मस्त विचार 3176

” ना रहे मन में किसी के टीस, सदैव मुस्कुराता रहे आपका 2022 “
हमारे लिए साल का बदलना तभी सार्थक है, जब हम भी इसके साथ स्वयं बदलें.

मस्त विचार 3175

फूल की उम्मीद थी मगर पत्थर निकला,

ये साल तो पिछले साल से भी बत्तर निकला !

दिन घटा घटा कर वर्ष कर रहे हैं,

हम वक्त को ऐसे खर्च कर रहे हैं..

मस्त विचार 3171

लोग कहते हैं समझो, तो खामोशियाँ भी बोलती हैं,

मैं अरसे से ख़ामोश हूँ, वो बरसों से बेख़बर है..

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