सुविचार 4872
खून के संबंध से ही कोई, अपना नही होता है, प्रेम, सहयोग, विश्वास,
निष्ठा, सहानुभूति, सम्मान..ये ऐसे भाव हैं जो परायों को भी अपना बनाते हैं.
निष्ठा, सहानुभूति, सम्मान..ये ऐसे भाव हैं जो परायों को भी अपना बनाते हैं.
यह जानते हुए भी कि यहाँ कुछ स्थिर नहीं है.
तो यह उससे कहीं अच्छा है की कोई दूसरा उसे सुधारे !!
यदि यह जीवन है, तो इस पल की सार्थकता जीवन की सार्थकता है.
एक एक कर्म, एक फिल्म…. की तरह अपनी निगाहों ….के सामने झलकेगा …..
कोशिश करें कि ….अपनी फिल्म सबके देखने लायक हो …