मस्त विचार 2720
करते हैं मेरी कमियों को बयान ऐसे,
लोग अपने किरदार में फ़रिश्ते हों जैसे.
लोग अपने किरदार में फ़रिश्ते हों जैसे.
फिक्र तो वो करें, जो बोलते कुछ हैं, करते कुछ हैं,
दिखते कुछ हैं और होते कुछ हैं.
बेहतरीन दिनों के लिए बुरे दिनों से लड़ना पड़ता है.
सुना है कम बोलने से बहुत मसले सुलझ जाते हैं.
_ वह असल में एक नई शुरुआत हो सकती है ..
ढह जाऊँ तो रेत सह जाऊँ तो पीर.