मस्त विचार 4016
गर्दिश तो चाहती है, #तबाही मेरी मगर..
_ मजबूर है किसी की #दुआओं के सामने..!!
ज़िन्दगी तबाही के किनारे पे खड़ी है और आपको तेरी-मेरी पड़ी है..!!
जान तक देने की बात होती है यहां…!
_ पर यकीन मानो, दुआ तक दिल से नही देते लोग…!!
_ मजबूर है किसी की #दुआओं के सामने..!!
_ पहले पात्रता अर्जित कीजिए, उसके बाद ही कमियां निकालिए..!!
_ खूबियों के सिवाय अब मुझ में कुछ बचा ही नहीं..
..अपनी कमियां, अपनी खामियां दूर करते जाएँ,
_जब तक कि आपका असली स्वयं प्रकट न हो जाए.
_ क्योंकि जब ये आते हैं तो कोई संग नहीं होता..
_ आज हम उनके लिए महज एक भीड़ हो गए..!!
_ अब तुम हंसते हुए पहुंचो या रोते हुए, ये तुम पर निर्भर करता है..
_ मैंने अपनी नाव डूबा कर उसका सफ़र आसान कर दिया.!!
_ सबको पार लगाने वाली नाव आखिर में नदी में ही रह जाती है..!!