सुविचार 4748
“जिस चीज़ के लिए आदमी आज, जोर से, मचलता है, उसे पाकर एक दिन उसी से ऊब जाता है,
यही आदमी की फ़ितरत है, बस खिलौने बदल जाते हैं “
यही आदमी की फ़ितरत है, बस खिलौने बदल जाते हैं “
एक सीमा से ज्यादा खींचे जाने पर उसका टूटना तय है..
लेकिन सत्य को जीने वाले सत्य को जीते भी हैं, जानते भी हैं।
सत्य को जानो मत, जियो।
हमारी अज्ञानता ही हमारे दुःख का कारण है.
आज से हम चुनौतियों में भी शांत रहें और अनोखे हल निकालें…