मस्त विचार 3590

तमाशा लोग नहीं हम खुद बनते हैं, अपनी जिंदगी का..

_ हर किसी को अपनी कमजोरी बता कर..!!

अपने साथ गलत करने वालों को जरूर याद रखो,

_ लेकिन उन्हें भी याद रखना.. जिन्होंने खड़े होकर तमाशा देखा था.!!

इंसान तो तमाशा देखने आता है, मरहम तो सिर्फ ऊपर वाला ही लगाता है;

_ दुनिया के सामने रोना अपनी बेबसी का सरेआम मज़ाक उड़ाना है.!!

अक्सर आपकी हाँ में हाँ मिलाने वाले लोगों से सावधान रहिये..

_ तुष्टीकरण करने वाला व्यक्ति किसी का सगा नहीं होता.
_ जो आज आपके साथ मिलकर किसी और का तमाशा देख रहा है,
_ कल को किसी और के साथ मिलकर आपका तमाशा देख रहा होगा.
_ किसी पर अंधा विश्वास मत कीजिये.!!
दुनिया तमाशा है, पर मैं उसमें कहाँ खड़ा हूँ – दर्शक, खिलाड़ी या साक्षी ?

_ जब यह साफ होने लगता है, तभी जीवन का असली मोड़ शुरू होता है.
_ अगर दुनिया तमाशा है, तो असली सवाल यही है –
_ मैं दर्शक हूँ, अभिनेता हूँ, या साक्षी हूँ ?
_ अगर हम भीड़ में बह रहे हैं → हम भी उसी तमाशे का हिस्सा हैं.
_ अगर हम देख रहे हैं और समझ रहे हैं → हम दर्शक हैं.
_ और अगर हम भीतर शांत रहकर सबको आते-जाते देख पा रहे हैं → हम साक्षी हैं.
“दुनिया तमाशा है, पर मैं उसमें जितना जागा हुआ हूँ, उतना ही उससे अलग खड़ा हूँ.”

मस्त विचार 3589

दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं जो महत्वहीन हो _ हाँ ऐसा आवश्य हो सकता है कि किसी चीज / वस्तु का हमारे या आपके लिए कोई महत्व ना हो..

_ लेकिन किसी दूसरे के लिए उन चीजों का बहुत महत्व होगा !!

मस्त विचार 3588

जहाँ तक रास्ता दिख रहा है, वहाँ तक चलिए,

आगे का रास्ता वहाँ पहुँचने के बाद दिखने लगेगा.

कहीं पहुंचने के लिए.. _ कहीं से निकलना बहुत जरूरी है…
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