मस्त विचार 3676
एक कायदा सा हो गया है
किसी को अच्छा या किसी को बुरा कहना,
मानो इन छोर के बीच जैसे कुछ है ही नहीं…
किसी को अच्छा या किसी को बुरा कहना,
मानो इन छोर के बीच जैसे कुछ है ही नहीं…
हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है.
अपने ही क्यों दे रहे हैं जख्म, इस बात से हैरान हूँ मैं.
कभी – कभी ज्यादा नेकी भी सज़ा लाजवाब दिलाती है.
मन से निर्मल हो नहीं पाते, रोज- रोज गंगा नहाने वाले.
लेकिन यार, बात – बात पर रंग बदलें, इतने भी रंगीन नहीं हैं हम.