मस्त विचार 2797
मैं वो क्यों बनू जो तुम्हें चाहिए ?
तुम्हें वो कबूल क्यों नहीं जो मैं हूँ ?
तुम्हें वो कबूल क्यों नहीं जो मैं हूँ ?
*मनुष्य तो जितना विनम्रता से झुकता है उतना ही ऊपर उठता है”…।*
_ भय, क्रोध व शोक चेहरे को विकृत बनाते हैं.
प्रसन्नता और विनम्रता से चेहरे का सौंदर्य बढ़ता है.
एक वक्त के बाद हम खोई चीज़ों का शोक भी नहीं मनाना चाहते हैं.!!
फिर भी ना जाने क्यों अकेला सा मन है…!!
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे.
मैंने चुप रहके बाज़ी पलट दी.
लोग अक्सर दूसरों का सामान खो देते हैं.