मस्त विचार 4725
किसी की हँसी पर मत जाना साहब,
हंसने वाला किरदार कभी अपना दर्द किसी और को बताता नहीं..
हंसने वाला किरदार कभी अपना दर्द किसी और को बताता नहीं..
इसलिए बिखराव का होना भी जरूरी था.
जो काँटे बोकर जमी से गुलाब मांगते हैं.
और इससे नीचे नहीं आने वाला..
इज़्ज़त से जो मिल जाये वो कतरा ही बहुत है,,
_ बस जो भी हुँ अपने दम पर हुँ ” यही मेरे लिए काफी है “