मस्त विचार 2883

फिर एक दिन हसरतों से हार कर,

हकीकत से मैंने भी दोस्ती कर ली !!!

हसरतों को छोड़ना ही उचित है, क्योंकि

यह दुखों को निमंत्रण है; हकीकत में आना ही सुखों का आगमन है.

मस्त विचार 2879

तेरा (खुदा) ही गीत हूँ तु्झी को सुनाता हूँ,

संगीत भी मैं तेरा हूँ तेरे लिये हीे बजाता हूँ,

खूबियाँ हैं तेरी मुझमें तुझी पे लुटाता हूँ.

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