मस्त विचार 4011

तुम्हारे जीवन की नाव तो चल ही चुकी है..

_ अब तुम हंसते हुए पहुंचो या रोते हुए, ये तुम पर निर्भर करता है..

दो नावों पर सवार थी उसकी ज़िन्दगी,

_ मैंने अपनी नाव डूबा कर उसका सफ़र आसान कर दिया.!!

कितना अजीब है ना…

_ सबको पार लगाने वाली नाव आखिर में नदी में ही रह जाती है..!!

मस्त विचार 4010

शुभ मुहूरत का इंतजार न करें, आप जिंदा हैं

_ उससे बड़ा शुभ दिन और कौन सा हो सकता है, शुरुआत करें..

मस्त विचार 4008

एक दिन आएगा…

जब तुम्हें शिकायत – ” वक़्त और जमाने ” से नहीं बल्कि ” खुद ” से होगी..

कि, जिंदगी सामने थी और मैं संसार में उलझा रहा..!!

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