ?

पैसे सिर्फ आपकी लाइफ़ स्टाइल बदलते हैं और आपकी जरूरतों को पूरा करते हैं.

अपनी खुशी के लिए पूरी तरह से पैसे पर आश्रित ना रहें.

धन न हो तो चिंता मोटी होती है और

धन ज़्यादा हो तो भी चिंता तंदुरुस्त होती है,

इसलिए धन के साथ ध्यान को जोड़ना जरुरी है.

जिनके पास सिर्फ सिक्के थे वो मज़े से भीगते रहे बारिश में ..

.. जिनके जेब में नोट थे वो छत तलाशते रहे ….

खरीद लो साहब पैसों से संसार के सारे ऐशो आराम,

बस हमें इतना बता देना __ सुकून क्या भाव ख़रीदा..

“हम पैसे से वो चीज़ें खरीदते हैं जिनकी हमें ज़रूरत नहीं होती

हमें उन लोगों को प्रभावित करने की ज़रूरत नहीं है जिन्हें हम पसंद नहीं करते”
“We buy things we don’t need with money
we don’t have to impress people we don’t like”
धन का अभाव होने पर मलाल की स्थिति में या धन का भरपूर आनंद लेने के बाद ऊबने की स्थिति में.. यह कहा जाता है कि खुशी पाने के लिए धन की ज़रूरत नहीं है.
एक वक़्त होता है, जब हम कुछ बनना चाहते हैं..

_ किसी को देख के.. उसके रुतबे को या ओहदे को देख के.. टीचर, डॉक्टर, इंजीनियर या फिर पायलट, खैर !…
_ फिर बाद में मुझे पता चला कि पैसेवाला बनना ज्यादा जरूरी है…!!
१. लोगों को यह दिखाने के लिए पैसा खर्च करना कि आपके पास कितना पैसा है, कम पैसे रखने का सबसे तेज़ तरीका है.

2. पैसे का सबसे बड़ा आंतरिक मूल्य– यह आपको अपने समय पर नियंत्रण देने की क्षमता रखता है.
3. मेरे लिए स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि आप काम करना बंद कर देंगे. _ इसका मतलब है कि आप केवल उन लोगों के साथ काम करते हैं जिन्हें आप पसंद करते हैं, जब आप चाहते हैं _तब तक आप चाहते हैं.
४. कम खर्च कर बचत की जा सकती है. यदि आप चाहते हैं तो आप कम खर्च कर सकते हैं.. और आप कम इच्छा करेंगे ;
यदि आप इस बात की कम परवाह करते हैं कि दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं.
पैसा जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज क्यों है ?

पैसा कितना महत्वपूर्ण है, यह आपकी जरूरतों और इच्छाओं पर निर्भर करता है।

सर ढकने के लिए छत, शरीर पर आरामदायक कपड़े, और भूख शांत करने वाला भोजन। इन 3 चीजों के लिए 10,000 भी काफी है ,_

और 10,00,000 भी कम है – जब तक इच्छाएं हैं, तब तक पैसे का जीवन में अतिमहत्वपूर्ण स्थान है.

” कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना “

अगर कोई व्यक्ति दिन रात मेहनत करता है तो लोग कहते हैं,

पैसों के लिए मरा जा रहा है और मेहनत ना करे तो निकम्मा है,

पैसा खर्च करो तो उसे फिजूलखर्ची व दिखावा कहा जाता है

और पैसा खर्च ना करे तो उसे कंजूस व मक्खीचूस कहा जाता है,

अगर आपके पास पैसा बहुत है तो कहेंगे कि दो नम्बर का होगा

और अगर पैसा कम है तो कहेंगे कि थोड़ी सूझबूझ होती तो यह हाल नहीं होता,

और जिंदगी भर मेहनत से जमा किये गये पैसों के बारे में कहा जाता है कि

पैसे का सुख नहीं भोगा, ” तो कमाया ही क्यों था ”

बहुत पैसा है माना, तुम सब कुछ खरीद लोगे,

बताओ जरा मुस्कुराहट की कीमत क्या दोगे,
क्या भाव लगाओगे तुम भावनाओं का,
रिश्तों को निभाने की कीमत क्या दोगे,
माना ख़रीद लोगे तुम जमीं बहुत,
क्या आसमाँ जरा सा भी ख़रीद पाओगे,
पानी भी खरीद सकते हो पैसो से मगर,
क्या प्यास की कीमत लगा पाओगे,
बहुत पैसा है माना मगर,
क्या खुशियाँ खरीद सकते हो,
क्या खरीद सकते हो तुम सुकूँ थोड़ा,
क्या वो बचपन खरीद सकते हो,
बहुत महँगा सा बेड भी खरीद लोगें यूँ तो तुम,
मगर क्या तुम नींद का भाव लगाओगे,
डॉक्टर भी रख लोगे महँगे से महँगा,
मगर स्वस्थ शरीर क्या पुनः पाओगे..
बहुत पैसा है माना मगर क्या खोये हुए दोस्त खरीद सकते हो,
क्या भाव लगाओगे उन यादों का, उन लम्हों का बताओ तो,
क्या वो चौराहें वाली मुलाक़ातें ख़रीद सकते हो ,
बहुत पैसा है माना मगर..
खरीद तो लोगे तुम घर भी बड़ा,
क्या परिवार जुटा पाओगे,
बिन परिवार क्या सिर्फ पैसों से,
घर को घर भी बना पाओगें,
बहुत पैसा है माना मगर, क्या दिन-रातें खरीद सकते हो,
क्या अंतिम क्षण में पैसों से कुछ साँसे खरीद सकते हो..
बहुत पैसा है माना मगर ???
असल में पैसे की इस भागा – दौड़ी में मनुष्य जीवन को जीना भूल गए है, जीवन को धीरे-धीरे पैसे के जैसे ही खर्च किये जा रहे है,
लोगो के पास भाइयों- बहनों तथा उन दोस्तों जिन्होंने हर परेशानी में साथ दिया है उनसे ही बात करने के लिए समय नही है..
अरे क्या करोगें इतना पैसा कमाकर,
एक बार रोज़ शाम को इस झूठी दुनिया से बाहर निकलो और भाइयों – बहनों और उन बिछड़े दोस्तों को कॉल कर बात करना शुरू करो,
देखो जीवन कितना सुन्दरमय उपहार है..
आज की दुनिया में, हम पैसे वाले लोगों की प्रशंसा करते हैं और उनका जश्न मनाते हैं.

पत्रिकाएँ उन्हें रैंक करती हैं, टेलीविज़न नेटवर्क और वेबसाइटें उनकी सफलता का जश्न मनाती हैं; – उनसे जुड़ने के तरीके के बारे में किताबें लिखी गई हैं.
पैसे वाले लोगों के साथ अक्सर हमारी डिनर पार्टियों में अलग तरह से व्यवहार किया जाता है ; _ मुझे ऐसा लगता है कि अधिकांश लोग उनसे जुड़ना चाहते हैं.
वास्तव में, यदि आपको एक कमरे में बैठे लोगों से पूछा जाए, “आपमें से कितने लोग अमीर बनना चाहेंगे ?” लगभग हर हाथ ऊपर उठेगा.
हमारे समाज में ढेर सारा पैसा होना एक उपलब्धि का प्रतीक है, _जिसे हासिल करने की चाहत ज्यादातर लोग रखते हैं.
यहां तक ​​कि छोटी उम्र से ही, _हममें से कई लोगों ने यह कल्पना की थी कि जब हम बड़े होंगे तो हमारे पास ढेर सारा पैसा होगा और यह कितना अद्भुत होगा.
_ और जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, यह कुछ ऐसा है जिसे हासिल करने के लिए हम कड़ी मेहनत करते हैं.
लेकिन आइए एक पल के लिए रुकें और एक नए ढंग से विचार करें: ->
क्या बहुत सारा पैसा होना सचमुच ऐसी चीज़ है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए ?
हम इसका इतना पीछा क्यों कर रहे हैं ? शायद यह गर्व करने की बात नहीं है…
निःसंदेह, यह बात कड़ी मेहनत कर के जो धन अर्जित करता है, उसको कमतर आंकने के लिए नहीं है.!!
_यह सिर्फ एक स्वीकृति है कि इसके अलावा और भी कुछ है, जिसका हमें पीछा करना चाहिए.
हमारे लिए भविष्य के लिए तैयारी करना बुद्धिमानी है, _ लेकिन कोई ऐसा बिंदु भी है _ जिसको आवश्यकता के मुकाबले _अधिक महत्व दिया जाना चाहिए.
मैं कम कमाई के लिए नहीं कह रहा हूं. _प्रत्येक व्यक्ति को उसकी मेहनत का पैसा मिलना चाहिए,
_मैं बस सोच रहा हूं कि हमने जो पैसा कमाया है, उस पर हमें कहां गर्व होना चाहिए.!!
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,

मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
हर इन्सान कमाता है यहाँ, खुद को सूकून देने के लिए,
उस पर फिर आ जाते हो तुम, उससे उधार लेने के लिए,
फिर रिश्तो को बना देते हो तुम, पैसे माँग माँग कर,
कभी न चलने वाला यहाँ, इक उजङा हुआ कारोबार॥
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
दिन रात मेहनत कर कर ईंसान, कुछ पैसे कमा कर लाता है,
इस शख्स से पैसे माँगते हुए, माँगने वाले का कुछ नहीं जाता है,
माँगने वाला तो पा लेता है खुशियाँ, उन पैसों से यहाँ,
और पैसे देने वाला पैसो की, फिर करता रहता है ईंतजार॥
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार।
जरा सोचो उधार किसी ने यहाँ, कितनी जरूरतें मार कर दिया होगा,
फिर खुद की जरूरत पङने पर पैसे, आने का ईंतेजार किया होगा,
फिर उधार देने वाला शख्स पैसे, अपने पाने के लिए,
आता रहा आपकी चौखट पर, खाली लौटता रहा हर बार॥
सोचो माँग रहे हो जिससे पैसे, उसकी अपनी भी जरूरतें हैं,
पैसे माँग कर क्यूँ बढा रहे हो, किसी और का तुम भार॥
बेशक अपनी जरूरतें अपने, अन्दर ही दफन कर दो,
मगर भूल कर यहाँ किसी से, पैसे न माँगो उधार..
Lekhak MAHESH KUMAR CHALIA.
कमाल के लोग हैं…

_ पैसे लेते हुए आपको सिर्फ अपने जरूरतों का ख्याल रहता है, जब पैसा देना होता है अपनी मजबूरियों का ख्याल रहता है….
_ ये भी सोचा करें कि.. जिनसे हम उधार पैसे लेते हैं..
_ वो अपने जरूरतों को कम कर पैसा देता है..
_ और जब वो अपने पैसे मांगता है तो.. उसे उसकी जरूरत होती है….
— इनमें से ज्यादातर लोग उधार लेकर अपने सारे शौक पूरा करते हैं,
_ ऐसा नहीं होता कि उन्हें खाने के फांके पड़े हैं या पहनने को कपड़े नहीं है या रूम का किराया देना है…
_ आप ऐसा ना करें.. जिससे किसी जरूरतमंद को उधार पैसे देते हुए भी दस बार सोचना पड़ें….
– हेसाम
इंसान के पास जब जरूरत से ज्यादा पैसे आ जाते हैं तो उसे लगता है कि वो दुनियां की हर चीज खरीद सकता है.

_ लहज़े में नर्मी की जगह वो घमंड दिखने लगता है.
_ इस गुरूर में वो रिश्ते नाते सभी को रौंदना शुरू कर देते हैं,
_ लेकिन शायद ये हम भूल जाते हैं कि पैसे जिस तेजी से.. जिस तरीके से आते हैं..
_ उसी तेजी से वो पैसे आने बंद भी हो सकते हैं.
_ पैसे हैं लेकिन जरूरी तो नहीं कि कल हों..
_ लेकिन जो प्यार, इज्जत और अपनापन होता है वो हमेशा ही रहता है,
_ जब पैसे दूर होते हैं तो झूठे रिश्ते भी दूर होते चले जाते हैं और जब पैसे होते हैं तो सच्चे रिश्ते दूर जाते हैं.
_ शायद पैसों का नशा ही ऐसा होता है जो सर चढ़ कर बोलता है.!!
– हेसाम
“क्या पैसा ही सब कुछ है ?”

_ कहना आसान है – “पैसा सब कुछ नहीं होता,”
_ पर हकीकत में यह मानना सबसे कठिन होता.
_ इस समाज में बिना पैसे के कोई पहचान नहीं,
_ जिसके पास धन नहीं, उसकी कोई जुबान नहीं.
_ जिसकी जेब खाली है, उसकी बातें अनसुनी जाती हैं,
_ उसकी पीड़ा, उसकी चीखें भी बेमानी कहलाती हैं.
_ ज़रूरतें ही नहीं छिनती उससे,
_ बल्कि समाज उसे ताने देता है, उपेक्षा की दृष्टि से देखता है.
_ पैसे के बिना— न दवा मिलती है, न राहत,
_ न संतान की मुस्कान, न माता-पिता की चाहत.
_ कई माँ-बाप इलाज न करवा पाने की मजबूरी में
_ चुपचाप दुनिया छोड़ जाते हैं—गरीबी की चादर ओढ़कर.
_ बिना पैसे— न रिश्ते टिकते हैं, न सम्मान,
_ तुम चाहो लाख निभाना,
_ लेकिन वक़्त के साथ साथ, वो सब हो जाते हैं अनजान.
_ कहते हैं—पैसे से प्यार नहीं खरीदा जा सकता,
_ पर प्यार को निभाने के लिए भी जेब भारी होना ज़रूरी लगता.
_ यह दुनिया सपनों को देखती है,
_ पर उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता.
_ जो पैसे के पीछे भागते हैं, उन्हें मत कोसो—
_ वो जानते हैं अभाव का दर्द, वो समझते हैं संघर्ष का अर्थ.
_ वो मुस्कान के पीछे की तकलीफ़ जानते हैं,
_ हर दिन अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हैं.
_ पैसा सब कुछ नहीं होता—सच है.
_ मगर यही वो ज़मीन है,
_ जिस पर खड़े होते हैं रिश्ते, जिम्मेदारी, सम्मान और सपने.
_ जो कहते हैं—पैसे से सुख नहीं आता,
_ उन्हें समझना होगा—
_ सुख तक पहुँचने की राह भी.. पैसे की सीढ़ी से ही जाती है.
_ इसलिए… पैसे से नफरत नहीं,
_ईमानदारी से कमाने की आदत बनाओ.
_ संवेदनाओं के साथ-साथ सक्षम बनो—
_ क्योंकि ज़िंदगी केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि ज़रूरतों की पूर्ति से चलती है.!!
— Rahul
लोग कहते हैं कि पैसा सिर्फ़ बेईमानी से, धोखाधड़ी से, गरीबों को कुचल कर, गरीबों का शोषण करके ही कमाया जाता है.

_ मैं इस बात से सहमत नहीं.
_ यह कामचोर और आलसी लोगों की फैलाई हुई भ्रांति है.
_ यदि आपमें श्रम करने की ताकत है, दिन-रात काम में जुटे रहने का जज़्बा है, सोच-विचार करने की शक्ति है तो आपके पास पैसे को आने से कोई नहीं रोक सकता.
_ पैसे के साथ आपके चेहरे पर मेहनत की चमक भी आएगी, सफ़लता का आत्मविश्वास भी झलकेगा.
_ मेहनत और लगन के रास्ते पर चलना तो शुरू कीजिए.!!
— Manika Mohini
यदि आपके पास बहुत सारा पैसा है तो आप अच्छा खाना खा सकते हो,

_ अच्छे आलीशान सारी सुख सुविधाओं के साथ अच्छे घर में रह सकते हो,
_ अच्छी कार में चल सकते हो, ट्रेन में फर्स्ट एसी में चल सकते हो, यात्राएँ कर सकते हो, दुनिया घूम सकते हो, मनपसंद किताबें पढ़ सकते हो, बच्चों को अच्छी परवरिश के साथ अच्छी शिक्षा दिला सकते हो, मेडिकल इमरजेंसी में अच्छे से अच्छा इलाज करवा सकते हो,
_ इसके अलावा भी बहुत कुछ है.. जो आप पैसे होने पर कर सकते हो.
_ बिना पैसे के आपका जीवन कीड़े मकोड़े जैसा हो जायेगा, न आप अच्छा खा पाओगे, न अच्छी सुख सुविधा ले पाओगे, यात्रा करने से पहले सौ बार सोचोगे, कोई सम्मान नहीं करेगा, कोई साथ नहीं बैठेगा, मेडिकल इमरजेंसी में सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटोगे और भ्रष्ट सिस्टम के हाथों मारे जाओगे, बच्चों को अच्छी शिक्षा और परवरिश नहीं दे पाओगे और एक दिन कीड़े मकोड़े की तरह यह भ्रष्ट सिस्टम आपको कुचलकर मार देगा.!!
– Mayank Mishra
तुम बिलकुल नहीं कमाओगे तो भी लोग कहेंगे नाकारा है.

_ तुम कम कमाओगे तो भी लोग कहेंगे कि क्या ही कमाता है ?
_ तुम लोगों की उम्मीद से ज़्यादा कमाओगे, आलीशान ज़िन्दगी जिओगे तो ही लोग कहेंगे कि नंबर दो की कमा रहा होगा, हराम का पैसा आ रहा होगा.
_ कहने का तात्पर्य यह है कि तुम कुछ भी कर लो.. मगर लोगों का मुंह बंद नहीं करवा पाओगे,
_ इसलिए सबसे बेहतर है कि अपना जीवन मस्ती के साथ आनंदमय होकर जिओ और इस बात कि बिलकुल भी चिंता मत करो कि कौन क्या सोचेगा और कौन क्या कहेगा ? _ तुम्हारा जन्म लोगों को खुश रखने के लिए नहीं.. बल्कि अपना जीवन खुशहाल बनाने के लिए हुआ है.. तो लोगों की परवाह करना ही छोड़ दो.!!
– Mayank Mishra
धन संचय के लियें सबसे कारगर उपाय हैं की आप धन कमाने के अधिक से अधिक रास्ते बनाये.

_ ऐसा देखा गया हैं एक परिवार जिसकी आय के पाँच या पाँच से अधिक नियमित स्रोत हैं वो अमीर हो जाता हैं.
_ और ये भी याद रखे, आपकी आयु जैसे जैसे बढ़ती जायगी आपके लियें नौकरी करना मुश्किल होता जायेगा तो आप आपने पाँच नियमित स्रोत बनाये रख पाये..
_ इसके लियें ज़रूरी हैं आप 40–45 की आयु तक आपके पास सात स्रोत होने ज़रूरी हैं.
_ आय के स्रोत कैसे बनते हैं, वो बताती हूँ.
1. आपकी नौकरी या व्यपार – सबसे पहले आपको एक नियमित आय का स्रोत बनाना हैं ये नौकरी व्यापार कुछ भी हो सकता हैं.. तो आपका वेतन पहला स्रोत है.
2. आपकी हॉबी को आपके अपनी आय के माध्यम में विकसित करना होगा.
आरम्भ में आय कम भी हैं तो चलेगा लेकिन आय नियमित करने का प्रयास करे और ये ज़रूरी हैं की ये स्रोत आपकी हॉबी हो.
3. इन दोनो के माध्यम से अपने परिवार के लियें एक आपातकाल फ़ण्ड बनाये..
और इस फ़ण्ड पर प्राप्त होने वाला ब्याज आपका तीसरा आय का स्रोत होगा.
4. आपातकाल के प्रावधान के बाद आप अपने तीनो स्रोत से होने वाली आय को निवेश करे और ये निवेश आपका चौथा स्रोत बनेगा.
5. अपने जीवन साथी को रोज़गार से जोड़े, (ये व्यक्तिगत विषय हैं, लेकिन स्वस्थ संवाद करे इस विषय पर)
6. 40–45 आयु तक रेंटल प्रॉपर्टी से आय का स्रोत बनाया जा सकता है.
7. इस आयु तक बच्चें भी बड़े हो जाते हैं, तो जीवन साथी की हॉबी को भी आय के स्रोत की तरह विकसित करे.. और ये होगा आपका सातवाँ स्रोत.
_ आरम्भ में स्रोत से कमाई कितनी होती हैं, इसकी परवाह अधिक ना करके सिर्फ़ सुनिश्चहित करें की कमाई नियमित हो और धीरे धीरे आगे बढ़े.
_ इतना सब आय के साधन बना लियें, तो एक स्रोत समाज को वापिस देने का भी बनाये.
_ समाज में या तो ख़ुद कुछ योगदान दे या उन लोगों को आर्थिक योगदान दे जो समाज में बदलाव के लियें काम कर रहे है.
_ अमीर होने का ये आख़री और ज़रूरी पड़ाव है.
– Neha Chandra
हमने बचपन से एक वाक्य बार-बार सुना है पैसा कुछ नहीं होता,

_ लेकिन ज़रा ईमानदारी से पूछिए, क्या यह वाक्य आज की दुनिया में सच है ?
_ अगर पैसा सच में कुछ नहीं होता, तो इंसान की पूरी ज़िंदगी उसी के पीछे क्यों भाग रही होती ?
_ आज अगर हम अपने आस-पड़ोस, अपने रिश्तों और अपने समाज को ध्यान से देखें, तो एक कड़वा सच साफ दिखाई देता है..- जहाँ पैसा है, वहीं खुशी का अभिनय है ; और जहाँ पैसा नहीं है, वहाँ मजबूरी का शोर है.
_ पैसा सिर्फ ज़रूरत नहीं रह गया है, वह अब पहचान, रुतबा और अधिकार बन चुका है..
_ जिसके पास पैसा है, उसके आगे-पीछे लोग घूमते हैं.
_ उसकी बात सुनी जाती है, उसकी गलती भी नज़रअंदाज़ कर दी जाती है.
_ वह समाज में सम्मान पाता है, परिवार में निर्णय लेता है, और रिश्तों में शर्ते रखता है
यानी पैसा अब केवल साधन नहीं, सत्ता है.
_ आज के रिश्तों को ही देख लीजिए..
_ गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड का रिश्ता हो या पति-पत्नी का भावनाओं की जगह अब लेन-देन ने ले ली है.
_ जो ज़्यादा खर्च करता है, वही ज़्यादा प्यार करने वाला कहलाता है.
_ महंगे गिफ्ट, महंगे होटल, महंगी लाइफ, यही आज के प्रेम के प्रमाण बन चुके हैं.
_ और सच तो यह है कि जब एक व्यक्ति दूसरे पर जरूरत से ज़्यादा पैसा खर्च करता है
तो रिश्ता बराबरी का नहीं रहता..
_ वह धीरे-धीरे आश्रित और कभी-कभी गुलाम बन जाता है.
_ क्योंकि आज खुशी का मतलब आज़ादी नहीं, सुविधा है,
और सुविधा बिना पैसे के संभव नहीं.
_ लोग कहते हैं प्यार चाहिए, पैसा नहीं..
_ लेकिन सवाल यह है कि बिना पैसे के प्यार कब तक जिंदा रहता है ?
_ भूख, इलाज, शिक्षा, घर, सम्मान इन सबके सामने प्रेम अक्सर हार मान लेता है.
_ इसलिए आज का यथार्थ यही है कि प्यार भी तभी सांस ले पाता है जब उसके पीछे पैसा खड़ा हो.
_ आज की दुनिया में रिश्ते खुद-ब-खुद नहीं बनते, उन्हें बनाए रखने के लिए साधन चाहिए और वह साधन है पैसा.
_ दोस्ती भी वहीं टिकती है.. जहाँ जेब बराबर हो.
_ गरीब की दोस्ती सलाह बन जाती है और अमीर की दोस्ती संपर्क.
_ परिवार में भी वही सदस्य महत्वपूर्ण माना जाता है जो आर्थिक रूप से मजबूत हो.
_ जिसके पास पैसा नहीं.. उसकी राय भावनात्मक कहकर टाल दी जाती है.
_ आज आप यह लेख पढ़ पा रहे हैं, क्योंकि आपके मोबाइल में रिचार्ज है, बिजली है, इंटरनेट है, सिस्टम है.
_ इन सबके पीछे भी पैसा ही खड़ा है.
_ यानी सच यह है कि हम पैसे की वजह से ही दुनिया को देख समझ और महसूस कर पा रहे हैं.
_ यह कहना गलत नहीं होगा कि.. आज पैसा सबसे बड़ा रिश्ता बन चुका है.
_ पिता से बड़ा, मित्र से बड़ा, प्रेम से बड़ा..
_ क्योंकि वही तय करता है कि आपकी आवाज़ कितनी दूर तक सुनी जाएगी.
_ यह लेख पैसे की पूजा नहीं करता.. लेकिन इस झूठे आदर्शवाद को जरूर तोड़ता है
कि पैसा कुछ नहीं होता.
_ पैसा सब कुछ नहीं है.. लेकिन पैसे के बिना आज लगभग कुछ भी नहीं है.
_ यही आज की दुनिया का सबसे कड़वा, सबसे सच्चा और सबसे अनकहा सच है.!!
– लेखक की दुनिया
पैसे की ताकत से अभिभूत हूं, हालांकि ये कुछ नहीं करता है, करता आदमी ही है, पैसा को बनाया भी आदमी ने ही है, पर फिर भी ये आदमी की दुनिया में अद्भुत शक्ति बनकर उभरा है.

_ पैसा विरोधी मानसिकता भी मूर्ख होने का सबूत है, बिल्कुल पैसे की दीवानगी की तरह ही.
_ किसी भी दूसरे महत्वपूर्ण आविष्कार की तरह पैसा भी अपना सही उपयोग चाहता है.
_ अच्छी मात्रा में पैसा हो तो आदमी कितना आश्वस्त रहता है कि किसी भी सिचुएशन से डील किया जा सकता है.
_ पैसा न हो तो आदमी लगातार आशंकित रहता है.
_ पैसे का अभाव आदमी को सिकोड़ देता है.
_ पैसे को सबकुछ मानना और पैसे को गाली देना दोनों ही दो अतियां है.
_ पैसे का सच कहीं बीच में है.
– Shailendra Sudharma

सुविचार – ग़लती – गलती – गलतियां – गलतियाँ – ग़लत – गलत – भूल – मिस्टेक – 004

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आगे बढ़ने के लिए यह जरुरी है कि हम गलतियों को दोहराएं नहीं. उनसे सबक लें

और खुद से वादा करें कि यह गलती दोबारा बिल्कुल नहीं होगी.

कनाडा के प्रसिद्ध लेखक रॉबिन शर्मा ने कहा था — “गलती जैसा कुछ होता ही नहीं, सब कुछ एक नई सीख है.”

अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा — “अगर कोई कहता है कि उसने कभी गलती नहीं की, तो इसका मतलब उसने कभी कोई कोशिश ही नहीं की.”
बेंजामिन फ्रैंकलिन कहते हैं — “प्रगति एक सतत प्रक्रिया है — प्रयास और गलतियों का मिश्रण.”
रिचर्ड ब्रानसन के अनुसार, “कोई भी नियमों को पढ़कर चलना नहीं सीखता, चलना सीखने के लिए लड़खड़ाना और गिरना ज़रूरी है.”
‘जो गलत है’ हम उसे अलग कहते, उससे अलग हो जाते तो कोई बात न थी,

_ पर न जाने क्यूं, जो हमसे अलग है, ‘हम उसे भी गलत ठहराने लगे.!!

गलत लोग, गलत परिस्थितियाँ, और इनसे मिला अनुभव, सही निर्णय लेना सिखा ही देता है..!!
अपने द्वारा की गई गलतियों के लिए स्वयं को क्षमा करें ; _ कल की असफलताओं और निराशाओं को जाने दें और नई और नई शुरुआत करें.

” आप कहाँ जा रहे हैं यह कहीं अधिक महत्वपूर्ण है न कि आप कहाँ थे.”

Forgive yourself for the mistakes you’ve made. Let go of the setbacks and disappointments of yesterday and start fresh and new. Where you’re going is much more important than where you’ve been.

आप की ग़लती हो या ना हो आप तुरंत आगेवाले की बात मान जाते हो.

_ और माफ़ी माँगने से भी पीछे नहीं हटते ..तो “ये आप को और भी श्रेष्ठ बना देता है”

गलतियाँ मानव विकास के विस्तार का आधार हैं, गलतियों के बिना हम कभी महसूस नहीं कर पाएंगे कि हम वास्तव में कौन हैं ; _ अगर हमें गलत होने का हुनर ​​नहीं दिया गया होता, तो हम जीवन की अनंत संभावनाओं को कभी महसूस नहीं कर पाते.

हम सही और गलत विकल्पों के बीच चयन करके अपने तरीके से सोचते हैं, और गलत विकल्पों को उतनी ही बार बनाना पड़ता है जितनी बार सही विकल्प. हम जीवन में इस तरह से साथ चलते हैं ;

हम गलतियाँ करने के लिए बने हैं, एक तरह से गलतियाँ करने और असफल होने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं.

हम सीखते हैं, जैसा कि हम कहते हैं, “परीक्षण और त्रुटि” से अपनी गलतियों को सही ठहराने के लिए, हम अपनी और दूसरों की गलतियों को खुले तौर पर स्वीकार क्यों नहीं कर सकते.

_ अगर हम अपनी (अपनी या आपकी ) गलतियों को उसी सम्मान के साथ स्वीकार करना सीख लें, तो शायद हम एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं, जहां ज्यादा से ज्यादा लोगों में वह जीने का साहस हो, जो उनका दिल उन्हें बताता है.

Mistakes are at the very base of expansion of human growth, without mistakes we will never realise who we really are. If we were not provided with the knack of being wrong, we could never realise the infinite possibilities of life.

We think our way along by choosing between right and wrong alternatives, and the wrong choices have to be made as frequently as the right ones. We get along in life this way.
We are built to make mistakes, in a way, designed to commit errors and fail.
We learn, as we say, by “trial and error”to justify our mistakes, Why we cannot openly accept ours and others mistakes.
Only if we learn to accept mistakes (mine or yours) with the same reverence, then maybe, we might create a world where more people have the courage to live what their heart tells them to.
‘गलत’ गलत होता है.

_ कोई भले न रोके, न टोके ..लेकिन आत्मा का लालन-पालन ऐसा होना चाहिए कि ..वही आपको रोक ले.

सामने से आकर यदि कोई हमसे पूछे, तभी हमें उसे उसकी गलतियाँ बतानी चाहिए;

_ उन्हें उनकी गलतियाँ बताने से बेहतर है कि.. हम शांत और चुप रहें,
_ क्योंकि आजकल लगभग हर व्यक्ति अपने अहंकार भाव से संचालित हो रहा है.
_ अगर आप किसी का भला करेंगे, तो भी आपको ही दोषी ठहराया जाएगा.!!
लोगों को बार-बार बताना छोड़ दीजिए कि वो ग़लत क्या कर रहे हैं..

_ शांत रहकर अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ जाओ.. इससे बेहतर उन लोगों के लिए दूसरा कोई जवाब नहीं.!!

गलतियाँ करते-करते इतने गलत हो गए हैं कि ..हम किसी भी चीज़ को सही नहीं मानते..

_ और जो सही कर रहे हैं उनमें भी गलतियाँ निकालने लगते हैं.!!

मन का ना होना बुरा नहीं लगता..

_ ‘जो सही है’ उसके साथ गलत होना बुरा लगता है.!!

इस दुनिया में कौन है जो अपनी गलती सहजता से स्वीकार करता है ?

_ आदमी अपनी गलती के बचाव के लिए तर्क तलाश लेता है.

यदि कोई आपकी गलती को सुधारता है..तब भी आपको बुरा लगता है तो..

_ आपको अपने स्वभाव में परिवर्तन लाने की जरुरत है.!!

गलती किसी से भी हो सकती है, लेकिन किसी को धोखा देना और उससे झूठ बोलना.. गलती नहीं मर्जी होती है.!!
अब अपने साथ ग़लतियों का बोझ लेकर घूमना छोड़ दीजिए, _ गुज़रे हुए वक्त की गलतियों के लिए बार-बार अफसोस करना बंद कीजिए, _

_ जिसके लिए आपको अभी भी अफ़सोस है, शायद पहले आप इतना अनुभवी और परिपक्व नहीं थे.

हर बार बात सही गलत की नही होती..

_ कई बार ऐसा होता है कि हम किसी ऐसी बात पर असहमत हो रहे होते हैं, जिसको समझने के लिए हम उस समय योग्य नही होते.!!
कई लोग ऐसी गलती करते हैं, जिनके लिए उन्हें काफी माफ़ी नहीं मिलनी चाहिए.. _ ऐसा करके उनकी गलती को बढ़ावा मिलता है… और उन्हें एहसास भी नहीं होता..
_ सज़ा मिले तो ही पता चलता की गलती की थी उन्होंने.!!
आपके साथ ग़लत करने वालों से बदला लेने की बजाय..

_ आपको उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए,

_ क्योंकि ऐसे लोग अंत में ख़ुद को ख़ुद से ही तबाह कर लेते हैं.!!

उन लोगों से सदैव दूरी बना कर रखें.. जो कभी ख़ुद की गलती नहीं मानते..

_ और हर गलती का दोष आपके माथे मढ़ देते है.!!

गलत करना नहीं और गलत सहना नहीं, मैं तो वही करते आया हूँ.

_हाँ गलत का साथ देना भी गलत करने के बराबर ही है.!!

बहुत से लोग गलत चीज़ चुनते हैं, हमें उन्हें सही चीज़ चुनने में मदद करनी चाहिए.!!
इंसान हैं तो गलतियां लाज़िमी हैं.

_ अपनी गलतियों से सीखना चाहिए.

_ इंसान सोच समझ के सही ही फैसला लेता है ..अब वो आगे जाकर गलत निकल जाए तो उसके लिए ख़ुद को कोसना सही नहीं है.

_ ज़िंदगी सुकून से बीते उसके लिए ज़रूरी है ..दूसरों से माफी मांगने के साथ ख़ुद को माफ़ करना सीखना.

_ इंसान सब करता है ..लेकिन खुद को माफ़ नहीं करता.

अ-कृतज्ञ [ungrateful] व्यक्ति अपने घमंड तले दबकर मर जाएगा और पूरे जीवन भर कुछ भी उल्लेखनीय नहीं कर पाएगा…

कृतज्ञ [grateful] होना, विनम्र होना, धन्यवाद देना और गलती की माफ़ी मांगना मनुष्य होने की पहली शर्त है,

_ जो इनसे हीन है वह अभागा है जो मनुष्य होते हुए भी मनुष्यता से परे है..

हर व्यक्ति में सही और गलत की समझ होनी चाहिए और सही का समर्थन करने की क्षमता भी होनी चाहिए.!!
” हमेशा याद रखें कि _ इस तरह से बोलना असंभव है कि आपको गलत न समझा जाए : हमेशा कुछ ऐसे होंगे जो _ आप को गलत समझेंगे ही “
कई बार किसी को बार – बार समझाने से अच्छा, उसे उसकी गलतियों के साथ अकेला छोड़ देना होता है..!!
जब लोग आपको गलत बोलते हैं तब परेशान होने की जरूरत नहीं ;

_ वास्तव में आप परेशान तो तब हो, _ जब लोग आपको देख ही न रहे हों ;

क्योंकि आज नही कल आप गलतियां तो सुधार ही लेंगे..!!

इंसान में गलत साबित होने से बचने की प्रबल इच्छा होती है.

कुछ समय के लिए, उनका पूरा अस्तित्व स्वयं को सही साबित करने और आत्म-संतुष्टि के इर्द-गिर्द घूमता है.!!
लोग आपमें सिर्फ खामियां और गलतियां ढूंढते हैं, इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके साथ आपने कभी अच्छा व्यवहार किया था,

_ लेकिन जब मौका निकल जाता है तो वे भी आपकी अच्छाइयों को भूल जाते हैं.!!
उन लोगों से दूरी बनाए रखें, जो कभी स्वीकार नहीं करते कि वे गलत हैं ; और

हमेशा आप को यह महसूस कराने की कोशिश करते हैं कि यह सब आप की गलती है.

उन गलतियों की कोई माफ़ी नहीं होती, जहां आप जानते हैं,

_ क्या सही है ; क्या गलत है ; लेकिन जान- बूझकर गलत का चुनाव करे.

समझदार इनसान तो वही है, जो दूसरों की गलती से भी सबक ले ले.

जरुरी नहीं कि सुधार के लिए खुद ही गलतियां की जाएं.

बहुत सी बातों की, हमें लगता है, कोई वजह नहीं है लेकिन फिर भी वे ‘बेवजह’ नहीं होतीं.

_ उनके होने की वजह उनके सही या गलत हो चुकने के बाद समझ आती है.!!
गलत, गलत होता है और सही, सही होता है.

_ गलत को सही साबित करने के लिए कोई दलील नहीं दी जा सकती.!!

इस बात से मत डरिए कि लोग आपकी पीठ पीछे आपके बारे में क्या कहते हैं,

_ क्योंकि ये वही लोग हैं जो अपनी कमियों को सुधारने की बजाय दूसरों में गलतियाँ निकालने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.

हक़ पर रहना सीखा है, सीखा है कि गलत हर हाल में गलत होता है,

_ सीखा है कि सही बोलने से कभी न हिचको.

जब किसी को अपने किए कामों को सही साबित करने का कोई सही तरीका/तर्क नहीं मिलता..
_ तो ऐसे लोग गलत तरीकों पर उतर आते हैं.
कोई गलत को गलत कह दे तो भी हजम नहीं होता है लोगों से..

_ गलत को गलत क्या “खाक” मानेंगे ?
_शायद हमें पहले सही-गलत को समझने और मानने की आदत डालनी होगी.
अपनी गलती मानना अच्छी बात है. लेकिन उतना ही जरुरी है खुद को जल्दी से माफ़ कर देना.

गलती से सीख ले कर उसे भूल जाना सही है.

सही और गलत की असली परीक्षा आपके मन के भीतर होती है.

_ आप मन में खूब जानते हैं कि आप जो कर रहे हैं वो सही है या गलत ?

_आज आप किसी के आदेश पर गलत कर रहे हैं तो _मन की आवाज़ एक बार ज़रूर सुनें..

किसी के साथ भी ना होना,

_ किसी ग़लत इंसान के साथ होने से तो बेहतर ही होता है.!!

यदि आप सोचते हैं कि आपने कुछ गलत किया है, तब अपने आप को दोष न दें !

_ जीवन में प्रत्येक अनुभव एक सीढ़ी है, उन ‘गलतियों’ सहित, जिन्हें आपने कभी किया था.
_ अपने को प्रत्येक गलती के लिए प्यार करें, वे आप के लिए बहुत बहुमूल्य रहीं हैं.
_ उन्होंने आप को बहुत सी बातें सिखाई हैं.
_ अपने आप को दोषी ठहराना बंद करें.
_ इसी प्रकार से आप सीखते हैं.
_ अपने आप को सिखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेम करें.
कुछ गलतियों की माफियां शब्दों में तो मिल जाती हैं, पर अंतर्मन नहीं दे पाता !!

_ फिर सौंप दिया जाता है उसको, प्रकृति और रब के हवाले !!
_ क्योंकि जब इंसान खामोश हो जाता है, फैसले ऊपर से होते हैं.!!
शायद ही हममें से कोई हो, जिसने अपनी जिंदगी में गलतियां न की हों, मैंने भी की हैं, _लोगों का दिल दुखाया है, उन्हें कष्ट पहुंचाया है.

_ पर आज मैं बस इतना जानता हूँ कि विषाद कितना भी गहरा हो, उससे बीता हुआ कल कभी बदल नहीं सकता.
_ आज बस यही किया जा सकता है कि बीते हुए कल की सीख लेकर आगे बेहतर इंसान बनने की कोशिश की जाए.
_ बस यह याद रखते हुए…. कि जो बीत गया, वो जिंदगी का एक छोटा सा किस्सा था – पूरी जिंदगी नहीं.
कभी अगर गलती हुई है, तो पछताओ, सुधारो..

_ दूसरों को नीचा दिखाकर, धोखा देकर कभी आत्मिक शांति नहीं मिलती.
_ किसी का हक मत छीनो, किसी का विश्वास मत तोड़ो..
_ जीवन यही है, एक बार ही मिलता है – इसे सुंदर बनाओ..
_ दूसरों को जिता कर हारो, तुम्हारी वही हार असली जीत होगी.!!!
अपने मन में झाँक कर बताओ,

_ क्या आप सचमुच नहीं जानते ?

_आप कहां सही हैं और कहां गलत..!!

एक छोटी-सी भूल, पूरे दिन की मुस्कान छीन लेती है और मन में एक खामोश-सी बेचैनी छोड़ जाती है.. जो बिना कुछ कहे, हर पल अंदर ही अंदर हलचल करती रहती है.!!
षड्यंत्र करने वाले को देर-सबेर अपनी गलती समझ आती है,

_पर तब तक देर हो जाती है..!!

आपको ‘सही’ बताने वाले तमाम लोग आपके एक ‘ग़लत’ के इन्तिज़ार में बैठे हैं.!!
कुछ लोग इसलिए भी आपको गलत ठहराते रहते हैँ,

_ ताकि खुद गलत होते हुए भी ..उन्हें खुद की नजरों में शर्मिंदगी महसूस ना हो..!!

यदि आप किसी की गलतियों की हद नहीं बताएंगे,

_ तो एक दिन आपको अपनी माफियों पर शर्मिंदा होना होगा..!!

हमारी खूबियों का बखान कोई नहीं करेगा,

_ लेकिन हमारी गलतियों का बही खाता सबके पास है..!!

आजकल लोग गलत काम करने पर माफ़ी नहीं मांगते, बल्कि हम कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, इसके लिए वे हमें दोषी ठहराते हैं.
अपनी ग़लतियों को दूसरों पर न थोपें, इस तरह आप खुद के साथ धोखा करते हैं और दूसरों का विश्वास भी खोते हैं.
परिस्थितियां कैसी भी हों, तुरन्त प्रतिक्रिया न दें. आपकी जल्दबाजी, गलत निर्णय करवाती है.

खुद को कुछ समय अकेला छोड़ दें और चिंतन करें.

गलती कौन नहीं करता है. जो व्यक्ति काम करता है, वही गलतियां भी करता है.

इसलिए खुद पर विश्वास बनाये रखें और सतर्क रहें.

समय रहते गलत जगह से निकल जाना हार नहीं बल्कि आशीर्वाद है,
_ जो आपको भविष्य में किसी भी बड़ी तबाही से सुरक्षित रखता है.!!
यदि आप किसी को गलत समझने की इच्छा रखते हैं,

_ तो आप उन्हें गलत समझने के हजारों तरीके ढूंढ लेंगे.!!

अपने बीते हुए कल की गलतियां जानकार उनमें सुधार करें, फिर उस पर कफन ओढ़ा दें;

_ क्योंकि भूतकाल बुरा नहीं है बल्कि वह मर चुका है.

रबर की तरह घिसने वाले लोग दूसरों की गलतियाँ मिटाते-मिटाते..
खुद भी मिट जाते हैं और किसी को याद भी नहीं रहते.!!
दूसरों की गलतियाँ माफ़ करने से कभी पोछे नहीं हटना, यह आपके बड़प्पन की निशानी है

किन्तु अपनी गलतियों को कभी छमा नहीं करना, यह भी बड़प्पन की निशानी है.

इंसान वही होता है जो खुद की गलती माने और सुधारें,_ गलती न मानने वाला इंसान,

_ चाहे हमारा कितना भी करीबी और खास क्याें न हो, _ दिल से दूर चला ही जाता है.

कितने अजीब होते हैं लोग, गलत साबित होने पर माफ़ी नहीं मांगते ;

_ बल्कि आप को गलत साबित करने में अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं !!

खुद को माफ़ करना सीखो, आपकी हर गलती इस बात का सबूत है कि आप ‘कोशिश’ कर रहे हो.!!
हमें अपनी गलतियों की सज़ा भले ही तुरंत न मिले,

परंतु समय के साथ कभी न कभी सज़ा अवश्य मिलती है.

जो शख्श गलती करके उसका अहसास कर लेता है और भविष्य में गलती ना करने का निर्णय कर लेता है,

_ वह जीवन में बुलंदियों को छूता है.

सुधर वही सकता है, जिसे पता है कि वह गलत कहाँ है ;_ यही कारण है की लोग माफ़ी भी मांगते हैं,

गलती न करने के वादे भी करते हैं और फिर भी वही गलतियां दुहराते हैं.

किसी कि कही हुई बातों पर पूरा भरोसा मत करो ; अपनी बुद्धि का भी प्रयोग करो.

क्यूंकि कोई भी व्यक्ति आपको वह कहानी नहीं सुनाएगा, जिसमें वह खुद गलत हो !!

गलत को सही कहने की आदत.._ आपको इतने गहरे गर्त में ले जाएगी कि

_जिसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते.

जब हम सही करते हैं तो कोई याद नहीं रखता ;

_ जब हम गलत करते हैं तो कोई नहीं भूलता.!!

ग़लत को ग़लत कहेंगे तो बहुत सारे लोग छूट जायेंगे,

_मतलब छोड़ देंगे आपको..!!

जब आप एक बार तय कर लेंगे कि गलत का साथ नहीं देना है,

_ तो उसका मुकाबला नहीं करना होता है, उसे छोड़ देना होता है.!!

“गलत को तो सुधार लिया गया,
_ पर जो टूटना था, वह टूट चुका था”
कोई व्यक्ति ,,,एक बार गलती करे तो – कोई बात नहीं !!

दो बार गलती करे तो – होता है, इंसान है !!

तीसरी बार गलती करे तो – इनसे दूर ही रहना !!

क्योंकि ये उसकी गलती नहीं आदत है !

अगर तुम्हे किसी की कोई बात गलत लगती है तो तुरन्त प्रतिक्रिया दो _

_ क्योंकि उस समय का मौन बाद का पछतावा या कुण्ठा बनता है..

भूल जाना भी ग़र कोई हुनर होता …

_ ख़ुदा क़सम उससे हुनरमंद दुनिया में कोई होता ही नहीं !

गलत जानकारी को मन में बिठा कर जीवन जीना गलत है..

_जीवन में सच अवश्य जानना चाहिए..!!

आप अपनी गलतियों को सुधारने के लिए कितनी मेहनत करते हैं,

_इससे आपके बारे में पता चलता है.

किसी सही व्यक्ति को बार-बार आजमाने की गलती मत करना,

_क्योंकि हर बार हार आपकी ही होगी..!!

बात सही गलत की नही होती..

_ कई बार ऐसा होता है, कि हम किसी ऐसी बात पर असहमत हो रहे होते है.
_ जिनको समझने के हम उस वक्त योग्य नही होते…!
कई बार हम सही होते हैं.. फिर भी समय के गलत फेर की वजह से गलत साबित हो जाते हैं.!
जब कोई गलत को पनपने देता है तो..वो भी उसकी चपेट में आएगा ही..!!
सब कुछ जानते हुए भी _ अगर आप _ गलत को गलत नहीं कह सकते तो ; आप भी गलत हो..
होते वक़्त गलतियाँ कष्टकारी होती है, लेकिन सालों बाद इन्हीं गलतियों के संग्रह को हम अनुभव कहते हैं !!
” हो जाती हैं गलतियां,” पता चल जाये तो सुधार लेना चाहिए, _ जीवन फिर से सहज़ जीने के लिए..
अगर हमारी स्थिति में कोई कमी हो, तो एक बार अपने मन में झांकना चाहिए कि कहीं…भूल कर कोई भूल तो नहीं हुई न ?
अगर आप किसी का भला चाहते हैँ तो सही को सही, और गलत को गलत, बताने की छमता रखो..!!
यदि आप गलतियां नहीं कर रहे हैं तो इसका मतलब है आप शत- प्रतिशत प्रयास नहीं कर रहे हैं.
आप चाहे जितने भी होशियार हो. आप गलतियाँ करेगे हीं. _ और इससे आप बेहतर हीं बनेंगे.
गलतियां हमेशा छमा की जा सकती हैं, यदि आपके पास उन्हें स्वीकारने का साहस हो.
जो लोग हमेशा अपनी गलतियों पर ध्यान देते हैं, एक दिन वे ही बुद्धिमान कहलाते हैं..
ग़लती करने के बाद ही खुद को सुधारने और अधिक बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है.
गलतियां कीजिए वो तो सबसे होती है,,,,पर कभी किसी के साथ गलत ना कीजिए.
गलतियां करना गलत नहीं है; _ लेकिन किसी के साथ गलत करना; बहुत गलत है..
आप हज़ार गलतियां कीजिये.._ पर ध्यान रहे किसी के साथ गलत मत कीजिये…
कहा गया है कि _ गलतियों से मत घबराइए, गलती वही करेगा जो काम करेगा …
अगर आप अपनी गलतियों से सीख़ लेते हैं तो गलतियाँ आपके लिए सीढ़ी है.
इन्सान अपने को चाहे कितना ही समझदार क्यों न कहे, पर गलतियाँ तो करता ही है.
विवेकशील मनुष्य दूसरों की ग़लतियों से अपनी गलतियाँ सुधारते रहते हैं.
भूल भी ठीक की तरफ ले जाने का मार्ग है ;_ इसलिए भूल करने से डरना नहीं चाहिए.
अपनी ग़लतियों को इसलिए बताएँ ताकि होश सँभालने वाले लोग उन ग़लतियों से कुछ सबक लें.
गलतियां इंसान से होती हैं, इसलिए माफ़ी भी मिलनी चाहिए..!!
गलत करने वाले से, गलत का साथ देने वाला ज्यादा बुरा लगता है.!!
दूसरों की भूलों से बुद्धिमान लोग अपनी भूलें सुधारते हैं.

होती हैं गलतियां हर एक से मगर, _ कुछ जानते नहीं, कुछ मानते नहीं.

गलतियां सबूत हैं इस बात की, आप ने जीतने की कोशिश ख़ूब की है..
” गलती को स्वीकारना, आदमी को दोबारा गलती करने से रोकता है,”
कुछ तो गलत है हमारे जीने में, नमक कुछ कम हो गया लगता है पसीने में..
सब कुछ ठीक होने से पहले, बहुत कुछ ग़लत भी ज़रूर होता है.!!
ग़लतियों से सीख लें और उसी के अनुसार आगे का रास्ता प्लान करें.
ग़लती होने के डर से अपने कदम आगे नहीं बढ़ाना – समझदारी नहीं.
गलत को गलत और सही को सही कहने वाले लोग..
_ जल्दी किसी को सहन नहीं होते.!!
जो अपनी गलती मानने की बजाय आपको गलत ठहराए ; उससे दूर रहने में ही शांति है.!!
गलत होते देख कर बर्दाश्त नहीं करना, यह एक स्वभाव होता है.
गलती चाहे भूल जाओ, लेकिन उससे मिला सबक़ हमेशा याद रखो..
होती है गलतियां हर एक से, मगर कुछ जानते नहीं कुछ मानते नहीं !!
गलत की हिमायत अज्ञानी या गलत इंसान ही कर सकता है.
जो लोग अपनी गलती खुद नहीं मानते, _ वक़्त मनवा लेता है.
गलतियां होती रहती है, बस इरादे गलत नहीं होने चाहिए..!!
दूसरों को ग़लत कहने से पहले आपका सही होना ज़रूरी है.
गलती करना बुरा नहीं है, _ गलती से सीख ना लेना बुरा है.!
किसी को मत समझो, लेकिन गलत मत समझो..!!
गलत को गलत कह सको, बस इतने सही रहो..!!
स्वीकार की हुई गलती एक विजय है ….!
**गलती करना इंसान की फितरत है, लेकिन अपनी गलती को पहचानना और उस पर पछताना भी उतना ही ज़रूरी है.

_ आजकल समस्या यह नहीं है कि लोग गलतियाँ करते हैं.
_ समस्या यह है कि बहुत से लोग अपनी गलतियों को गलती मानना ही छोड़ देते हैं.
_ वे उन्हें छिपाते हैं, सही ठहराते हैं, और कभी-कभी उन पर गर्व भी करने लगते हैं.
_ मुझे लगता है कि ऐसे लोग अपने किए हुए पर एक बार रुककर सोचें,
_ यह देखें कि उनके कारण किसी को चोट तो नहीं पहुँची.
_ क्योंकि जिस दिन इंसान अपनी गलती पर पछताना छोड़ देता है, उसी दिन उसके भीतर कुछ महत्वपूर्ण मरने लगता है.
_ गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करो.
_ जिसे दुख पहुँचाया है, उससे माफ़ी माँगो.
_ और जहाँ तक हो सके, वही गलती दोबारा मत दोहराओ.!!

सुविचार – डायरी – 003

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सफल लोगों के तमाम नुस्खों में से एक नुस्खा है, अपने साथ हमेशा एक डायरी व पेन रखना, तो आप पायेँगे कि हर सफल व्यक्ति ऎसा करता है, यह सही तरीका है.
ये डायरी लिखना न मेरे लिए बहुत शानदार रहता है, _ मैं दिनचर्या में कुछ वक्त निकाल कर कुछ ऐसे चीजों को लिख लेता हूँ, _

_ जो मैं कभी किसी को कह नहीं सकता ; लेकिन मैं यहां लिखकर अपने मस्तिष्क के असीम बोझ को हल्का कर लेता हूँ..!!

विचारों को कागज़ पर आकार दें, क्योंकि आकार मिल जाने के बाद आप उनका अध्ययन कर सकते हैं, उनकी कमियाँ देख सकते हैं और फिर उनमे सुधार कर सकते हैं.
हर चीज सिस्टमेटिक तरीके से करें. अपनी योजनाएँ डायरी में लिखें, मुख्य चीजों की सूची बनाएँ, चेक करें कि कौन- कौन सा काम हो गया है.
एक छोटी डायरी रखें और प्रत्येक जरुरी काम उस में लिख लें, इससे आप कुछ भूलेंगे नहीं और याद रखने का तनाव भी नहीं झेलना पड़ेगा. कार्य पूरे करते जाएँ उसे काटते जाएँ, आप पायेंगे कि आपके सभी काम आसानी से हो रहे हैं.
अपने डेली प्लान को डायरी में नोट करें, डेली प्लानर का सब से बड़ा फायदा यह होता है कि आप किसी भी कार्य के लिए पहले से मानसिक रूप से तैयार होते हैं. सो, सफलता मिलना लगभग तय हो जाता है.
मैं अपने अनुभवों को शब्द देना पसन्द करता हूँ, जिसे साधारण भाषा में डायरी लिखना कह देते हैं. _

_ अक्सर मन की बात जबान तक आते- आते या औरों तक जाते- जाते अपने मायने बदल लेती है._

_ डायरी ही वह दोस्त है, जो हमारी अंतरंग सचाइयों को हूबहू खुद में सम्भाले रखती है.

व्यक्ति को हर रोज दिन पूरा होने पर लिखना चाहिये कि आज उसने क्या-क्या किया? क्या खोया, क्या पाया? आपने अगर कुछ नया किया है, तो उसे डायरी में लिखें.

डायरी लिखने के जो फायदे हैं, वो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं. क्योंकि आपकी पर्सनल डायरी आपका आइना बनकर उभरती है. आपने कहां गलती की, कहां समझदारी, कब किसी का दिल दु:खाया, कब किसी को खुश किया, कहां फेल हुए कहां पास और जीवन में आज क्या नया किया, यह सब आप पर्सनल डायरी में लिखते हैं.

डायरी लिखने से इंसान का स्वयं का विकास होता है। इसलिए आप कहीं भी जाइये.. अपने अनुभव आकर जरूर डायरी में लिखिये. फिर जब कुछ दिनों बाद आप उन पन्नों पर पलटेंगे तोआप को ही अच्छा लगेगा और आपके दिमाग में नये विचार आयेंगे. डायरी लिखना एक खूबसूरत आदत है.
डायरी लिखने का सबसे बड़ा फायदा है कि इंसान के पास हर चीज का रिकार्ड मेंटेन रहता है, अपने और अपनों से जुड़ी बातें अगर आप रोज डायरी में लिखेंगे तो आप कभी भी चीजों को भूल नहीं पायेंगे.
दिन भर भाग-दौड़ करने के बाद जब आप रात में डायरी लिखने बैठते हैं तो लिखते-लिखते ही आप को प्यारी सी नींद आ जाती है और आपको किसी भी दवा की जरूरत नहीं, यानी दूसरे दिन आप तरो-ताज़ा महसूस करते हैं.
आजकल भागम भाग भरी लाइफ में इंसान के पास अपनों के लिए वक्त ही नहीं होता है, ऐसे में डायरी की वजह से इंसान को अकेलापन महसूस नहीं होता, उसकी खुद से दोस्ती हो जाती है और वो कभी अवसाद ग्रसित नहीं होता.
डायरी के कारण आप स्वयं का आंकलन कर सकते हैं, आप अपनी क्षमता का ब्यौरा देखकर खुद को सुधारने का मौका दे सकते हैं और आगे बढ़ने के लिये तय कर सकते हैं कि आगे आपको क्या करना है.
अगर आप डायरी लिखते हैं तो आपकी याददाश्त हमेशा मजबूत रहेगी, ना तो आप अपने किसी क्लोज का बर्थेडे भूलेंगे और ना ही एनिवर्सरी.
रोज़ाना अपनी टू डू लिस्ट अपडेट करें यानी दिनभर में आपको जो भी काम करना हो, उसकी लिस्ट बनाएं.
डायरी में लिखीं आपकी भावनाएं आपको सुख-दुख का एहसास कराती हैं और इसी कारण आप मानसिक रूप से मजबूत होते हैं.
डायरी लिखने से इंसान के अंदर एक नियम बद्ध काम करने की आदत पड़ती है जो कि सफलता का मूल मंत्र है.
डायरी लिखने से आप के लेखन में सुधार होता है जो कि आपको भीड़ से अलग करता है, यानी भाषा में आपकी पकड़ मजबूत होती है. अच्छे शब्द भी जहन में आते हैं.
इंसान दिन भर में बहुत कुछ सोचता है लेकिन उन विचारों को गति दे नहीं पाता, अगर आप अपने विचारों को रोज डायरी में लिखेंगे तो आप जरूर अपनी सोच और विचार को आकार दे पायेंगे.
डायरी में आप दूसरे लोगों के अनुभव भी लिखें जिससे कि आपके अंदर दूसरों के अनुभवों से भी सीखने की आदत डेवलप होगी जो कि सफलता का मूल मंत्र हैं.

सुविचार – किताबें – 002

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बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा पुस्तकों से प्रेम करते हैं.
पुस्तक एक बगीचा है, जिसे जेब में रखा जा सकता है.
मैं एक ऐसा व्यक्ति हूँ जिसे दोस्त की नहीं, पुस्तकों की आवश्यकता है…!!!
सर्वश्रेष्ठ किताबें वही बातें बताती हैं _ जो आप पहले से जानते हैं.
जो बहुमूल्य ज्ञान किताबें हमें देती हैं, _ नयी दुनिया के दरवाज़े खोल देती हैं ..
किताबें दुनिया की बेशकीमती दौलत हैं और ये पीढ़ियों और देशों की विरासत संजोए हुए हैं.
जिस व्यक्ति के हाथों में एक अच्छी किताब है, तुम उस से जीत नहीं सकते .. _

_ अगर फ़िर भी जीतना चाहते हो तो _ अपने हाथों में उस से बेहतर किताब रखो ..

हर किसी की जिंदगी में कुछ अच्छी किताबों का होना जरुरी है. किताबें सिर्फ मनोरंजन या परीछाएं पास करने के लिए नहीं होतीं, जिंदगी के रास्ते बनाने के लिए होती हैं. किताबें पढ़ कर ही हम उन बातों को जानते हैं, जो दूसरों ने कहीं हैं, उनमें कई बातें हमारी जिंदगी के लिए बहुत लाभदायक होती हैं.
किताबें उन अनुभवों को समेट कर रखती हैं जो हमारे नहीं हो सकते, सबके अनुभव अलग होते हैं और वक़्त आने पर एक-दूसरे के काम आते हैं, किताबें ज़रूरी हैं ताकि हम अपने अनुभव के आकाश को और बड़ा बना सकें, जीवन को एक नया विस्तार दे सकें, पढ़ना ज़रूरी है..
किताबें हमें मानसिक रूप से सन्तुलित रखती है, इसलिए सभी को किताबों से दोस्ती करनी चाहिए,

क्योंकि यह न सिर्फ हमें कल्पनाशील बनाती हैं बल्कि हमारे ज्ञान में भी वृद्धि करती हैं.

सुबह जागकर कुछ पन्ने अच्छी किताब के पढ़ लेने मात्र से ही जीवन का बदलना शुरू हो सकता है…!!!
यह संसार एक सुन्दर पुस्तक है, परन्तु जो इसे नहीं पढ़ सकता, उस के लिए व्यर्थ है.
अच्छी किताबें हमारी सोच को विकसित करती हैं और ज़िन्दगी को बेहतरी की ओर मोड़ने का माद्दा रखती हैं.
यदि कोई ऐसी पुस्तक है, जिसे आप पढ़ने के अत्यन्त इच्छुक हों, लेकिन वह लिखी नहीं गयी हो,

तो ऐसी पुस्तक को आपको स्वयं ही लिखना होगा.

पुस्तकों से विहीन घर, खिड़की विहीन घर के समान है.
साफसुथरी मनोरंजन वाली किताबें अपने पास अवश्य रखें.

मन में निराशा पैदा होते ही तत्काल चुटकुले की या मनोरंजन वाली किताब पढ़ें.

दुनिया, जहां, प्रेम, परिवार सबसे दिल लगा कर देख लिया _

_ परंतु जो सुकून पुस्तकों के साथ मिला … वह कहीं नहीं मिला …!!!!

जो व्यक्ति अच्छी किताबें नहीं पढ़ता, वह उस व्यक्ति से _

_ किसी मायने में अलग नहीं है, जो कि पढ़ नहीं सकता ..

पुस्तकों में खोए रहने से एक फ़ायदा यह होता है कि फालतू के विचारों एवम फालतू के लोगों से छुटकारा मिल जाता है…!!!
अच्छी पुस्तकों के सम्पर्क में रह कर मनुष्य का मन, ऎसा सुन्दर हो जाता है कि उसकी सुगन्ध हर तरफ फ़ैल जाती है.
किताबें ऐसी शिछक हैं, जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किए और बिना परीछा लिए, हमें शिछा देती हैं.
किताबों ने कहा, हमें पढ़ो ; ताकि तुम्हारे भीतर चीज़ों को बदलने की बैचेनी पैदा हो सके..
ज़िन्दगी तो सभी के लिए वही रंगीन किताब है, फर्क सिर्फ इतना है, कोई हर पन्ने को

दिल से पढ़ रहा है और कोई दिल रखने के लिए केवल पन्ने पलट रहा है.

सही किताब वह नहीं है, जिसे हम पढ़ते हैं. सही किताब वह है, जो हमें पढ़ती है,
एक अच्छी पुस्तक एक महान व्यक्ति के जीवन का निचोड़ होती है,

जो दूसरों के लिए बहोत मेहनत से लिखी जाती है.

अच्छी किताब एक जादुई कालीन की तरह है जो आहिस्ते से हमें उस दुनिया की सैर कराती है,

जहाँ दूसरी किसी चीज़ के ज़रिए हम प्रवेश नहीं कर सकते.

पैसे की तरह किताबें भी लगातार चलती रहनी चाहिए… किताब सिर्फ दोस्त नहीं होती, _ ये आपके लिए दोस्त भी बनाती है ;

जब आपके पास मन और आत्मा के साथ एक किताब होती है, तो आप समृद्ध होते हैं ; लेकिन जब आप इसे आगे बढ़ाते हैं तो आप तीन गुना समृद्ध हो जाते हैं.
— किताबें सिर्फ समझदार लोग ही पढ़ सकते हैं ; _ छोटे – मोटे पाठक के तो सिर के ऊपर से गुजर जाएंगी.
किताबें पढ़ना न केवल मस्तिष्क को विचार और उक्त “ज्ञान” प्रदान करता है,
_ बल्कि यह किसी के मस्तिष्क के ऊतकों और तंत्रिकाओं में दबे हुए बुद्धिजीवियों को जगाता है.
किसी को समझना हो तो उसकी शेल्फ में लगी किताबों को देख लेना चाहिए,

_ किसी की आत्मा को समझना हो तो उन किताबों में लगी अंडर लाइन को पढ़ना चाहिए..

कभी – कभी हम अपने बहुत करीबी, लोगों की भावनाओं को समझ नहीं पाते हैं..!

_ क्योंकि आँख के एकदम पास रखकर, किताब को पढ़ना बड़ा कठिन होता है..!

जो लोग किताबों को बहुमूल्य मानते हैं, वे उन्हें किसी दोस्त की तरह समझते हैं,

उनसे तरह- तरह की बातें सीखते हैं.

किताबों से तो अपना गहरा नाता है जनाब, _

_ हर मर्ज़ का मरहम बिना पूछे इससे मिला है ..!!

किताबो की दोस्ती बड़ी ही अच्छी होती है, वो हमसे बातें तो नहीं करती,

लेकिन अनजाने में बहुत कुछ सिखा जाती हैं !!

ज़्यादा लिखा मैंने अगर तो बनकर किताब रह जाऊँगा,

आया नहीं हूँ हाथ अब तक फिर एक बार मैं आ जाऊँगा..

किताबों की अहमियत अपनी जगह है जनाब, _

_ सबको वही याद रहता है, जो वक़्त और लोग सिखाते है ..!!

किताबों से दिल लगाकर रखिए, यकीन मानिए जिन्दगी में ठोकर नहीं खानी पड़ेगी..
दर्पण में नहीं पुस्तकों में खुद को देखिए… जिंदगी की तस्वीर बदल जाएगी…!!!
किताबें भी बिल्कुल मेरी तरह हैं, अल्फ़ाज़ से भरपूर मगर ख़ामोश.
जो किताबें दोस्त नहीं बन पाती वे आपका साथ छोड़ जाती हैं.
दुनियां की सबसे अच्छी किताब हम स्वयं है, खुद को समझ लीजिए ;

सब समस्याओं का समाधान हो जाएगा..

कभी ख़ुद भी निकल घर से _ खपा ना सर किताबों में,

क़िताबों का तजुर्बा तो _ तजुर्बा दूसरों का है..

किताबों के दौर से _ बाहर आ गये हैं _ ज़नाब ;

अब हमें _ ज़िन्दगी पढ़ाती है ,,,,!!

मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें

मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं. — जौन एलिया

जिनके घर किताबों से भरी अलमारियाँ हैं, _ उनसे ज्यादा रईस कोई नहीं—- मैत्रेयी पुष्पा

कारण ; क्यों आपको एक किताब पढ़ने वाला / वाली होना चाहिए..

वे बुद्धिमान होते हैं, जितनी अधिक किताबें पढ़ते हैं , उतना ही वह दुनिया के बारे में जानते हैं. _साथ ही, वह अपने दिमाग को रोजाना एक अच्छी कसरत देते हैं, जो उसे तेज रखने में मदद करता है. निरंतर पढ़ने को शब्दावली और लेखन कौशल में सुधार के लिए भी जाना जाता है. वे अच्छा बोलते हैं, चूँकि पढ़ने से शब्दावली में सुधार होता है.

यह देखा गया है कि जो लोग पढ़ते हैं उनमें मजबूत विश्लेषणात्मक कौशल होते हैं ; इसलिए, कठिन निर्णयों और जीवन योजनाओं के बारे में बात करने के लिए वह एक बेहतरीन व्यक्ति होंगे.

वे जिज्ञासु होते हैं, वे दुनिया और उसमें मौजूद लोगों और चीजों के बारे में उत्सुक हैं. _ जो किताबें पढ़ते हैं उनके पास आमतौर पर विभिन्न विषयों पर पुस्तकों का संग्रह होता है और वे नई चीजें सीखने के लिए उत्सुक रहते हैं.

जैसे-जैसे वह किताबें इकट्ठा करते हैं, वैसे-वैसे वह तथ्यों को भी इकट्ठा करेंगे, उनमें से कई पूरी तरह से यादृच्छिक [ Random ] हैं.

वे कम रखरखाव वाले होते हैं [ low-maintenance ], वे एक कप चाय और एक अच्छी किताब के साथ बिस्तर में दुबकने की आदी हैं, इसलिए वह जानते हैं कि कैसे आराम करना है.

वे एक विशेषज्ञ संवादी [ expert conversationalist ] होते हैं, चूँकि वे किताबों और पत्रिकाओं को पढ़ने से बहुत कुछ जानते हैं, इसलिए उनके पास बात करने के लिए बहुत सारे विषय होंगे _और आप जो कह रहे हैं उससे संबंधित तरीके खोज सकते हैं, _ और जैसा कि वे चुप रहने और जानकारी लेने के आदी हैं, वह शायद एक अच्छा श्रोता भी होंगे.

वे अधिक अंतरंग [ intimate ] होते हैं ; पढ़ना अपने आप में एक अंतरंग [ intimate ] क्रिया है. वे जो किताबें पढ़ते हैं _वे जानते हैं कि कैसे अपना पूरा ध्यान उसके सामने देना है और सभी विकर्षणों को दूर करना है.

“उनके पास एक बड़ी कल्पना होती है” : कहानी को सजीव बनाने के लिए बहुत कल्पनाशक्ति की जरूरत होती है. _ जैसे-जैसे वह पढ़ते हैं, वे लगातार पात्रों, रंगों और परिदृश्यों की कल्पना कर रहे होते हैं.

वे अविश्वसनीय रूप से महत्वाकांक्षी होते हैं [ incredibly ambitious ],: – किसी किताब को लेने और उसे पढ़ने के साथ आगे बढ़ने के लिए थोड़ी महत्वाकांक्षा की जरूरत होती है. _ जब किताब मुश्किल हो जाती है या 200 से अधिक पृष्ठ होते हैं तब भी वह पढ़ने के लिए खुद को आगे बढ़ाते हैं. _ वे सीखना और बढ़ना चाहते हैं, आमतौर पर अपने जीवन के एक से अधिक पहलुओं में..!

वे एक अच्छी किताब के साथ अकेले रहना पसंद करते हैं और पढ़ने के क्षेत्र में परेशान होना पसंद नहीं करते, _ऐसे लोग को दूसरों से चिपकने कि आदत नहीं होगी या आप पर निर्भर नहीं होंगे..!

“वे आसानी से अपना मनोरंजन [ entertained ] करते हैं” _ उनको मनोरंजन [ entertained ] करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा. _ जो पढ़ते हैं वे आसानी से एक अच्छी किताब के साथ एक पेड़ के नीचे बैठकर घंटों बिता सकते हैं. _ आपको उन्हें इम्प्रेस करने के लिए महंगी और लक्ज़री ट्रिप्स पर नहीं ले जाना पड़ेगा.

“वे एक अद्भुत श्रोता होते हैं” [ an amazing listener ], : वे अपनी कहानियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उपयोग की जाती है, जिसके लिए किसी भी तरह की बात करने की आवश्यकता नहीं होती है. _यह उसे एक अच्छा श्रोता बना देगा क्योंकि जब वह अपनी किताबें पढ़ते हैं तो वह बिना किसी प्रतिक्रिया [ without responding ] के जानकारी लेते हैं.

“वे औरों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे” _ पढ़ने के दौरान वे इतने खुश और प्रेरित दिखेंगे कि आप भी ऐसा ही करना चाहेंगे.

सुविचार – दोस्त – दोस्ती – मित्र – मित्रता – फ्रेंड – फ्रेंडशिप – Friend – Friendship – 001

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हमें दोस्त के अर्थ को समझना चाहिए.
_ दोस्त का मतलब उस शख्स से है ..जो आप की मनोदशा जान सके,
_ आप की परेशानी में, खुशी में आप का सहभागी बने.
_ आप जिस से अपने मन का हाल बांट सकें,
_ अपने मन की हर अच्छी या बुरी बात कह सकें..
_ और वह इन सब बातों पर अपनी प्रतिक्रिया भी व्यक्त करे.
_ अगर वह आप की अच्छी बातों में आप का सहयोग करे तो..
_ बुरी बातों में आप की आलोचना भी करे,
_ तभी वह अच्छा दोस्त होगा
मैं अपने दोस्त के लिए सबसे ज्यादा जो कर सकता हूं वह है उसका दोस्त बनना ;

__ मेरे पास उसे देने के लिए कोई धन नहीं है;
_ अगर वह जानता है कि मैं उससे प्यार करके खुश हूं, तो वह कोई और इनाम नहीं चाहेगा ;
_ ” क्या इसमें मित्रता दिव्य नहीं है ?”

The most I can do for my friend is simply to be his friend. I have no wealth to bestow on him. If he knows that I am happy in loving him, he will want no other reward. Is not friendship divine in this? – Henry David Thoreau

घटिया चीजें घटित होने के बाद आपको हमेशा पता चलता है कि आपके दोस्त वास्तव में कौन थे. -Jodi Picoult

You always knew after shitty things happened, who your friends really were. _ JJodi Picoult

दोस्ती सच्चाई और ईमानदारी से बढ़कर नहीं होती है.
_ ऐसी दोस्ती किस काम की जिससे किसी की सच्चाई और ईमानदारी पर आंच आए.
– Shailendra Sudharma
सबसे अच्छे दोस्त वे लोग होते हैं _ जो आपकी समस्याओं को अपनी समस्या बना लेते हैं _ ताकि आपको उनसे अकेले न जूझना पड़े.

Best friends are the people who make your problems their problems just so you don’t have to go through them alone.

मित्रता का अर्थ दूसरे पर जबरदस्ती कब्जा करना और हर वक़्त बात करना नही होता ;

_मुझे बस सुकून शांति पसन्द है और वही जीवन है मेरा..!!
_ दोस्ती, प्रेम के नाम पर मालकियत हक जमाना ! ये बीमारी है अधिकतर लोगों की ;
_दोस्ती में हक़ या अधिकार जैसे शब्द नही होते !!
_ बस जो मिल जाए उसकी महक ही जिंदगी को चंद पल के लिए खुशनुमा बना दे, इतना ही काफी है;
_ न तो मैं किसी को बांधता हूं और न ही खुद को किसी से बंधने देता हूं.!!
Friendship does not mean forcibly occupying the other and talking all the time;
_I just like peace and quiet and that is my life..!!
Establishing ownership rights in the name of friendship and love! This is the disease of most people; _There are no words like right or authority in friendship!!
_ Just the smell of whatever you get makes life happy for a few moments, that much is enough;
Neither do I bind anyone nor do I allow myself to be tied to anyone.
जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमें एहसास होता है कि बहुत सारे दोस्त होना कम महत्वपूर्ण है, और वास्तविक दोस्त होना अधिक महत्वपूर्ण है.

As we grow up, we realize it is less important to have lots of friends, and more important to have real ones.

“सच्चे दोस्त वे हैं जो वास्तव में आपको जानते हैं लेकिन फिर भी आपसे प्यार करते हैं.”

“True friends are those who really know you but love you anyway.”- Edna Buchanan

ईमानदार होने से आपको बहुत सारे दोस्त नहीं मिलेंगे, लेकिन इससे आपको हमेशा सही दोस्त मिलेंगे..!!

Being honest may not get you many friends, but it’ll always get you the right ones.

केवल एक सच्चा दोस्त ही आपको आपके चेहरे पर बता सकता है कि दूसरे आपकी पीठ पीछे क्या कह रहे हैं.

Only a true friend will tell you to your face, what others are saying behind your back.

असली दोस्त आपके चेहरे पर बकवास बातें करते हैं, और आपकी पीठ पीछे अच्छी बातें कहते हैं.

Real friends talk shit to your face, and say nice things behind your back.

मित्र वे देवदूत हैं जो हमारे पैरों को तब सहारा देते हैं जब हमारे अपने पंखों को भी उड़ना याद नहीं रहता.!!

Friends are angels who lift our feet when our own wings have trouble remembering how to fly.

कुछ मित्र खून के रिश्ते से नहीं बल्कि मजबूत रिश्ते से परिवार बन जाते हैं.

Some friends become family, not by blood but by a strong bond.
दोस्ती सबसे शुद्ध प्रेम है. वह प्रेम का सबसे उच्चतम स्वरूप है,

जहां कोई मांग नहीं होती. कोई शर्त नहीं होती, सिर्फ देने का आनंद होता है.

दोस्ती इतनी भी सस्ती नहीं कि, कोई भी दोस्त बन जाए.!!
इसलिए इससे पहले कि आप दुनिया में सच्चे दोस्तों की कमी के बारे में शिकायत करें,

_ मैं आपसे यह पूछने की हिम्मत करता हूं कि क्या आप एक सच्चे दोस्त हैं ?

मित्रता सबसे शुद्ध प्रेम है, ; _ यह प्रेम का उच्चतम रूप है जहां कुछ भी नहीं मांगा जाता है, कोई भी शर्त नहीं है, जहां हर कोई बस देने में आनंद लेता है.

“मनुष्य के रूप में मित्रता ही महत्वपूर्ण है.
_ जब मैत्री भाव जागता है… तो इंसान ही नहीं, पूरी सृष्टि अपनी लगने लगती है.
_ मैत्री भाव में… पूरा जग अपना हो जाता है.”
**बचपन का एक दोस्त जिसे मैं अपने मन की हर बात ‘बस यूँ ही’ कह जाता था,

_ वो भी मुझे ‘बस यूँ ही’ सुन लेता था, ‘बस यूँ ही’ वो मुझसे अपनी हर राय कह दिया करता था,
_ ‘बस यूँ ही’ मैं उसकी हर बात मान लिया करता था,
_ हम दोनों के बीच कोई स्वार्थ, कोई व्यापार नहीं था, अगर कुछ था तो ‘बस यूँ ही’
_ आज जब हम बड़े हो गए हैं तो जीवन में सब कुछ है,
_ अगर कुछ नहीं हैं तो ‘बस वही यूँ ही’
”’ वो जो मेरा दोस्त जिसके लिए मैं सालों साल रोता रहा, ऐसा नहीं है कि मुझे उससे हमेशा प्रेम रहेगा, _ दरअसल मसला ये है कि अब मैं उसके जैसा प्रेम किसी और से नहीं कर पाऊंगा.!!
“मैं किसे अपना मित्र बनाना चाहूंगा.”

_ मैं मनुष्यों में से मित्र तो चुनूंगा, परन्तु न मैं उसका स्वामी बनूगाँ और न उसको मेरा स्वामी बनने दूंगा ;
_ मैं उन से प्रेम रखूंगा और उनका आदर करूंगा, परन्तु न आज्ञा दूंगा और न उनकी आज्ञा का पालन करूंगा ; और हम जब चाहेंगे हाथ जोड़ लेंगे, या जब चाहेंगे अकेले चल देंगे.
_ मित्रता का अर्थ दूसरे पर जबरदस्ती कब्जा करना और हर वक़्त बात करना नही होता ;
_मुझे बस सुकून शांति पसन्द है और वही जीवन है मेरा..!!
_ दोस्ती, प्रेम के नाम पर मालकियत, हक जमाना ! ये बीमारी है अधिकतर लोगों की ;
_दोस्ती में हक़ या अधिकार जैसे शब्द नही होते !!
_ बस जो मिल जाए उसकी महक ही जिंदगी को चंद पल के लिए खुशनुमा बना दे, इतना ही काफी है.
_ न तो मैं किसी को बांधता हूं और न ही खुद को किसी से बंधने देता हूं.!!
तुम्हें पता है न, कुछ रिश्ते किसी तारीख़ से नहीं बनते, ना ही किसी दिन के मोहताज होते हैं.

_ वो बस यूँ ही एक ख़ामोश मुस्कान, एक गहरी नज़र, या फिर किसी शाम बेवजह की गई बातों से जन्म लेते हैं.
_ हमारा रिश्ता भी कुछ ऐसा ही है.
_ बहुत कुछ कहा…बहुत कुछ बिना कहे रह गया..
_ लेकिन फिर भी, सब समझ में आता रहा.
_ आज मित्रता दिवस है, और मैं सोच रहा हूँ कि कैसे कहूँ तुम्हें कि तुम मेरी जिंदगी का वो हिस्सा हो.. जिसे मैंने खुद चुना नहीं, पर जब मिला, तो जाना कि इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता था.
_ तुम्हारे साथ बिताया हर लम्हा ऐसा है.. जैसे किसी किताब का सबसे प्यारा पन्ना जिसे बार-बार पढ़ने का मन करता है.. फिर भी हर बार उसमें कुछ नया दिखता है, कुछ और गहरा, कुछ और सच्चा.
_ तुम सिर्फ़ एक दोस्त नहीं हो मेरे लिए..
_ तुम वो भरोसा हो.. जो टूटे हुए दिनों में भी मुझे समेट लेता है.
_ तुम वो ख़ामोशी हो.. जिसमें मैं पूरी तरह सुना जाता हूँ.
_ तुम वो मुस्कान हो.. जो मेरी थकी हुई आँखों में भी उम्मीद जगा देती है.
_ तुम वो आलिंगन हो.. जो शब्दों में नहीं समाता, लेकिन जिसकी गर्मी मैं हर बार महसूस करता हूँ, जब तुम कहते हो “मैं हूँ न”!
_ मित्रता दिवस के नाम पर लोग गिफ्ट्स देते हैं, कार्ड्स भेजते हैं, स्टेटस लगाते हैं, पर मैं तुम्हें कुछ भी देने के बजाय.. बस तुम्हें महसूस कराना चाहता हूँ.. – कि तुम मेरे लिए क्या हो.
_ तुम वो ‘घर’ हो, जहाँ मैं रोज़ लौटना चाहता हूँ.
_ तुम वो ‘तलाश’ हो, जिसका रास्ता भी सुकून देता है.
_ और तुम वो ‘सवाल’ भी हो, जिसका जवाब तलाशते हुए.. मैं बेहतर बनता हूँ.
_ मुझे नहीं पता कि आगे की ज़िंदगी क्या मोड़ लाएगी,
_ पर ये ज़रूर पता है कि अगर तुम साथ हो तो हर सफ़र आसान होगा,
_ हर थकान थोड़ी कम होगी, और हर खुशी कुछ ज़्यादा अपनी लगेगी.
_ तुमसे जुड़ कर मैंने जाना कि दोस्ती सिर्फ़ हँसने की चीज़ नहीं,
_ वो एक दर्पण है.. जिसमें हम अपनी सबसे असल तस्वीर देखते हैं.
_ और तुम्हारे साथ मैं वैसा हूँ जैसा मैं हूँ बिना मुखौटे, बिना दिखावे के..
_ आज का दिन तुम्हारे नाम, जो दोस्त भी हो, साया भी, सुकून भी, और शायद…उससे भी कुछ ज़्यादा.
_ शुक्रिया…मेरी ज़िंदगी में होने के लिए, और यूँ, इस दिल में ठहर जाने के लिए.!!
एक जगह किसी एक व्यक्ति के न होने से कितनी बदल जाती है.

_ मेरे लिए तो दुनिया ..उसके होने से ही दुनिया थी.
_ थोड़ी अतिशयोक्ति होगी..
_ फिर भी कहूँगा कि..
_ ये जगह अब पहले जैसी चहकती नहीं है.
_ संबंधों के बहुत उतार-चढ़ाव देखे..
_ कई रिश्तों को टूटते-बिखरते देखा..
_ ख़ुद को लेकर भी सशंकित हुआ,, पर उसको लेकर हमेशा आश्वस्त रहा.
_ कुछ रिश्ते बिना अतिरिक्त प्रयास के भी गहराई बरकरार रखते हैं.
_ शायद अतिरिक्त का आग्रह या चाह रिश्तों की सहजता भी ख़त्म कर देता है.
_ शायद ऐसा ही था.. मेरा भी मेरे दोस्त के साथ “दोस्ती का रिश्ता’.
हमें लगता है कि दोस्तियों में दौलत, शोहरत मायने नहीं रखते,

_ पर सच यह है कि अगर दोस्ती में दो लोग अलग वर्ग के हों तो बचपन में भले साथ निभ जाए पर कालांतर में उनके बीच दूरी आयेगी ही,
_ भले वह कभी कभार मिलने पर साथ में बोलें बतियाएं, खाएं, पिएं पर एक अनदेखी अभिजात्यता की दीवार उन्हें अलग करेगी ही..
_ दिल आपका है सो इसे टूटने से बचाने की जिम्मेदारी भी आपकी है..
_ उच्च वर्ग जिनसे भी आप प्रभावित हों, जिन्हें आप सराहते हों, चाहते हों..
_ उनसे एक सुरक्षित दूरी बनाकर मिलिए, ..क्योंकि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी.!!
हर इंसान की कुछ यादें होती हैं _जो वह हर किसी को नहीं _ बल्कि अपने दोस्तों को ही बताता है.
हर इंसान को एक भरोसेमन्द दोस्त मिल जाए,
_ फिर किसी मनोचिकित्सक की ज़रूरत नहीं.!!
दोस्ती ही सबसे निर्मल प्यार है,

_ प्यार करने का ये सबसे ऊँचा स्तर है,
_ जहां किसी भी परिस्थिति के लिए किसी से नहीं पूछा जाता,
_ सिर्फ और सिर्फ एक दूसरे को खुशी दी जाती है.
जिससे भी दोस्ती करो बिना औपचारिकता के करो..

_ और जब लगे सामने वाला अब आपको Excuse देने लगा है.. उसे सदा सदा के लिए मुक्त कर दो..!!
‘जिंदगी हमें खूबसूरत दोस्त देती है, लेकिन अच्छे दोस्त हमें खूबसूरत जिन्दगी देते हैं’

_ दरअसल अब दोस्त बनते नहीं, बनते हैं तो रहते नहीं, रहते हैं तो निभाते नहीं.!!

जिसके साथ व्यापार कर रहे हैं _उसे कभी दोस्त मत बनाइए..

_ और दोस्त के साथ कभी व्यापार मत कीजिए,

_ इस सूत्र को अपनाने वालों की दोस्ती और व्यापार दोनों ठीक चलते हैं..!!

सिर्फ यारियाँ ही रह जाती है मुनाफ़ा बन के…

_ वर्ना ज़िन्दगी के सौदों में नुक़सान बहुत है..!!

कुछ लोग बिना रिश्ते के रिश्ते निभाते हैं,,

_ ज़िन्दगी में शायद वो लोग ही दोस्त कहलाते हैं !!

— एक अच्छा दोस्त सबसे करीबी रिश्तेदार होता है.

“दोस्ती” शब्द का अर्थ बड़ा ही मस्त होता है.., [ दो + हस्ती ]

जब दो हस्ती मिलती हैं.., तब दोस्ती होती है…

सब को कहीं न कहीँ एक, बेहतरीन दोस्त की तलाश है ;_

_ तो आप दोस्त ढूंढने से पहले, किसी के बेहतर दोस्त बन जाइये..

समृद्धि मित्र बनाती है, विपत्ति उनकी परीक्षा लेती है..!!

Prosperity makes friends, adversity tests them.

एक अमीर दोस्त के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप एक गरीब दोस्त के साथ करते हैं.

Treat a rich friend just like you treat a poor friend.

सच्चे मित्र वे दुर्लभ लोग होते हैं जो आपको अंधेरी जगहों में ढूंढने आते हैं और आपको वापस रोशनी की ओर ले जाते हैं.

True friends are those rare people who come to find you in dark places and lead you back to the light.

नकली दोस्त गुप्त नफरत करने वालों की तरह होते हैं और एक बार जब आप उनसे बात करना बंद कर देते हैं तो वे आपके बारे में बात करना शुरू कर देते हैं.

Fake friends are like secret haters and once you stop talking to them they start talking about you.

कई बार बरसों की दोस्ती के बाद आपको एहसास होता है कि..

_ आपने जिन्हें अपना दोस्त माना वो वाकई में आपके दोस्त थे ही नहीं..!!

दोस्त हमेशा मरहम ही लगाते हैं, डंक मारने वाले दोस्त कभी होते ही नहीं..!

__ सिर्फ दोस्त बनने की एक्टिंग करते रहते हैं.!!

मैत्री इतनी सस्ती चीज नहीं कि कोई उस बहाने किसी के साथ जैसा चाहे व्यवहार कर ले.!!
दोस्त हर पड़ाव पर नहीं टिकते और ये ठीक है.

_ “जीवन बदलता है, लोग भी”..  जो लोग आपके आज के विकास में साथ हैं, वो आपके कल के हिस्से नहीं बनेंगे..
_ पुरानी दोस्तियों के टूटने को व्यक्तिगत न लें यह प्रकृति का नियम है.!!
आपके लगभग आधे दोस्त शायद आपको अपना दोस्त नहीं मानते.

_सामाजिक सीढ़ी पर चढ़ने से बहुत सी एकतरफा दोस्ती हो जाती है,
_ क्योंकि सीढ़ी पर नीचे वाले लोग अक्सर ऊपर वाले लोगों के साथ दोस्ती करने का दावा करते हैं,
_जबकि शीर्ष पर रहने वाले लोग इस बारे में अधिक चयनात्मक होते हैं कि _वे अपने दायरे में किसे मानते हैं,
_मूल रूप से, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप सीढ़ी पर कहाँ पहुँचते हैं,
_ आप जितना सोचते हैं उससे कहीं अधिक नकली मित्रता रखते हैं.
About half of your friends probably don’t think of you as their friend.
Climbing the social ladder causes a lot of one sided friendships, because those lower on the ladder often claim to be friends with people who are higher up,
while those at the top are more selective about who they consider to be in their circle,
Basically, no matter where you land on the ladder, you have more fake friendships than you think you do.
जीवन का सबसे अच्छा हिस्सा वह होता है.. जब आपका परिवार आपको एक मित्र की तरह समझता है और आपके मित्र एक परिवार की तरह आपका समर्थन करते हैं.!!
The best part of life is when your family understands you like a friend and your friends support you as a family.
मित्रता वही कायम रहती है, जो ह्रदय से शुरू हो………जरुरत से नहीं..
मित्रता का रिश्ता संसार में सुन्दर रिश्ता है, अगर उसमें निस्वार्थ भाव हो ;

_ खून का रिश्ता धोखा दे सकता है,
_ पर सच्चे मित्रों का रिश्ता अनोखा, अनमोल है..
_ जो जीवन भर साथ रहता और साथ देता है..!!
अकारण बने रिश्ते सबसे खूबसूरत होते हैं.

_ इसमें खून के रिश्तों की तरह ना तो जिम्मेदारियां होती हैं ना ही ब्यापार के रिश्तों की तरह लेन -देन..
_ बस किसी का होना अच्छा लगने लगता है,
_ किसी की मौजूदगी आनंद से भर देती है,
_ किसी से जुड़ाव का एहसास खूबसूरत लगता है.
_ स्नेह और अपनत्व का एहसास अनायास ही महसूस होने लगता है.
_ कमोबेस इसी एहसास से जुड़े होते हैं एकदूसरे से..
_ इन रिश्तों की जीवंतता अदभुत है.
_ यही विशिष्टता होती है दोस्ती की..!!
हमें नहीं पता होता कि कौन से लोग हमारे रिश्तेदार बनेंगे..

_ क्योंकि किसी खास घर में पैदा होने का हमें कोई हक नहीं होता.
_ इसलिए ये जैसे भी हों अच्छे या बुरे हमें झेलने पड़ते हैं.
_ लेकिन दोस्त तो हमने चुने होते हैं.. इसलिए इन्हें जीवन भर निभाना चाहिए.!!
जिनसे खून का कोई वास्ता नहीं था, वो खून के रिश्तों से भी गहरे निकल गए ;
_ सच में, फ्रेंड वो परिवार हैं.. जिन्हें हम खुद चुनते हैं.!
जिंदगी हमें बहुत खूबसूरत दोस्त देती है,

लेकिन अच्छे दोस्त हमें खूबसूरत जिंदगी देते है..

दोस्ती किससे कब हो जाये अंदाज़ा नहीं होता,*

*ये वो घर है जिसका कोई दरवाज़ा नहीं होता…!!

दोस्ती मजबूत रखिये जनाब…

जमाना जडे भी काट दे तो__दोस्त गिरने नहीं देते..

दोस्ती समेट लेती है, ज़माने भर के रंज -ओ- गम,

सुना है _ यार अच्छे हों तो _ दर्द भी नहीं होता !

इससे अच्छी दोस्ती और क्या हो सकती है,

की हम बहुत दिनो से मिले नहीं, फिर भी दोस्ती है.

अच्छे दोस्तों को ढूंढ़ना कठिन होता है छोड़ना और भी मुश्किल और भूल जाना नामुमकिन
दोस्त वो होता है जिसके साथ बातें खुल कर की जा सके, _ ना कि संभल कर..
हजारों दोस्त आये और गये, लेकिन वो स्कूल के दोस्त आज तक याद आते हैं..
दोस्त वो होता है, जिसके साथ बातें खुल कर की जा सकें _ ना कि संभल कर..
दोस्त:- जो लोग आपको अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन फिर भी आपको पसंद करते हैं.
दोस्ती सबसे अनोखा रिश्ता है, ये वो हक है जो वास्तव में अदा होता है.!!
दोस्ती- यारी में प्रेम और भरोसा होता है और वही टूट जाए तो आस्था का कोई अर्थ नहीं.!!
दोस्ती आम है लेकिन ए दोस्त, दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से..
दोस्त बनाना अलग होता है और निभा पाना अलग.
जिंदगी में ज्यादातर रिश्ते हमें बने – बनाये ही मिलते हैं,

_ जिसमें अपनी पसंद का कोई मतलब नहीं होता है.
_ लेकिन दोस्ती एक ऐसा रिश्ता होता है, जिसे हम अपने जीवन में खुद बनाते हैं.
_ दोस्ती यानी एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें प्यार, तकरार, इजहार, इनकार, स्वीकार जैसे सभी भावों का मिश्रण है.
_ “दोस्ती है ही ऐसा रिश्ता”
_ जिसके लिए न समाज की स्वीकृति चाहिए और न ही मान्यताओं और परंपराओं का सहारा..!!
दोस्ती वो रिश्ता है, जो परिवार के नहीं होते हैं लेकिन परिवार से बढ़ कर होते हैं,

_ इनसे हम वो सब बातें share करते हैं ..जो हम घर वालों से नहीं कर पाते.
__ और ये ऐसे सुझाव देते हैं कि हम अपनी परेशानी भूल जाते हैं ;
_ Friends तो वो तोहफ़ा है ..जिस के बिना जिंदगी भी जिंदगी जैसी नहीं लगती !!
दोस्ती इस दुनिया के अनमोल रिश्तों में से एक है,

_ जो कसमें–वादों और शर्त के लिफाफे में नहीं आता..
_ बल्कि उपेक्षा और लापरवाही के बावजूद छातों और स्वेटरों की तरह बुरे मौसम में साथ देता है.
_ दोस्ती वो है, सालों बाद भी मिले तो ऐसा लगे कि कल ही तो मिले थे और हर बेरंग पल को रंगीन कर दे.
सच्चे मित्र मुश्किल से मिलते हैं, कठिनता से छूटतें है और भुलाए नहीं भूलते. इनसे सम्पर्क बनाएँ रखें, जीवन में यह भी आपकी एक अमूल्य पूँजी है.
अच्छे दोस्त उन सितारों की तरह होते हैं, जो भले ही रोशनी में दिखाई ना देते हों,,,

पर मुश्किल हालातों में हमेशा साथ देते हैं,,

मेरे दोस्त, मेरी उदासी में उदास होने वाले …मेरी ख़ुशी में खुश होने वाले,,,

आज तेरी कमी ने रुला दिया मुझे !!!

*#मित्रों में ऐसी #विशेषता है,* *जो #रिश्तेदारों से भी #बढ़कर है…**#मित्र सिर्फ मित्र होते हैं*

*वे #सगे, #चचेरे, #ममेरे, #फुफेरे, #मौसेरे, और #सौतेले, नहीं होते हैं*

हम बाकी सभी रिश्तों के साथ पैदा होते हैं पर दोस्ती ही एक मात्र रिश्ता है जिसे हम खुद बनाते हैं.
सच्चा दोस्त वही है जो आपकी गलतियों पर पर्दा डालने के बजाय निष्पछ रूप से अपना पछ प्रस्तुत करे, आपको आपकी बुराइयों से अवगत कराए.
एक सच्चा दोस्त साथ हो तो, _ हज़ारों बुरे हालात यूं ही कट जाते हैं.
अपने मित्र को एकान्त में भला- बुरा कहो, परन्तु उनकी प्रशंसा सबके सामने करो.
एक साल में पचास मित्र बनाना आम बात है, पचास साल तक एक ही मित्र से मित्रता निभाना ख़ास बात है.
वक़्त, दोस्त और रिश्ते — वो चीजें हैं जो हमें मुफ्त मिलती है, मगर इनकी कीमत का पता तब चलता है जब ये कहीं खो जाती हैं.
सचमुच महान दोस्त खोजना मुश्किल, छोड़ना कठिन और भूलना नामुमकिन है.
दोस्ती एक ऐसे रिश्ते का नाम है, जिसे खून के रिश्ते से भी ऊपर रखा जाता है.
दोस्ती मतलब से नहीं होती. __ यही वह शै है जो वक़्त आने पर लहू के रंग को बेरंग कर देती है.
मित्रता विश्वास की वह श्रृंखला है, जिस पर साधारण लोग नहीं चढ़ सकते हैं.
एक वफादार दोस्त हजार मतलबी रिश्तेदारों से बेहतर होता है.
सुख भीड़ इकट्ठा करता है, दुःख सच्चे दोस्त !!
इस दुनिया में दोस्ती भी कितना सुकून देती है.
अच्छे मित्र, अच्छी किताबें और चिन्ता मुक्त अंतःकरण, यही एक आदर्श जीवन है.
दो दोस्तों के बीच क्या ख़ूब रिश्ता था, एक के रिश्ते पूरे हुए तो एक के मतलब पूरे हुए.
मित्रता कोई स्वार्थ नहीं, बल्कि एक विश्वास है ; जहां सुख में हंसी – मज़ाक से लेकर, संकट में साथ देने की जिम्मेदारी होती है.

यहां झूठे वादे नहीं, बल्कि सच्ची कोशिशें की जाती हैं.

फर्क तो अपनी सोच में है साहब, _ वरना दोस्ती भी मोहब्बत से कम नहीं होती..
मित्रता वही कायम रहती है, जो ह्रदय से शुरू हो, ज़रूरत से नहीं.
परेशानी में आप के दोस्त भी आप के माता पिता बन सकते हैं.
दोस्ती दुनिया का सबसे पवित्र और निस्वार्थ रिश्ता है.
दोस्त मुश्किल वक़्त को भी आसान कर देते हैं ..
मतलबी लोग कभी किसी के,,,,अच्छे दोस्त नहीं होते हैं..
दोस्ती ऐसा बीज है जो नए रिश्तों को जन्म देता है.
दोस्ती की भाषा शब्द नहीं बल्कि अर्थ होती है.
दूरियाँ कभी किसी रिश्ते को नहीं तोड़ सकती हैं और, नजदीकियाँ कभी रिश्ते को नहीं बना सकती हैं. अगर भावनाएँ सच्चे ह्रदय से हो तो दोस्त दोस्त ही रहते हैं, फिर चाहे वे मीलों दूर क्यों न हों.
निस्वार्थ भाव सच्ची दोस्ती की आधारशिला है, एक दोस्त दूसरे की समस्या को जान कर बिना पूछे मदद करता है.
सच्ची मित्रता उत्तम स्वास्थ के समान है. उसका महत्व तभी ज्ञात होता है, जब हम उसे खो बैठते हैं.
उन स्वार्थी मित्रों से अधिक सम्बन्ध न रखें, जो केवल अच्छे समय में ही प्रगट होते हैं.
आपके अधिकांश ‘दोस्त’ आपको अच्छा देखना चाहते हैं, लेकिन उनसे बेहतर कभी नहीं.!

— दोस्त फेल हो जाए तो दुख होता है लेकिन दोस्त अगर टॉप पर आ जाए तो बहुत अधिक दुख होता है.

“यही जीवन है -यही उसका रंग है”

ऎसे मित्रों का संग्रह करो, जो सरल और निष्कपट हों, आपकी भावनाओं को समझने का जिनके पास सामर्थ्य हो.
मित्रता का दायरा बहुत संकुचित न रखें. कभी कभी मुसीबत में खून के रिश्ते फीके, मित्रता के मीठे साबित होते हैं.
मित्र वे दुर्लभ लोग होते हैं जो हमारा हालचाल पूछते हैं और उत्तर सुनने को रुकते भी हैं.
जीवन में हर चीज़ मेहनत से हासिल की जा सकती है, पर एक सच्चा और समझदार दोस्त मिलना किस्मत की बात होती है,

_अगर आपको ऐसा दोस्त मिला है तो उसे सिर्फ अपना मानकर नहीं बल्कि उसकी भावनाओं, उसके भरोसे और उसके साथ को सहेजकर रखना चाहिए,
_ क्योंकि ऐसे रिश्ते बार-बार नहीं मिलते.!!
दोस्त उसे कहते है…जिसके पास तराज़ू ना हो…
सादगी हो लफ़्ज़ो मे तो यकीन मानिए,

इज्ज़त बेपनाह और दोस्त बेमिसाल मिल ही जाते है.

वो दोस्त मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं,

जो सही वक्त पर मेरे सामने आईने रखते हैं !

अच्छे दोस्त टाइम मिलने पर बात नहीं करते,

बात करने के लिए टाइम निकालते है.

दोस्त कम होने पर चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है,

_ क्योंकि क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी अहमियत रखती है.

इंसानियत का रिश्ता सबके साथ निभाना..

_ दोस्त मगर चार पांच से ज्यादा मत बनाना.!!

मित्रता सबसे शुद्ध प्रेम है, यह प्रेम का उच्चतम रूप है जहां कुछ भी नहीं मांगा जाता है.

कोई भी शर्त नहीं, जहां कोई बस देने में आनंद लेता है.

मित्रता करने में धीमे रहिये, पर जब कर लीजिये तो उसे मजबूती से निभाइए और उसपर स्थिर रहिये.
यदि दृढ मित्रता चाहते हो तो मित्र से बहस करना, उधार लेनादेना छोड़ दो. यही बातें बिगाड़ पैदा करती हैं.
गुनगुनाना तो तकदीर में लिखा के लाए थे,

खिलखिलाना दोस्तों ने तोहफे में दे दिया.

सच्चा दोस्त बातों से नहीं, दिल से बनाया जाता है.

वातावरण को जो महका दे उसे ‘इत्र’ कहते हैं,

जीवन को जो महका दे उसे ही ‘मित्र’ कहते हैं.

दोस्त आइने की तरह होना चाहिये,

अगर उनके साथ बैठो तो अपना हाल दिख जाये.

जो व्यक्ति हमारे जीवन की अच्छाइयों और बुराईयों को उजागर करे,

वही हमारा अच्छा और सच्चा दोस्त कहलाता है.

फर्क तो अपनी – अपनी सोच में है,

वरना दोस्ती भी मोहब्बत से कम नहीं होती..!!

खरीद लेंगे सबकी सारी उदासियाँ दोस्तों !

सिक्के हमारे मिजाज़ के, चलेंगे जिस रोज !!

ढल जाती है हर चीज अपने एक तय वक्त पे,

एक दोस्ती है जो कभी बूढ़ी नहीं होती….

*#मित्रों में ऐसी #विशेषता है,* *जो #रिश्तेदारों से भी #बढ़कर है…*

*#मित्र सिर्फ मित्र होते हैं* *वे #सगे, #चचेरे, #ममेरे, #फुफेरे, #मौसेरे, और #सौतेले, नहीं होते हैं*

सच्चा दोस्त वो होता है जिसमें आप से असहमत होने की हिम्मत हो _

_ और अलग राय होने के बावजूद जिसका प्यार कम न हो.

अगर आप अपने मित्र को आपकी सफलता से इर्ष्या करता हुआ पाते हैं तो,

_ समझ लें_ वह कभी भी आपका सच्चा मित्र नहीं था..!

मित्रता को धीरेधीरे बढ़ने दीजिए, बहुत तेजी से बढ़ने पर यह जल्दी ही खत्म हो सकती है.
उस ने एक बार कहा दोस्त हूँ फिर मैने कभी नहीं कहा व्यस्त हूँ.
‘दोस्त’, कितना अच्छा शब्द है, कहना अच्छा लगता है..
_ लेकिन निभाना कोई भी नहीं चाहता.!!
दूरियों से फर्क नहीं पड़ता है, बात तो दिलों की नजदीकियों से होती है.

दोस्ती के रिश्ते तो किस्मत से बनते हैं, वर्ना मुलाकात तो कितनों से होती है.

दोस्त अच्छे और सोच समझ कर चुनें, सफल व्यक्ति पर उस के दोस्तों का बहुत ज्यादा प्रभाव होता है.

जाहिर है सफल व्यक्ति के दोस्त काबिल और सफल होते हैं.

हर मोड़ पर मुकाम नहीं होता, दिल के रिश्तों का कोई नाम नहीं होता,

चिराग की रौशनी से ढूँढा है आपको, आप जैसा दोस्त मिलना आसान नहीं होता !

बुरे वक़्त में लोग साथ छोड़ते हैं कि इसके पास अब कुछ बचा नही,

अच्छे वक़्त में भी लोग साथ छोड़ते हैं, जब उनसे तुम्हारी ख़ुशियाँ देखी नही जाती,

लेकिन जो दोनो वक़्त में साथ न छोड़े, वही है सच्चा दोस्त.

जो हमारा हितैषी हो, सुख- दुख में बराबर साथ निभाये, गलत राह पर जाने से रोके और अच्छे गुणों की तारीफ करे,

केवल वही व्यक्ति मित्र कहलाने योग्य है.

दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली…

बेशक, जैसे भी थे पर रौनक उन्ही से थी !!

एक सच्चा दोस्त सभी रिश्तेदारों पर भारी होता है…
एक वफादार दोस्त, हजार रिश्तेदारों से बेहतर है !
रिश्तों का नाम भी अजीब है, वो सिर्फ दोस्त है मेरा ;

पर घर वालों से ज्यादा करीब है.

दौलत से दोस्त बने वो दोस्त नहीं,

पर ये भी सच है कि दोस्त जैसी कोई दौलत नहीं.

खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया,

दोस्तों के लिए दोस्ती का रिश्ता बनाया,

पर कहते हैं दोस्ती रहेगी उसी की,

जिसने दोस्ती को दिल से निभाया.

उम्र भर बने रहेंगे लोग दोस्त आप के…

उम्र भर आप लोगो के काम आते रहिए…

तू गलती से भी कन्धा न देना मेरे जनाजे को ए दोस्त…

कहीं फिर जिन्दा न हो जाऊ तेरा सहारा देखकर…

मित्र के साथ बैठना बहुत आसान है,_ परन्तु खड़े रहना बहुत ही मुश्किल है.
खराब वक्त में भी एक अच्छाई होती है, जैसे ही ये आता है _ फ़ालतू के दोस्त विदा हो जाते हैं..
दोस्त बेशक एक हो लेकिन ऐसा हो, _ जो अलफ़ाज़ से ज़्यादा ख़ामोशी को समझे.
जिसके पास एक अच्छा दोस्त है, उसे किसी भी दर्पण की जरुरत नहीं है.
सच्चे दोस्त वो होते हैं, _ जिन्हें मुश्किल वक़्त में ढूंढ़ना ना पड़े ..
यारी- दोस्ती करना अच्छी बात है, पर यारी- दोस्ती जब ज्यादा और गलत लोगों से हो जायेगी, तो आपको समस्या आएगी ही.
खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया,

दोस्तों के लिए दोस्ती का रिश्ता बनाया,

पर कहते हैं दोस्ती रहेगी उसी की,

जिसने दोस्ती को दिल से निभाया.

हम बहुत लोगों से रोज़ बात करते हैं.. पर क्या हरेक को हमारी बात उसी रूप में पहुंचती है.. जिस रूप में हम पहुंचाना चाहते हैं ? नहीं !!!

_ जिन लोगों से हमारी wave length मिलती है, उन्हीं को हमारी बात सही ठिकाने जाकर लगती है, इसलिए वही हमारे अच्छे फ्रेंड होते हैं.
_ ऐसे लोगों के साथ हमें कभी तनाव नहीं होता और बात करने में आनंद आता है.
_ बाकी सब काम चलाऊ मामला है.!!
” दोस्ती का ढंग जानने वाला, हर शख़्स मेरा दोस्त हो सकता है,

फिर वो कहां का है, और क्या है, यह मायने नहीं रखता,”

सच्चा दोस्त चाहे कितना भी नाराज हो,

पर कभी भी दुश्मनों की लाइन में खड़ा नहीं होता..

दिन रात जायेंगी सुहानी यादें बन कर, बातें रह जायेंगी बस कहानी बन कर..

पर दोस्त आप याद आते रहोगे, कभी मुस्कान तो कभी आँखों में पानी बन कर…

कभी – कभी यूं ही चले आया करो दिल की दहलीज पर…. ऐ- दोस्तो

अच्छा लगता है, यूँ तन्हाइयों में तुम्हारा दस्तक देना…

एक सच्चा मित्र वह है जिसके दिल में मेरा हित हो.
दोस्तों की दास्ताँ जब वक़्त सुनाता है,

तो हमें भी कोई दोस्त याद आता है,

भूल जाते हैं हम ज़िन्दगी के गम को,

जब आपके साथ बिताया वक़्त याद आता है.

मित्रता का मतलब है कि आपने किसी अन्य व्यक्ति को स्वयं से ज्यादा महत्वपूर्ण माना…

यह व्यापार नहीं है…..यह अपने आप में पवित्र प्रेम है..

कितने कमाल की होती है ना दोस्ती,

वजन होता है लेकिन बोझ नहीं होता.

तारीफ इतनी ही काफी है…कि वो मेरा दोस्त है…!

क्या ख़ास है उसमे…ऐसा मैंने कभी सोचा ही नहीं…!!

दोस्ती समेट लेती है ज़माने भर के रंज व ग़म, _

_ सुना है यार अच्छे हों तो कांटे भी नहीं चुभते !!

जिन्दगी हमें बहुत खूबसूरत दोस्त देती है…

लेकिन अच्छे दोस्त हमें खूबसूरत जिन्दगी देते हैं..

नाम की दोस्ती और काम की यारी,

दूसरों की तरह नहीं है आदत हमारी…

उम्र से कोई लेना देना नहीं होता,

जहां विचार मिलते हैं, वहां सच्ची दोस्ती होती है.

“प्लम्बर” कितना भी एक्सपर्ट क्यों न हो… ?

पर… वो आँखों से टपकता… पानी बंद नहीं कर सकता…

उसके लिए तो “दोस्त” ही चाहिये !

दोस्त वादे नहीं करते,

फिर भी हर मोड़ पर अपनी यारी निभाते हैं.

जिन्दगी में एक दोस्त ऐसा भी होना चाहिए,

जो बिना मतलब, हालचाल पूछता रहता हो…

इत्र की कीमत तो, उसी दिन फर्श पर आ गिरी थी..

तेरी दोस्ती की खुशबू ने, जिस दिन महकाया था मुझे…

मित्रता सम्मान की नहीं भाव की भूखी होती है….

बशर्ते लगाव दिल से होना चाहिए, दिमाग से नहीं !

निगाहें बदल गयी अपने और बेगाने की,,

तू न छोड़ना दोस्ती का हाथ कभी

वरना तमन्ना मिट जायेगी कभी दोस्त बनाने की !

“दोस्ती” रूह में उतरा हुआ मौसम है ज़नाब,

ताल्लुक कम करने से “दोस्ती” कम नहीं होती.

दोस्त भी रहो, _ और दोस्ती भी रखो.

इन के दरमियां, _ कुछ दूरी भी रखो..

हज़ारों “दोस्त” आये और हज़ारों “दोस्त” गए..

..लेकिन वो स्कूल वाले “दोस्त” आज भी याद आते हैं….

तिनके तिनके में बिछड़ते चले गये….

तनहाई की गहराइयों में उतरते चले गये…

रहता था हर शाम जिन दोस्तों के साथ…

एक एक करके सब के सब बिछड़ते चले गये….

बीत गए कितने दिन उन दोस्तों के बगैर

जिनके साथ कभी ज़माने हुआ करते थे..!!

हर कोई मेरा दोस्त नहीं,

और मेरे दोस्त जैसा कोई दोस्त नहीं..!!

“दोस्त” शब्द का अर्थ बड़ा ही मस्त होता है

हमारे “दोष” का जो “अस्त” करे वही “दोस्त” होता है.

इससे अच्छी दोस्ती क्या हो सकती है,

कि हम कभी मिले नहीं मगर यारी बेशुमार है.

तुम दोस्त हो तो बताओ खामियां मेरी,

ये तारीफों के पुल तो मतलबी लोग बांधते हैं.

दोस्ती करने वालों कि कमी नहीं है दुनिया में,

अकाल तो निभाने वालो का पड़ा है साहब !!!

जो बर्दाश्त ना कर सके,, वो दोस्त कैसा,

और जो समझ ना पाए वो रिश्ता कैसा…

सयाने लोग उम्र भर कभी ये रत्न नहीं खोते,

पुराने दोस्त यहाँ हर किसी के पास नहीं होते.

दोस्ती अपनी भी असर रखती है,

बहुत याद आएँगे ज़रा भूल कर तो देखो.

दोस्ती करने के लिये खास लोगों की जरूरत नहीं होती,

जिससे दोस्ती करते हैं वो लोग खास बन जाते हैं..!

दिल जब खुला हो तो हर कोई आपका मित्र बन जाता है.
लिख कर लाया था कोरे कागज़ पर परेशानिया ;

_ दोस्तों ने उसे पतंग बनाकर उड़ाना सीखा दिया..

आप के पास एक सच्चा दोस्त जरूर होना चाहिए, _

_ जो आप की हर बात को ध्यान से सुने, इससे आप के मन का बोझ कम रहेगा ..

दोस्ती वो नहीं होती जो जान देती है_ दोस्ती वो नहीं होती जो मुस्कान देती है.

असली दोस्ती तो वो होती है, जो समंदर में गिरा आँसू भी पहचान लेती है..

” दोस्ती भी संभल कर करना ” क्योंकि मैंने अपने सबसे अच्छे दोस्त को चंद मिनटों में अपने विश्वास को तोड़ते देखा है,

जिस पर था भरोसा आंख बंद करके, उसी को आंखों में आंसू का कारण बनते देखा है.

अगर हम कभी नहीं चाहते कि एक नेक दोस्त दुश्मन बने तो हमें कभी भी किसी दोस्त को चोट पहुँचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

यदि आप बुद्धिमान हैं तो मूर्ख मित्र की मित्रता से हमेशा दुख पाएँगे.
कुछ दोस्त तो ऐसे बदले की _ यकीन मानो_ यकीन ही नही होता..!!
खुद से दोस्ती हुई तो पता चला, मुझसे बेहतर मुझे कोई नहीं जानता !
मनुष्य जीवन भर दूसरों से मित्रता करता रहता है लेकिन अपने आप से मित्रता नहीं कर पाता.

यदि हम अपने साथ मित्रता और प्रेम करना सीख जाएं तो जीवन सरल और सरस हो सकता है.

खुद को हर हाल में स्वीकार करना और स्व से प्रेम करना आत्म-सम्मान बढ़ाता है.

मित्र बनाए नहीं अर्जित किए जाते हैं!……हमारे जीवन में कुछ रिश्ते बहुत अनमोल होते हैं। मित्रता ऐसा ही रिश्ता है। कहते हैं मित्र बनाए नहीं जाते, अर्जित किए जाते हैं। ये रिश्ता हमारी पूंजी भी है, सहारा भी।

आजकल दोस्ती के मायने बदल गए हैं तो इस रिश्ते की गहराई भी कम हो गई है। इस संसार में हम अपनी मर्जी से जो सबसे पहला रिश्ता बनाते हैं, वो मित्रता का रिश्ता होता है। शेष सारे रिश्ते हमें जन्म के साथ ही मिलते हैं। मित्र हम खुद अपनी इच्छा से चुनते हैं। जो रिश्ता हम अपनी पसंद से बनाते हैं, उसे निभाने में भी उतनी ही निष्ठा और समर्पण रखना होता है।

आधुनिक युग में दोस्ती भी टाइम पीरियड का मामला हो गया है। स्कूली जीवन के दोस्त अलग, कॉलेज के अलग और व्यवसायिक जीवन के अलग। आजकल कोई भी दोस्ती लंबी नहीं चलती। जीवन के हर मुकाम पर कुछ पुराने दोस्त छूट जाते हैं, कुछ नए बन जाते हैं। दोस्ती जीवनभर की होनी चाहिए।

” दोस्तों को समर्पित “

ये मस्त उम्र फिर नहीं आएगी,
जब शनै- शनै उम्र बढ़ जाएगी,
इत्र की जगह आयोडेक्स की खुशबू आएगी,
कहता हूँ अब भी मिल लिया करो,
ये घड़ियां पलटकर नहीं आएंगी,
अभी तो आंखों में नूर है बाकी,
फिर खूबसूरती नज़र नहीं आएगी,
अभी तो यार हैं चलते अपने साथ,
फिर केवल छड़ी ही नजर आएगी,
सुन लो आवाज दोस्तों की,
फिर कानों में मशीन नज़र आएगी,
हंस लो खिलखिला कर आज,
फिर नकली बत्तीसी ही झलक दिखाएगी,
जब दोस्त बुलाएं, चले जाओ,
फिर डाक्टरों से फुर्सत न मिल पाएगी,
समझ जाओ यारों, समझ जाओ,
ये मस्त उम्र फिर नहीं आएगी..
*मित्र 😘
पड़े पीठ पे जोर की थप्पी
समझ लेना मित्र आया है…
चुपके से आ आँखें ढंक ले
समझ लेना मित्र आया है…
गले मिलने जब जो फड़के
समझ लेना मित्र आया है…
उंचे स्वर में नाम ले पुकारे
समझ लेना मित्र आया है…
बिन कहे आ जाए घर में
समझ लेना मित्र आया है…
चेहरा देख उदासी भांपले
समझ लेना मित्र आया है…
फैसले को जब टास उछले
समझ लेना मित्र आया है…
तु-तुकारे जब सुनाई दे तो
समझ लेना मित्र आया है…
जेब ढीली करने मे हों झगड़े
समझ लेना मित्र आया है…
डांट पड़े जब गलती पर
समझ लेना मित्र आया है…
भूमिका मे ही कथा पढ़ ले
समझ लेना मित्र आया है…
खुल जाएं बंद किताब के पन्ने
समझ लेना मित्र आया है…
खाते देख संग बैठ जाए
समझ लेना मित्र आया है…
रात लड़े सुबह खुद आ जाए
समझ लेना मित्र आया है…
कदम रुक गए जब पहुंचे

हम रिश्तों के बाज़ार में…
✳बिक रहे थे रिश्ते
खुले आम व्यापार में..
✳कांपते होठों से मैंने पूँछा,
“क्या भाव है भाई
इन रिश्तों का..?”
✳ दुकानदार बोला:
✳ “कौन सा लोगे..?
✳ बेटे का ..या बाप का..?
✳ बहिन का..या भाई का..?
✳ बोलो कौन सा चाहिए..?
✳ इंसानियत का..या प्रेम का..?
✳ माँ का..या विश्वास का..?
✳बाबूजी कुछ तो बोलो
कौन सा चाहिए
✳चुपचाप खड़े हो
कुछ बोलो तो सही…
✳मैंने डर कर पूँछ लिया
“दोस्त का..”
✳दुकानदार नम आँखों से बोला:
✳“संसार इसी रिश्ते
पर ही तो टिका है…”
✳माफ़ करना बाबूजी
ये रिश्ता बिकाऊ नहीं है..
✳इसका कोई मोल
नहीं लगा पाओगे,
✳और जिस दिन
ये बिक जायेगा…
✳उस दिन ये संसार उजड़ जायेगा
*सभी मित्रों को समर्पित*
हो सके तो किसी के अच्छे दोस्त बनिए,

किसी को सुनने का प्रयास करिए,
क्योंकि काफी लोग अकेलेपन के अवसाद से ग्रसित हैं,
कभी सोचा है क्यों ??
क्योंकि इनके पास सुनाने वाले तो बहुत हैं पर सुनने वाला कोई नहीं…!
काश मेरा भी कोई ऐसा दोस्त होता..!!
इसीलिए हो सके तो किसी के अच्छे दोस्त बनिए..
मित्रता जीवन को जीवन देती है.

_ वह गर्व का पर्याय है.
_ दुःख में सुख की अनुभूति.
_ आकांक्षाओं की उड़ान और उड़ान की ज़मीनी डोर.
_ इन दिनों जब दोस्तियों के शोरूम खुल चुके हैं और बताया जा रहा है कि समान हित, सामान वर्ग के आधार पर दोस्तियाँ हों..
_ तब हमें सोचना होगा कि दोस्ती छत पर रखी बंद टंकियों में नहीं पलती.
_ वह खुले आकाश में फलती है.
_ वहाँ सहमति-असहमति एक कोहरे की तरह छाती-जाती रहती है.
_ वह रोज़ मिलने पर निर्भर नहीं है बल्कि ‘सब ठीक है’ के मैसेज भर से माह पार कर लेना जानती है.
_ मित्रता स्मृतियों के बनने और ..बनने और बनते रहने का योगफल है.!!
यह सच है कि लोग जो हंसते हैं और आपके साथ समय बिताते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि उनकी नीयत अच्छी है.

_ कुछ लोग अच्छे दिखने का अभिनय अच्छे से कर सकते हैं.
_. कुछ लोग सहायक और दयालु बनने का दिखावा करते हैं, लेकिन दिल में वे आपकी भलाई नहीं चाहते.
_ सच्चे दोस्त वे होते हैं.. जो आपकी गैरमौजूदगी में भी आपके नाम की रक्षा करते हैं.
_ वे मुश्किल वक्त में आपके साथ खड़े होते हैं.
_ सच्चे दोस्त आपको समर्थन, प्रेरणा और ईमानदारी देते हैं, चाहे सच्चाई सुनना कितना भी कठिन क्यों न हो.
_ दूसरी ओर, नकली लोग मुश्किलों के समय में गायब हो जाते हैं.
_ वे शायद आपकी परेशानियों का मजाक भी बना सकते हैं.
_ यह महत्वपूर्ण है कि आप यह ध्यान दें कि.. जब आप कठिनाई से गुजर रहे होते हैं, तो लोग कैसे व्यवहार करते हैं.
_ क्या वे मदद का हाथ बढ़ाते हैं, या फिर आपकी स्थिति पर बातें करते हैं ?
_ और यह याद रखना भी जरूरी है कि.. जो व्यक्ति दूसरों के बारे में बुरा बोलता है, वह शायद आपके बारे में भी वही करेगा.
_ इसलिए, अपनी सोच और भावनाओं को किसके साथ साझा करना है, इस पर सतर्क रहें.
_ हर कोई जो सुनता है, उसकी नीयत अच्छी नहीं होती.
_ सच्चे दोस्त आपकी सफलता का जश्न मनाते हैं, बिना किसी जलन के, और बिना किसी आलोचना के आपको सांत्वना देते हैं.
_ अपने आस-पास ऐसे लोगों को रखें.. जो आपके जीवन में सकारात्मकता और विकास लाते हैं.
_ कुछ सच्चे दोस्त नकली दोस्तों के एक बड़े झुंड से कहीं बेहतर होते हैं.
_ जब आपको यह पता चलता है कि कौन सच में आपके साथ है, तो जीवन हल्का हो जाता है.!!
मुश्किल वक़्त में ऐसे दोस्त अक्सर ज्यादा काम आते थे,

_ जिनसे कभी कोई ख़ास नज़दीकी नहीं रही..!! – राजेश जोशी

बहुत आसान है कह देना कि ऑनलाइन वाली दोस्ती बस टाइमपास होती है..पर क्यों…??

सच में होता है किसी के पास इतना टाइम जो वो यूँ ही बर्बाद करे. _ सच तो यह है कि इस Fb की दुनिया में…मिल जाता है कोई ऐसा…जिसे आपकी परवाह हो❤जिसे फर्क पड़ता हो आपके खुश😊 होने या आंसू  बहाने से…
जहाँ सिर्फ शब्दों से महसूस कर लिया जाता है एक दूसरे की आत्मा💞 को…
जहाँ किसी के साथ दिल खोल कर हंसने का मन कर जाये…
कभी मन भारी हो तो बस कुछ शब्दों से…उसके काँधे पर सर रख के रो लिया जाये…
और उन्हीं शब्दों में लिपटा
प्यारा सा एहसास दिलाये आपको कि आप अकेले नहीं हो…
कोई है….
आपके साथ जो आपके मुस्कुराने की वजह बनना चाहता है…
कोई है..जो कुछ इमोजी के ज़रिये आपको हॅंसाना चाहता है…
कोई है…..
जिसे सोचकर आप मुस्कुरा सकते हो बेवजह की कोई है….
जिसके कुछ शब्द आपकी आँखों में मुस्कुराहट ले आते हैं …
कभी उसकी अनदेखी…दु:खा देती है दिल को….
सिर्फ शब्दों से ही..मना भी लिया जाता है, सिर्फ शब्दों का ही तो खेल है, न कभी देख सके एक दूसरे को, न छू पाने की चाह, बस भावनाओं की डोर जो बांध ली जाती है..बिन कहे ..बिन सुने बस यूँ ही अनजाने में…
सिर्फ मन का रिश्ता _ उतनी ही ख़ुशी मिलती है जितनी किसी के साथ असल में वक़्त गुज़ार कर मिलती है…
अलग होने पर दुःख💔 भी उतना ही होता है…
टूट जाता है इंसान उतना ही जब दूसरा छोड़ कर चला जाता है
ये मन के रिश्ते …नहीं समझ आएंगे….
ये बात बोलना ही पड़ेगा

_ पैसों से कोई दोस्ती नहीं
_ इन पैसों के चक्कर में दोस्त भी दुश्मन बन जाते हैं,
_ दोस्तों को पैसे ना दो तो खुद को शर्मिंदगी होती है और देने के बाद मांगने में उससे भी ज्यादा शर्मिंदगी होती है…
_ इसलिए इस चक्कर में दोस्तों के बीच दरार संभव है
_ या फिर पैसे उतने ही उधार दें जो कि मांगने की जरूरत ही महसूस ना हो…
_ यहां लगभग हर इंसान ही जरूरतमंद है
_ आज के समय कोई आपकी मुसीबत के समय मदद कर रहा है तो समझ लीजिए कि आप बेहद भाग्यशाली हैं कि आपके पास ऐसे दोस्त हैं
_ मगर वो दोस्त अगर पैसे वापस नहीं मांग रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे उन पैसों की जरूरत नहीं है…
_ हम ये समझने में भूल कर बैठते हैं कि चंद सिक्कों के खातिर हमने अपनी दोस्ती दांव पर लगा दी है…
_ हम सभी कोशिश यही करें कि किसी से भी पैसे उस वक्त तक उधार ना मांगे जब तक यह ना लगे कि इस पैसे के बिना हमारी जिंदगी मुसीबत में पड़ने वाली है..
_ सबसे पहले तो हमें अपने बेवजह के खर्चों को खत्म करना चाहिए..
_ क्योंकि उधार के पैसों से लग्जरी जीवन व्यतीत नहीं करना चाहिए…
_ अपने रिश्तों को संभालिए, बेहतर दोस्त हीरे से भी कीमती होते हैं…
– हेसाम
हम इंसान बेहद भावुक होते हैं,

_ खासकर उन रिश्तों को लेकर जो हमने खुद बनाया हैं,
_ उन्हीं में से एक दोस्ती का रिश्ता होता है,
_ हम अपने दोस्तों से उम्मीद बहुत लगाए रखते हैं,
_ उम्मीद लगाना गलत भी नहीं है क्योंकि
_ एक अच्छे से दोस्त से ये जरूर उम्मीद रखते हैं कि
_ हमारे मुश्किल वक्त में जरूर साथ खड़ा होगा,
_ दुनियां भले ही मुझे गलत समझे मगर
_ मगर मेरा दोस्त जरूर समझेगा कि मैं गलत नहीं हूं
_ किसी भी इंसान की परिस्थितियां कभी एक सी नहीं होती, एक अच्छा दोस्त ये भली भांति जानता है,
_ इसलिए अपने दोस्तों को समझे और उनकी परिस्थितियों को भी,
_ हो सकता है कि कभी आपकी जरूरतों को किसी कारणवश पूरा ना कर सके तो इसका अर्थ बिल्कुल भी नहीं है कि वो दोस्त ठीक नहीं या वो गलत है,
_ वैसे भी आजकल सोशल मीडिया के दौर में दोस्ती का रिश्ता तो बेहद निजी होता है लेकिन जब ये टूटता है तो वो निजी ना होकर सार्वजनिक डिबेट का हिस्सा भी बन जाता है,
_ दोस्तों के बीच अनबन भी होंगे और तीखे तकरार भी लेकिन जो भी दोस्त हैं वो जरूर अपनी दोस्ती की निजता का ध्यान रखें क्योंकि बाज़ार में दोस्त नीलाम नहीं होते बल्कि दोस्ती का रिश्ता नीलाम होता है,
_ दोस्ती हमेशा दिल से टिकी होती है अगर किसी को लगता है कि दोस्ती जरूरतों के लिए है तो कृपया करके उसे दोस्ती का नाम न दें…
ना तो भावुक होकर कोई रिश्ता बनाए और ना ही भावुकता में बहकर कोई रिश्ता तोड़े…
# हेसाम
दोस्त एक या दो ही अच्छे होते हैं जीवन में, हद से ज़्यादा तीन चार, इससे ऊपर जो कोई हर किसी को अपना दोस्त बताता फिरता है..

_ उनके जीवन में जरूरत पड़ने पर कोई नज़र नहीं आता..
_ दोस्त.. दोस्त की तरह होना चाहिए,, भीड़ की तरह नहीं..
_ क्योंकि जरूरत से ज्यादा भीड़ किसी की दोस्त हो ही नहीं सकती..!!
– रिदम राही
मैं किसी से मित्रता करते समय उसकी जाति, उसका धर्म, उसका पद या उसकी आर्थिक स्थिति नहीं देखता हूँ.

_ वो अमीर है या गरीब है, चपरासी है या कलेक्टर है, किस जाति का है या किस धर्म का है ? मुझे यह सब कोई मायने नहीं रखता है.
_ मैं बस यह देखता हूँ कि वो इंसान कैसा है, उसका स्वभाव कैसा है, उसका चरित्र कैसा है और उसकी मानसिकता कैसी है ?
_ यदि वो एक साफ और नेक दिल वाला अच्छे स्वभाव और अच्छी मानसिकता का इंसान है तो वो मेरा मित्र है.
_ छोटा बड़ा ऊँच नीच राजा रंक कोई नहीं
प्रेम की धरा पे मित्र केवल एक मित्र है.
– Mayank Mishra
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