मस्त विचार 4013
आसुओं का शायद इसलिए कोई रंग नहीं होता,
_ क्योंकि जब ये आते हैं तो कोई संग नहीं होता..
_ क्योंकि जब ये आते हैं तो कोई संग नहीं होता..
_ आज हम उनके लिए महज एक भीड़ हो गए..!!
_ अब तुम हंसते हुए पहुंचो या रोते हुए, ये तुम पर निर्भर करता है..
_ मैंने अपनी नाव डूबा कर उसका सफ़र आसान कर दिया.!!
_ सबको पार लगाने वाली नाव आखिर में नदी में ही रह जाती है..!!
_ उससे बड़ा शुभ दिन और कौन सा हो सकता है, शुरुआत करें..
जब तुम्हें शिकायत – ” वक़्त और जमाने ” से नहीं बल्कि ” खुद ” से होगी..
कि, जिंदगी सामने थी और मैं संसार में उलझा रहा..!!