मस्त विचार 4681
जीत किसके लिए, हार किसके लिए,
ज़िंदगी भर ये तकरार किसके लिए।
जो भी आया है वो जायेगा एक दिन,
फिर ये इतना अहंकार किसके लिए॥
ज़िंदगी भर ये तकरार किसके लिए।
जो भी आया है वो जायेगा एक दिन,
फिर ये इतना अहंकार किसके लिए॥
हद से ज्यादा समझदारी ,,,,, जीवन को नीरस कर देती है.
जो चला गया वो थोड़े लौट आयेगा..
पैर अक्सर किनारों पे ही फिसला करते हैं.
जहाँ दर्द तो होता है. मगर आवाज़ नहीं होती..!