सुविचार 4831
“जिंदगी का मेरा सूत्र बहुत ही सरल है, मैं सुबह जागता हूं तथा रात को सो जाता हूं.
इसके बीच में मैं जितना हो सके स्वयं को व्यस्त रखता हूं.”
इसके बीच में मैं जितना हो सके स्वयं को व्यस्त रखता हूं.”
यही परेशानीयों की खास वज़ह भी है “
सोच शुभ है तो, शुभता -फलित होती है, यही असली बात है,”
लेकिन उसे पाने की एक निश्चित प्रक्रिया पूर्ण करनी अनिवार्य होती है,”
जब कर्म का चक्र घूमकर वापस तुम पर आएगा तो कहीं के भी नहीं रह जाओगे.