सुविचार 4985
जिसने अंधेरा जाना है, _ वही रोशनी को पहचान सकेगा.
एक अमीर व्यक्ति भी अपने जीवन को साधारण कहता है तो वहीं एक माध्यम वर्ग का व्यक्ति भी अपने जीवन को साधारण कहता है.
_ मगर जो बदकिस्मती बनकर आपके हिस्से में आ जाए, उससे लड़ना शायद इंसान के बस में नहीं होता, कुछ चीज़ें चाहकर भी बदली नहीं जा सकतीं, बस उन्हें स्वीकार करके आगे बढ़ना पड़ता है.!!
_फिर भी उनके होने का दर्द और खामियाज़ा हमें ही भुगतना पड़ता है,
_ शायद यही ज़िंदगी की सबसे अजीब बात है.
_ कुछ फैसले हमारे नहीं होते, हालात हमारे नहीं होते, फिर भी उनकी सज़ा हमें ही मिलती है.!!
– Nirarthak Nirarthak
और विडंबना यह है कि _ हमारे हाथ में प्रयास होता है …परिणाम नहीं !!!