सुविचार 4692
दो हिस्सों में बंटी है ” ज़िंदगी सारी “
अभी उम्र नहीं है और अब उम्र नहीं है..
अभी उम्र नहीं है और अब उम्र नहीं है..
लेकिन इनकी छाप…हमेशा दूसरों के हृदय में विराजमान रहती है..
जब ये बात हम सभी जानते हैं__ तो फिर मानते क्यों नहीं ..?
_ उसी प्रकार वर्तमान में किए गए हर छोटे प्रयास भविष्य में बड़े परिवर्तन की ओर ले जाते हैं.!!