मस्त विचार 3180
मुझे मत सिखाइये की ज़िन्दगी कैसे जीते हैं,
आप मुझसे सिखीये कि जिन्दा रहकर हर ग़म को कैसे पीते हैं.
आप मुझसे सिखीये कि जिन्दा रहकर हर ग़म को कैसे पीते हैं.
बिना मतलब के तो ये लोग तुझे भी याद नहीं करते.
काश उस शख्स ने मरना भी सिखा दिया होता.
_ ख्वाइशें सूखती रही और पलकें भीगती रही.
ये साल तो पिछले साल से भी बत्तर निकला !
हम वक्त को ऐसे खर्च कर रहे हैं..