खून के संबंध से ही कोई, अपना नही होता है, प्रेम, सहयोग, विश्वास,
निष्ठा, सहानुभूति, सम्मान..ये ऐसे भाव हैं जो परायों को भी अपना बनाते हैं.
विश्वास करना तब मुश्किल हो जाता है जब वही लोग, आपके सम्मान को गंदा करते
है, जो आपके साथ हैं.
दुनिया ने मुझे एक बात सिखाई-
_ यहाँ विश्वास से पहले विवेक ज़रूरी है, क्योंकि झूठ सिर्फ़ बोला नहीं जाता, कई बार उसे इतने विश्वास से परोसा जाता है कि लोग उसे सच मानने लगते हैं”





