सुविचार 4751

निराशा का फंदा बेहद सख्त होता है, पर ऐसा नहीं कि इससे निकला ही न जा सके ;

सकारात्मक विचारों को मन में जगह दें, निराशा का फंदा स्वतः ही खुल जाएगा.

सुविचार 4748

“जिस चीज़ के लिए आदमी आज, जोर से, मचलता है, उसे पाकर एक दिन उसी से ऊब जाता है,

यही आदमी की फ़ितरत है, बस खिलौने बदल जाते हैं “

सुविचार 4746

किसी भी व्यक्ति की सहनशीलता, एक खींचे हुए रबड़ की तरह होती है,

एक सीमा से ज्यादा खींचे जाने पर उसका टूटना तय है..

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