मस्त विचार 2544
दगा मुझे मेरे अपनों ने दिया
और मैं ज़िन्दगी भर गैरों से डरता रहा।।
और मैं ज़िन्दगी भर गैरों से डरता रहा।।
जो जगत के संग नाच उठे,,,,,वो ही है विरला ज्ञानी.
और संबंध ऐसे हों जो याद करने को मजबूर कर दे !!
जाने कितना ज़हर भरा, अब लोगों की बोली में.
ये हौसले हमारे सुन तुझसे भी बड़े है.