मस्त विचार 2837

लफ्ज़ों के इत्तेफाक में बदलाव कर के देख,

_ तू देख कर न मुस्कुरा बस मुस्कुरा के देख.!!

उड़ते फिरते हैं तितलियों की तरह, लफ्ज़ कागज़ों पर बैठते ही नहीं..!!

मस्त विचार 2835

*चेहरा देख कर इंसान को पहचानने की कला थी मुझमें* *साहिब*

*तकलीफ तो तब हुई जब* *एक ही इंसानो के पास चेहरे बहुत हैं*

मस्त विचार 2834

क्यूँ नहीं महसूस होती उसे तकलीफ़ “मेरी”

जो अक्सर कहते थे बहुत अच्छे से जानते हैं “तुझे”….

मस्त विचार 2833

ध्यान से सुनो और उसे हासिल करो जिसे आप ढूंढ रहे थे.
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है..

_ तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है,
_ जैसे रूह में साँसों की कोई महफ़िल है.
_ तेरे बिना ये लम्हे अधूरे लगते हैं,
_ हर मुस्कान में कोई खाली सी तसवीर लगते हैं.
_ तू है तो रंग हैं, तू है तो रोशनी है,
_ तेरे बिना तो जैसे हर घड़ी में तन्हाई ही तन्हाई है.
_ बोलता हूँ तो तू सुनता नहीं,
_ पर खामोशी में भी तेरा नाम धड़कता वहीं.
_ दुनिया अपनी है, फिर भी अजनबी सी लगे,
_ क्योंकि तू नहीं तो ये भीड़ भी वीरान लगे.
_ तू पास ना सही, पर एहसास में है,
_ मेरी हर दुआ, हर साँस में बस तेरा नाम है.
– क्योंकि तू है, तो सब कुछ है.!!
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