मस्त विचार 4093
अपनों का व्यवहार किसी अपरिचित सा जान पड़ता है ;
खैर अब मुझे अभ्यास हो चुका कि अपनों को अपना ना समझने में ही भलाई है..
खैर अब मुझे अभ्यास हो चुका कि अपनों को अपना ना समझने में ही भलाई है..
धोखा भी धोखे से दिया उसने !!
खोज तो खुद की है खुदा तो बहाना है.
_पर वो याद वही रखेगा ..जो आप कर नहीं पाये..!!
_ ग़ैरों के मुक़ाबले अपनों से ही मिलता है.!!
_ बस मेरे कुछ अपनों ने मुझे ये प्यारा सा तरीका सिखाया !!
_ आप सब कुछ सह कर भी निखरने का हुनर रखते हो !!
_ दूसरों से कोई शिकवा नहीं.. पर अपनों पर नजर रखना..!!
उसकी खुशियां, उसकी मुस्कान, उसकी अच्छाई, उसकी सच्चाई..
_ कमाल कि बात यह है कि इतना कुछ छीन लेने के बाद भी वह खाली रह जाते हैं..!!
_ हर किसी के हुनर अलग ..अपने में लाजवाब हैं !!