मस्त विचार 4613
एक सफर एक मुसाफ़िर और धुंधले रास्ते ।
जिन्दगी तुझे लफ्ज़ो में और कैसे बयां करू…
जिन्दगी तुझे लफ्ज़ो में और कैसे बयां करू…
सौ शिकारी हैं, एक परिंदा हूं “
मै जैसा था फिर मुझे वैसा कर दो ।।
एवंम किसी को मुझसे कोई उम्मीद रखने की सलाह भी नहीं देता…!!
कि कभी दख़ल न कर सकूँ तेरी रजा में..