मस्त विचार 4577
अज़ब हाल ज़िन्दगी का, समझ आता नहीं,
खुशी हँसाती नहीं, ग़म मुझे अब रुलाता नहीं..
खुशी हँसाती नहीं, ग़म मुझे अब रुलाता नहीं..
आख़िर में हम ख़ामोश हो गए..
हम उसे भी जीना सीखा देते हैं, जिसे मरने का शौक हो..
कुछ ” लम्हे ” जीने का तजुर्बा भी सिखाते हैं..
अगर मैं उन्हें तोहफे में एक आईना दे दूँ..
जो हम नहीं सोचते हैं जिंदगी वो होती है..!!