मस्त विचार 4625
मैं जो रोऊँ तो मुस्कुराता ये भी नहीं,
” शुक्र है,” हवा ज़माने की आईने को लगी नहीं.
मैं जगाऊँ तुझे, तू भी खुद को जगा..
_ सारा जग है तेरा, बह तू बन के हवा.!!
” शुक्र है,” हवा ज़माने की आईने को लगी नहीं.
_ सारा जग है तेरा, बह तू बन के हवा.!!
क्योंकि अच्छा आंखों तक पहुंच पाता है, जबकि सरल ह्रदय तक !!
दरिया मे कूद जाओ, तो रास्ता देता है॥
…क्योंकि, जिंदगी नहीं रहती पर अच्छी यादें हमेशा जिन्दा रहती हैं.
लेकिन कमब्खत बदनामी बड़ा शोर करती है.
ज़िन्दगी में क्या पता कौन कब बदल जाए..