सुविचार 4804

प्रेम से इतने भर जाएँ कि शरीर के सारे संघर्ष समाप्त हो जाएँ। साथ ही अपने शरीर को • इन सद्भावना से भर दें कि जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य, सकारात्मकता, प्रेम, आनंद, मौन है तो और बढ़े.

सुविचार 4803

कर्मों का गणित बड़ा ही सीधा होता है,

कर भला तो हो भला और कर बुरा तो हो बुरा..

सुविचार 4802

हम हानि व कष्ट होने पर कुछ गवां ज़रूर देते हैं किन्तु उनसे शिक्षा लेते हुए ही हमें भविष्य का खाका खींचते हुए योजनाएं बनानी होंगी, ताकि वैसी हानिकारक एवं कष्टदायक घटनाओं की जीवन में पुनरावृत्ति न हो.

सुविचार 4800

आजकल सब कुछ सेट होने के बावजूद भी लगभग हम सभी अपसेट से ही रहते हैं. हर समय दिमाग़ में चिन्ता ही चल रही होती है. इसलिए हम निराश और हताश ज्यादा होते हैं.

जो हमें सहज मे मिलता है वह दूध के समान होता है और जो माँगने से मिलता है वह पानी के समान. लेकिन जो कलह करके, मनमुटाव करके ज़बरदस्ती हासिल किया जाता है वह तो रक्त के समान होता है.
जो खो गया है हमें उसकी चिंता नहीं करनी चाहिए बल्कि जो है उसका भरपूर आनंद लेना चाहिए. यदि हमारे दो दांत टूट भी गए तो क्या हुआ? बाकी तीस तो हैं. हम उन दो की याद में शेष को दरकिनार क्यों करें ?

सुविचार 4799

यदि आप गुस्से के एक छण में धैर्य रखते हैं, तो आप दुःख के सौ दिन से बच सकते हैं.
error: Content is protected