मस्त विचार 2629
एक ठहरा हुआ ख़याल उसका,
कितने लम्हों को रफ़्तार देता है….!!!
कितने लम्हों को रफ़्तार देता है….!!!
हवाओं ने जब साथ छोडा तो, आ कर जमीन पर ही बिखरेगी……
और बाकी आधे लोगों का खयाल है कि आप इसी लायक हो.
जो आपसे वह करवा लेती है, जिसे करना सबके वश में नहीं होता.
यहां मंजर खामोशियों का है तो फ़िर क्या किया जाये.
मगर कुछ खामोशियों के ज़ख्म तो और भी गहरे निकले !