मस्त विचार 3180

मुझे मत सिखाइये की ज़िन्दगी कैसे जीते हैं,

आप मुझसे सिखीये कि जिन्दा रहकर हर ग़म को कैसे पीते हैं.

मस्त विचार 3179

मुझे कौन याद करेगा इस मतलबी दुनिया में ऐ- खुदा,

बिना मतलब के तो ये लोग तुझे भी याद नहीं करते.

मस्त विचार 3177

नसीब की बारिश कुछ इस तरह से होती रही मुझ पर,

_ ख्वाइशें सूखती रही और पलकें भीगती रही.

मन के अंदर भी ऋतुएं बदलनी चाहिए.

_ लंबे अकाल के बाद एक बरसात तो अंदर भी होनी चाहिए..
…और जब बरसात हो तो कोई झींसी-फूंसी नहीं, बस धारासार बरसे और बरसते ही रहे.
_ इतनी बारिश हो अंदर कि बहुत कुछ बह जाए… बहुत सी स्मृतियाँ, बहुत से लोग जो अंदर घर कर बैठे हैं, सब बह जाएँ.!!
– दर_बदर

मस्त विचार 3176

” ना रहे मन में किसी के टीस, सदैव मुस्कुराता रहे आपका 2022 “
हमारे लिए साल का बदलना तभी सार्थक है, जब हम भी इसके साथ स्वयं बदलें.

मस्त विचार 3175

फूल की उम्मीद थी मगर पत्थर निकला,

ये साल तो पिछले साल से भी बत्तर निकला !

दिन घटा घटा कर वर्ष कर रहे हैं,

हम वक्त को ऐसे खर्च कर रहे हैं..

error: Content is protected