मस्त विचार 4796
मुश्किल तो था उसके बिन रहना यारो,
फिर उसके रवैये ने सब आसान कर दिया..
फिर उसके रवैये ने सब आसान कर दिया..
जब मैं समंदर नहीं देख पाता, आसमान को देखने लगता हूँ…
झुकी नज़रों से मैं_ सब समझता रहता हूँ..
और मन में लगने वाली चोट..संभल कर जीना सिखाती है…
बुझ जाऊँगा किसी रोज़, सुलगते सुलगते…।
साँसों का भी कोई हिसाब रखता है क्या !!