मस्त विचार 4612
” ना जाने किसकी दुआओं से जिंदा हूं
सौ शिकारी हैं, एक परिंदा हूं “
सौ शिकारी हैं, एक परिंदा हूं “
मै जैसा था फिर मुझे वैसा कर दो ।।
एवंम किसी को मुझसे कोई उम्मीद रखने की सलाह भी नहीं देता…!!
कि कभी दख़ल न कर सकूँ तेरी रजा में..
_ तुम देर से मिले….. इतना नुकसान ही काफी है..!!