मस्त विचार 4794
उठा कर आँख किसी को देखता नहीं,
झुकी नज़रों से मैं_ सब समझता रहता हूँ..
झुकी नज़रों से मैं_ सब समझता रहता हूँ..
और मन में लगने वाली चोट..संभल कर जीना सिखाती है…
बुझ जाऊँगा किसी रोज़, सुलगते सुलगते…।
साँसों का भी कोई हिसाब रखता है क्या !!
आप भी कभी मुझे अपनाते तो अच्छा लगता !!
वरना मेरी उम्मीद बढ़ती ही जा रही थी..