मस्त विचार 4786

बिछड़ते वक्त सारी बुराइयाँ गिनाई उसने,

सोच रहा हूँ _ जब मिले थे तो _ कौन सा हुनर था मुझमें..

मस्त विचार 4783

चार दिन की ज़िंदगी मैं किस किस से कतरा के चलूँ,

ख़ाक हूँ मैं, ख़ाक पर क्या ख़ाक इतरा के चलूँ..

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