मस्त विचार 4643
क्यों न बदलूं मैं… तुम वही हो क्या ?
चलो मान लिया की गलत हूँ मैं… ये तो बताओ ” तुम सही हो क्या “..!
चलो मान लिया की गलत हूँ मैं… ये तो बताओ ” तुम सही हो क्या “..!
कुछ गैरों ने बर्बाद किया, कुछ अपने छोड़ गये…
मसला खुद खुश रहकर तुझे खुश रखने का,
इसलिए तेरे सामने हम रो भी नहीं सकते…….
क्यूँ न हम शीशे से कह दें…टूटा न करें !”
तुम पर नजर पड़ी और गुमराह हो गये..!!!
जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का..