मस्त विचार 3746
हर किसी के हाथ बिक जाने को तैयार नहीं,
_ मैं ” मैं ” हूँ किसी शहर का अखबार नहीं..
_ मैं ” मैं ” हूँ किसी शहर का अखबार नहीं..
बहुत हिम्मत चाहिए खुद को खुद से रोकने के लिए..
लेकिन बदलते हुए अपने कभी अच्छे नहीं लगते !!
_ गुनाहों पर अपने परदे डालकर, कहते हैं ज़माना बड़ा खराब है..!!
_ चालाक लोग तो चापलूसी से अपना काम निकालते हैं..!!