मस्त विचार 2624
हम तो सोचते थे कि लफ्ज ही चोट करते हैं,
मगर कुछ खामोशियों के ज़ख्म तो और भी गहरे निकले !
मगर कुछ खामोशियों के ज़ख्म तो और भी गहरे निकले !
बस जरा चुप हो जाएं तो सुनाई देगा.
पल दो पल साथ रह कर मेरी आदत ना खराब करो.
बस इंसान ही है जो किसी भी वक्त बदल जाता है.
कोई थोड़ा सा मीठा बोले तो मैं बिक जाता हूँ.
_ लेकिन आपको अपनी हर बात का ज्ञान होना चाहिए..