मस्त विचार 2693
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ,
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ.
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ.
आज का ये दिन इक उम्र बन के गुज़रा है..!!
कुछ हक़…..दिए नहीं जाते…..लिए जाते हैं..
धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं.
बेगुनाह हो कर भी “मैंने” सजायें भुगती हैं.
लेकिन सिर्फ बातों से.