मस्त विचार 4874
आग़ाज़ रो कर और अंत सो कर होना तो तय है,
_ क्यों ना सफर थोड़ा हँस कर गुज़ार लिया जाए।।
ज़िन्दगी अपनी कहानी स्वयं लिखती है..
_ वो भी कागजो व प्लानिंग पर लिखी जाने वाली ज़िन्दगी से अलग.!!
_ क्यों ना सफर थोड़ा हँस कर गुज़ार लिया जाए।।
_ वो भी कागजो व प्लानिंग पर लिखी जाने वाली ज़िन्दगी से अलग.!!
_ वर्षा को सहन करना ही होगा ..
_ कभी वक़्त मिले तो हमसे भी मुलाकात करना..
_ ऐसी दुखद बात को मै बयां कैसे करूं,,,,,
_ जो बात करे,,खुशी,,से..
कभी बहुत बाते किया करते थे हमसे _ अब खैरियत तक पूछा नहीं करते,,,