मस्त विचार 2982
करोड़ों लोगों की क्या बात करूँ,
मेरे दोनों पाँव भी कभी साथ नहीं चलते.
मेरे दोनों पाँव भी कभी साथ नहीं चलते.
तो ख़्वाबों के चिराग अक्सर बुझ जाया करते हैं.
उतना ही मिलो किसी से जितना वो मिलना चाहता है.
वरना फितरत थी गैरों पर भी भरोसा करने की.
_ स्वयं पर विजय पाकर आनंद मिलता है.
मगर उसमें गांठ पड़ ही जाती है.