मस्त विचार 2699
ज़िंदगी का ” लम्हा ” बहुत छोटा सा है…
कल की कोई ” बुनियाद ” नहीं है
और आने वाला कल सिर्फ ” सपने ” में ही है..
अब बच गए इस ” पल ” में..
कल की कोई ” बुनियाद ” नहीं है
और आने वाला कल सिर्फ ” सपने ” में ही है..
अब बच गए इस ” पल ” में..
और हम समझते थे कि उनकी रौनकें हम से है !
उसे भी किसी नज़र का इंतज़ार होता है…
कुछ तालाब खुद को समंदर समझ बैठे हैं.
मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूंढ़ती रही.