मस्त विचार 2636
कहाँ ये जानते थे कि रस्में उल्फ़त कभी यूँ भी निभानी होगी….
तुम सामने भी होंगे और हमें नज़रे झुकानी होगी…..
तुम सामने भी होंगे और हमें नज़रे झुकानी होगी…..
ये यहाँ वहां की खबरें तुझे बदगुमां कर देंगी…!!!
_ बेहतर यही है की हम जरूरतों की गल्ली में मुड़ जाएँ.!!
खुद पर बीत जाने से समझ आती हैं.
कैसे मिलता …. था ही नहीं…..
जो दिल दुखाते हैं उनसे थोड़ा दूर रहा जाए.