सुविचार 4751
निराशा का फंदा बेहद सख्त होता है, पर ऐसा नहीं कि इससे निकला ही न जा सके ;
सकारात्मक विचारों को मन में जगह दें, निराशा का फंदा स्वतः ही खुल जाएगा.
सकारात्मक विचारों को मन में जगह दें, निराशा का फंदा स्वतः ही खुल जाएगा.
यही आदमी की फ़ितरत है, बस खिलौने बदल जाते हैं “
एक सीमा से ज्यादा खींचे जाने पर उसका टूटना तय है..