मस्त विचार 2839

मेरी नरमी को मेरी कमजोरी न समझना ऐ नादान,

सर झुका के चलता हु तो सिर्फ ऊपर वाले के खौफ से….!!

मस्त विचार 2837

लफ्ज़ों के इत्तेफाक में बदलाव कर के देख,

_ तू देख कर न मुस्कुरा बस मुस्कुरा के देख.!!

उड़ते फिरते हैं तितलियों की तरह, लफ्ज़ कागज़ों पर बैठते ही नहीं..!!

मस्त विचार 2835

*चेहरा देख कर इंसान को पहचानने की कला थी मुझमें* *साहिब*

*तकलीफ तो तब हुई जब* *एक ही इंसानो के पास चेहरे बहुत हैं*

मस्त विचार 2834

क्यूँ नहीं महसूस होती उसे तकलीफ़ “मेरी”

जो अक्सर कहते थे बहुत अच्छे से जानते हैं “तुझे”….

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