मस्त विचार 2733
किसे कहूँ अपना किसे कहूँ पराया,
जब सबको ही मेरे रब ने बनाया.
देख कर दिलों में भेद की दीवार,
कभी मैं रोया कभी मुस्कुराया.
जब सबको ही मेरे रब ने बनाया.
देख कर दिलों में भेद की दीवार,
कभी मैं रोया कभी मुस्कुराया.
हर वक़्त वाह वाह की ख्वाहिश नहीं होती.
मैंने मुस्करा के कहा….अपनी औकात में..!!
मैं उठा लाया हूँ झाड़कर खुद को..!!
आज तेरा है, कल मेरा भी आएगा.