सुविचार 4858
समझदार इंसान ना तो किसी की बुराई सुनता है और न ही किसी की बुराई करता है.
उसे आज ही जहर की तरह त्याग देना ही उचित है.
अन्यथा उसे न करने के हजार बहाने हैं.
मेहनत पे मेहनत करो तो तक़दीर बन जाती है.
जिस तरह इंसान साँस छोड़ने में आनाकानी नहीं करता क्योंकि वह जानता है, एक साँस छोड़ने के बाद अगली साँस खुद-ब-खुद आएगी.
उसी तरह जीवन में भी चीज़ों को फ्री फ्लों में आने-जाने दें, उनसे चिपकाव न रखें.