मस्त विचार 2791
कभी दरखतों के तले, सुनी हैं तुमने हवा की बातें,
बिना अल्फ़ाज़ों के कहती हैं बड़ी गहरी बातें।
हैं बादल भी मेरे हमराज़ सुनते हैं वो भी मेरी बातें,
चुपके से वो कहीं दूर फिर बरसा जातें हैं राज़ की बातें।
बिना अल्फ़ाज़ों के कहती हैं बड़ी गहरी बातें।
हैं बादल भी मेरे हमराज़ सुनते हैं वो भी मेरी बातें,
चुपके से वो कहीं दूर फिर बरसा जातें हैं राज़ की बातें।
जब अपनों से उम्मीद कम हो गयी.
” बीज ” को ” दफन ” होना पड़ता है.
अच्छे इंसान से बदला लेते हैं.
कैद हैं आप अपने ही, नजरिये के पिंजरे में.
लेकिन ये गुजरती भी नहीं अपनों के बिना.