मस्त विचार 2438
अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर ऊँगली ;
जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती..
जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती..
और मेरी निग़ाहें हैं, सूरज के ठिकानों तक.
बदले में ज़िन्दगी की हर ख़ुशी तबाह की है…
ये तो ज़िन्दगी है जो समझदार बनाती जा रही है.
वरना गैरो की कहां इतनी ओकात _ की आंख में आंसू ला दे..