मस्त विचार 4745
यहां हर अगले की यही कहानी है,
और कोई न साथ देने को तैयार और न हाथ थामने को..
और कोई न साथ देने को तैयार और न हाथ थामने को..
तुमको अपने आप ही … सहारा मिल जाएगा
कश्ती कोई डूबती … पहुँचा दो किनारे पे
तुमको अपने आप ही किनारा मिल जाएगा..
तबाह करने का हौसला भी रखता हूं..
मैंने कहा – यही तो खराबी है…
वो उतना ही बेपरवाह होकर मिलेगा.